अक्टूबर की गर्मी से बेहाल? पानी, सूती कपड़े और हल्के खाने से बचाव के पांच तरीके
बारिश जाने के बाद सितंबर के आखिर और अक्टूबर में उमस भरी गर्मी शुरू हो जाती है, जिसे ऑक्टोबर हीट कहते हैं।
बारिश का मौसम खत्म होता है तो लगता है कि अब ठंड शुरू होगी, लेकिन ऐसा होता नहीं। सितंबर के आखिर और अक्टूबर में एक अजीब सी गर्मी शुरू हो जाती है, जिसे ऑक्टोबर हीट कहा जाता है। बारिश चली जाती है, मगर हवा में नमी बहुत रहती है। पसीना आता है, पर सूखता नहीं। बदन जलता सा लगता है, जी घबराता है और इसका सीधा असर सेहत और त्वचा पर पड़ता है।
इन दिनों थोड़ी भी लापरवाही हुई तो डिहाइड्रेशन, त्वचा पर दाने, थकान और सिरदर्द जैसी तकलीफें शुरू हो जाती हैं। इसलिए इस गर्मी में अपना ख्याल रखना काफी जरूरी है। यहां पांच बातें दी जा रही हैं।
पहली बात पानी की है। ऑक्टोबर हीट में पसीना बहुत आता है और शरीर में पानी की मात्रा कम होने से डिहाइड्रेशन हो जाता है। इसलिए दिन भर में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी पीने को कहा गया है। प्यास लगे तभी पानी पिएं, ऐसा न करें। थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पीते रहें।
सिर्फ सादा पानी ही नहीं, नींबू पानी, नारियल पानी, छाछ, कोकम शरबत और जीरा पानी भी लेते रहें। इससे शरीर में नमक का संतुलन भी बना रहता है। बाहर निकलते समय साथ में पानी की बोतल जरूर रखें। कोल्ड ड्रिंक और चाय-कॉफी ज्यादा न पिएं, क्योंकि इनसे उल्टा और प्यास लगती है।
दूसरी बात कपड़ों की है। इन दिनों कपड़ों का चुनाव बहुत मायने रखता है। तंग कपड़े, जींस और नायलॉन के कपड़े बिल्कुल न पहनें, क्योंकि इनसे पसीना और बढ़ता है और बदन पर दाने निकलते हैं। हमेशा सूती, कॉटन के ढीले कपड़े पहनें। सूती कपड़े पसीना सोख लेते हैं और बदन को हवा लगती है। रंग भी मायने रखता है। काले, नीले जैसे गहरे रंग गर्मी ज्यादा खींचते हैं, इसलिए सफेद, हल्का नीला या हल्का हरा जैसे फीके रंग पहनें। ऑफिस जाते समय भी हो सके तो कॉटन के ही कपड़े पहनें।
तीसरी बात खाने की है। ऑक्टोबर हीट में भारी खाना टालें। तेल वाली, तली हुई और मसालेदार चीजें खाने से और ज्यादा गर्मी लगती है और पेट बिगड़ता है। खाने में ज्यादा पानी वाले फल लें। तरबूज, खरबूजा, खीरा, संतरा, मौसंबी और अंगूर रोज खाएं। दही, छाछ, सलाद और पत्तेदार सब्जियां खाएं। नॉनवेज और ज्यादा तीखा खाना इन दिनों कम करें। रात का खाना एकदम हल्का रखें और खाना वक्त पर खाएं।
चौथी बात दोपहर की है। दोपहर 12 से 4 बजे के बीच धूप सबसे तेज होती है। इस वक्त हो सके तो घर से बाहर न निकलें, बहुत जरूरी काम हो तभी जाएं। जाना ही पड़े तो छाता लें, सिर पर टोपी पहनें, आंखों पर चश्मा लगाएं और साथ में पानी की बोतल रखें। छोटे बच्चों और बुजुर्गों को इस वक्त बाहर न भेजें, क्योंकि उन्हें लू का असर जल्दी होता है। बाहर से आकर तुरंत ठंडा पानी न पिएं, थोड़ी देर रुककर फिर पानी पिएं।
पांचवीं बात साफ-सफाई की है। पसीने से बदन पर बैक्टीरिया बढ़ते हैं, जिससे खुजली, दाने और घमौरियां होती हैं। इसलिए इन दिनों दिन में दो बार नहाएं। नहाने के पानी में थोड़ा नीम का पानी या फिटकरी डाल दें तो चलेगा। नहाने के बाद बदन पूरी तरह सुखा लें। ज्यादा खुशबू वाला साबुन या पाउडर न लगाएं। कपड़े रोज बदलें और पसीने से भीगे कपड़े ज्यादा देर बदन पर न रखें।
ऑक्टोबर हीट कुछ ही दिनों की होती है, लेकिन इन दिनों सेहत का ध्यान न रखा जाए तो बीमार पड़ने में वक्त नहीं लगता। इसलिए खूब पानी पिएं, हल्का खाएं, सूती कपड़े पहनें और दोपहर की धूप से बचें। थोड़ी सावधानी रखी जाए तो यह ऑक्टोबर हीट भी आसानी से निकल जाएगी।