मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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19:48 IST

अहिल्यानगर जिला बैंक चुनाव: बिनविरोध पर सहमति की कोशिश, राम शिंदे बोले - कोई अपना अलग एजेंडा नहीं चलाए

विधान परिषद सभापति राम शिंदे ने कहा कि जिला बैंक सबकी है, कोई स्वतंत्र अजेंडा नहीं चलेगा; उधर संगमनेर की सर्वदलीय बैठक में बिनविरोध चुनाव पर शुरुआती सहमति बनी।

अहिल्यानगर जिला बैंक चुनाव: बिनविरोध पर सहमति की कोशिश, राम शिंदे बोले - कोई अपना अलग एजेंडा नहीं चलाए
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

अहिल्यानगर जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के चुनाव के लिए फॉर्म भरने की प्रक्रिया शुरू होते ही जिले की राजनीति में नए समीकरण बनने लगे हैं। सूखे के साये में बैंक का चुनाव बिनविरोध कराने के लिए सभी पार्टियों की तरफ से कोशिशें तेज हो गई हैं। इसी बीच विधान परिषद के सभापति राम शिंदे ने साफ इशारा दिया कि इस पूरी प्रक्रिया में किसी का भी अलग निजी अजेंडा नहीं चलने दिया जाएगा।

राम शिंदे ने एक पत्रकार परिषद में कहा, "जिला बैंक सबकी है। परेशानी में फंसे किसानों और जनता को राहत देने के लिए सबको साथ आना चाहिए, लेकिन कोई अपना अलग अजेंडा नहीं थोपे।"

इससे पहले वरिष्ठ नेता यशवंतराव गडाख ने बैंक का चुनाव बिनविरोध कराने की बात कही थी, जिसके बाद इस दिशा में हलचल तेज हुई। रविवार को संगमनेर में बालासाहेब थोरात की पहल पर हुई सर्वदलीय बैठक में भी चुनाव बिनविरोध कराने पर शुरुआती सहमति बनने की बात सामने आई है। इस बैठक के बाद अब तालुका स्तर पर बातचीत करके अंतिम फैसला निकालने की कोशिश की जा रही है।

लेकिन इस बैठक में राम शिंदे मौजूद नहीं थे, जिसके चलते बिनविरोध चुनाव की प्रक्रिया में उनकी भूमिका को लेकर सवाल उठे थे। इसी पृष्ठभूमि में शिंदे ने पत्रकार परिषद में अपनी बात साफ करते हुए कहा कि उन्हें बिनविरोध चुनाव से कोई ऐतराज नहीं, लेकिन फैसला सभी संबंधित लोगों को विश्वास में लेकर ही होना चाहिए। उन्होंने कहा, "सब मिलकर कोशिश करें तो अच्छा संदेश जाएगा। लेकिन अगर कोई अपना स्वतंत्र अजेंडा चलाने की कोशिश करे तो यह गलत है। जिला बैंक सबकी मेहनत है और इसका संचालक मंडल भी सबको साथ लेकर चलना चाहिए।"

शिंदे ने कहा कि जिले पर फिलहाल सूखे का साया है और किसान आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। ऐसे हालात में जिला बैंक के चुनाव पर राजनीतिक टकराव भड़काने के बजाय आपसी समझ से रास्ता निकालने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जिला बैंक सिर्फ राजनीतिक ताकत का अड्डा नहीं, बल्कि किसानों, जमाकर्ताओं और कर्जदारों से जुड़ी एक अहम सहकारी संस्था है। सर्वदलीय बैठक में भी यह राय रखी गई थी कि चुनाव बिनविरोध हुआ तो सहकार क्षेत्र में अच्छा संदेश जाएगा। मगर बिनविरोध का फैसला लेते वक्त किसे कितनी सीटें, किस गुट को कितना प्रतिनिधित्व और इच्छुक उम्मीदवारों को कैसे समायोजित किया जाएगा, यह सवाल अब अहम होंगे। संगमनेर की बैठक में बैंक की 21 संचालक सीटों में से कुछ सीटों पर सर्वसम्मति से उम्मीदवार देने पर चर्चा हुई। मिली जानकारी के मुताबिक सात सीटों के लिए बिनविरोध का फॉर्मूला तय करने पर बात हुई, जबकि बाकी सेवा सोसाइटी क्षेत्र की 14 सीटों के लिए अलग पैनल की संभावना भी जताई गई। थोरात और सुजय विखे पाटील को समन्वय की जिम्मेदारी दिए जाने की भी बात सामने आई है, हालांकि इसका अंतिम स्वरूप नामांकन और आगे की तालुका स्तर की बातचीत के बाद ही साफ होगा।

लंबे समय से राजनीतिक विरोधी रहे थोरात और विखे गुट के बैंक चुनाव के लिए एक मंच पर आने से सहकार क्षेत्र के समीकरणों में बड़ी हलचल मानी जा रही है। लेकिन इस प्रक्रिया में हर तालुका और हर इच्छुक गुट को विश्वास में लेना जरूरी होगा, वरना बिनविरोध की चर्चा एक तरफ और असल चुनावी तैयारी दूसरी तरफ, ऐसी स्थिति बन सकती है।

खुद चुनाव लड़ेंगे या नहीं, इस सवाल पर राम शिंदे ने सीधे घोषणा तो नहीं की, लेकिन अपनी सक्रिय भागीदारी के साफ संकेत दिए। उन्होंने बताया कि पिछली वार्षिक आम सभा में ही उन्होंने जिला बैंक चुनाव में सक्रिय भागीदारी को लेकर इशारा दिया था। कर्जत-जामखेड क्षेत्र की दो विविध कार्यकारी संस्थाओं ने उनके नाम से प्रस्ताव पास किए हैं, और तालुका प्रतिनिधियों की मतदाता सूची में भी उनका नाम है। शिंदे ने कहा, "मैंने पहले ही सक्रिय भागीदारी की बात कही थी। मेरे नाम से प्रस्ताव हुए हैं, मतदाता सूची में भी मेरा नाम है, इसलिए मेरी सक्रियता की चर्चा होना गलत नहीं। लेकिन सहकार में सबको साथ लेकर ही आगे बढ़ना पड़ता है।"

बैंक के भविष्य को लेकर शिंदे ने कहा कि बैंक टिके और सक्षम बने, इस पर जोर देना जरूरी है। आम किसान को बैंक का फायदा मिलना चाहिए, और सहकार क्षेत्र की बाकी संस्थाओं के लिए भी बैंक की भूमिका अहम है। उन्होंने कहा कि सहकार की पुरानी परंपराओं को आगे ले जाने की जरूरत है और बैंक के चुनाव को सिर्फ राजनीतिक प्रतिष्ठा की लड़ाई के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना था कि संचालक मंडल में अलग-अलग तबकों को प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए, न कि किसी एक गुट या व्यक्ति का दबदबा बने।

शिंदे ने यह भी कहा कि उनके पास भी कई इच्छुक लोग आ रहे हैं। उन्होंने कहा, "मेरे पास भी कई लोग काम कर रहे हैं। उन्हें भी मैं बता रहा हूं कि एक बार जिले का फैसला हो गया और सबकी सहमति से कोई बात तय हुई, तो उसी के मुताबिक आगे बढ़ना पड़ेगा।" उन्होंने साफ किया कि थोरात की अगुवाई में हुई बैठक की अंतिम रणनीति अभी तक उन तक नहीं पहुंची है, इसलिए बैठक में असल में क्या तय हुआ, इसकी आधिकारिक जानकारी मिलने के बाद ही वे अपनी आगे की भूमिका साफ कर पाएंगे।

शिंदे ने कहा कि संगमनेर की बैठक के बाद अब तालुका स्तर की बैठकों का रास्ता खुला है, और इस दौरान सभी बड़े नेताओं से बातचीत होना और बैठक के फैसले का साफ संदेश सभी इच्छुक लोगों तक पहुंचना जरूरी है। उन्होंने कहा, "जिनकी अगुवाई में बैठक हुई, उन्हें सबसे तालमेल बिठाकर चुनाव आगे ले जाना चाहिए। कल की बैठक का एजेंडा या रणनीति अभी तक मुझ तक नहीं पहुंची है, इसलिए सबको विश्वास में लेकर ही आगे बढ़ना जरूरी है।"

राम शिंदे ने बिनविरोध का विरोध न करते हुए 'सबको साथ लो' और 'अलग अजेंडा नहीं चलेगा' का साफ संदेश दिया है, जिससे अब थोरात की अगुवाई वाली समन्वय प्रक्रिया में उनकी भूमिका अहम मानी जा रही है। दूसरी तरफ इच्छुक उम्मीदवारों और अलग-अलग गुटों को संतोषजनक प्रतिनिधित्व देने की चुनौती भी सामने है। ऐसे में जिला बैंक का चुनाव बिनविरोध कराने की कोशिशें जारी होने के बावजूद, सीटों के बंटवारे की असली परीक्षा अभी बाकी है, इस पर पूरे जिले की नजर टिकी है।

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