अदानी ग्रुप का इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में अधिग्रहण 1 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचा
पावर, पोर्ट, एयरपोर्ट, ट्रांसमिशन और रिन्यूएबल एनर्जी सहित करीब 20 एसेट्स की खरीद, कुल कीमत 1,03,006 करोड़ रुपये।
भारत ही नहीं, पूरे एशिया के सबसे अमीर लोगों में शुमार गौतम अदानी की अगुवाई वाले अदानी ग्रुप ने इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में अब तक का सबसे बड़ा अधिग्रहण आंकड़ा पार कर लिया है। ग्रुप ने अलग-अलग सेक्टरों में मिलाकर 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की खरीदारी की है। विश्लेषकों के अनुमान के मुताबिक इसमें करीब 20 एसेट्स की खरीद शामिल है। इनमें पावर, पोर्ट, एयरपोर्ट, ट्रांसमिशन और रिन्यूएबल एनर्जी के साथ-साथ सीमेंट, डिफेंस और मीडिया सेक्टर भी शामिल हैं। इन सभी अधिग्रहणों की कुल कीमत 1,03,006 करोड़ रुपये आंकी गई है।
अदानी की रणनीति यह रही है कि ईंधन खरीद, बिजली बिक्री, लॉजिस्टिक्स, ट्रांसमिशन और प्रोजेक्ट पूरा करने की अपनी मौजूदा क्षमता के साथ घाटे में चल रही कंपनियों को जोड़ा जाए। इससे थर्मल पावर सेक्टर में सबसे अच्छे नतीजे मिले हैं। इस सेक्टर में खरीदे गए कई प्रोजेक्ट कम इस्तेमाल या घाटे की हालत से उबरकर अच्छा EBITDA दे रहे हैं। प्रभुदास लीलाधर के मुताबिक अदानी पावर के इनऑर्गेनिक पोर्टफोलियो में अब 7.45 गीगावॉट्स थर्मल क्षमता शामिल है, जिसमें उडुपी पावर, रायगढ़, रायपुर, महान, कोस्टल एनर्जेन, लैंको अमरकंटक, डहाणू और विदर्भ इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियां हैं। रायपुर का EBITDA वित्त वर्ष 2020 में 210 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर 2,350 करोड़ रुपये हो गया। इसी दौरान रायगढ़ का EBITDA माइनस 100 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,110 करोड़ रुपये हो गया। महान का EBITDA वित्त वर्ष 2022 के 550 करोड़ रुपये से वित्त वर्ष 2026 में करीब तीन गुना बढ़कर 1,600 करोड़ रुपये पहुंच गया।
बंदरगाहों के मामले में भी अदानी का यही रुख रहा। ग्रुप ने दिघी पोर्ट 705 करोड़ रुपये में, कृष्णपट्टणम पोर्ट 13,675 करोड़ रुपये में, कराईकल पोर्ट 1,485 करोड़ रुपये में और गोपालपुर पोर्ट 3,080 करोड़ रुपये में खरीदा। अदानी पोर्ट्स का लक्ष्य 2030 तक एक अरब टन माल हैंडल करना है। कंपनी को उम्मीद है कि तब तक देश के अंदर के पोर्ट्स पर माल की हैंडलिंग 850 मिलियन टन तक पहुंच जाएगी, वहीं इंटरनेशनल पोर्ट्स पर हैंडलिंग को शुरुआती कम लेवल से तीन गुना करने का टारगेट है।
बिजली ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर में पकड़ मजबूत करने के लिए भी ग्रुप ने घाटे वाली कंपनियों का इस्तेमाल किया। अदानी एनर्जी सॉल्यूशंस ने 2016 में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर से पश्चिम क्षेत्र प्रणाली मजबूती योजना की ट्रांसमिशन एसेट्स 1,000 करोड़ रुपये में खरीदीं। इसी तरह 2017 में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर का मुंबई इंटीग्रेटेड पावर बिजनेस 18,800 करोड़ रुपये में खरीदा गया।
अदानी ने 2021 में जीवीके ग्रुप से मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट खरीदा था, जिससे अदानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स के तहत आठ एयरपोर्ट्स का पोर्टफोलियो बना। यह प्लेटफॉर्म अभी भारत की करीब 23 प्रतिशत पैसेंजर ट्रैफिक और 29 प्रतिशत एयर कार्गो हैंडल करता है। नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने सालाना 20 मिलियन पैसेंजर की शुरुआती क्षमता बढ़ाई, वहीं पूरे एयरपोर्ट नेटवर्क ने वित्त वर्ष 2026 में करीब 96 मिलियन पैसेंजर हैंडल किए।
अदानी ग्रीन एनर्जी ने भी अपना विस्तार करने के लिए अधिग्रहणों का सहारा लिया। ग्रुप ने एस्सेल ग्रीन एनर्जी का सोलर पोर्टफोलियो 1,300 करोड़ रुपये में और 40-मेगावॉट का एस्सेल ग्रीन सोलर प्रोजेक्ट 219 करोड़ रुपये में खरीदा। तब से रिन्यूएबल प्लेटफॉर्म इन एसेट्स से आगे बढ़कर फैल चुका है। मैनेजमेंट को भरोसा है कि वित्त वर्ष 2027 तक 5 गीगावॉट क्षमता जोड़ी जाएगी और 2030 तक 50 गीगावॉट का टारगेट पूरा होगा।
अदानी एंटरप्राइजेज अब एक बड़े इन्वेस्टमेंट साइकल की शुरुआत कर रहा है। जेफरीज के अनुमान के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 से 31 के बीच एयरपोर्ट्स, डेटा सेंटर्स, नई एनर्जी, रोड्स, डिफेंस, कॉपर और दूसरे बिजनेस में निवेश करीब 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। सालाना कैपिटल एक्सपेंडिचर 2022 के करीब 8,500-9,000 करोड़ रुपये से बढ़कर हाल के सालों में 30,000-35,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।