आशा वर्करों का नागपुर में 'दे धड़क' मोर्चा, दिवाली बाद बैठक का भरोसा
आयटक की अगुवाई में आशा वर्कर और समूह प्रवर्तक नागपुर में मुख्यमंत्री फडणवीस के जनसंपर्क कार्यालय पहुंचे।
दिवाली बोनस, काटा गया मानदेय बहाल करने और समूह प्रवर्तकों को सरकारी सेवा में लेने जैसी कई मांगों को लेकर आशा वर्कर और समूह प्रवर्तक कर्मचारी नागपुर की सड़कों पर उतरे। गुरुवार को एटक की अगुवाई में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के जनसंपर्क कार्यालय पर पूरे विदर्भ से जुटे कर्मचारियों ने 'दे धड़क' मोर्चा निकाला। मोर्चे के बाद मुख्यमंत्री ने दिवाली के बाद उच्चस्तरीय बैठक करने का आश्वासन दिया।
आंदोलन करने वालों की पहली मांग यह थी कि आशा वर्कर और समूह प्रवर्तक कर्मचारियों को फौरन दिवाली बोनस दिया जाए। साथ ही सरकार ने पांच हजार रुपये की जो भाईदूज भेंट घोषित की है, वह बिना देरी के मिले। त्योहार के मौसम में भी पैसों के मामले अटके हुए हैं, इसलिए कर्मचारियों ने सरकार का ध्यान खींचने के लिए मुख्यमंत्री के जनसंपर्क कार्यालय के सामने धरना दिया। इस मौके पर मांगों का निवेदन भी सौंपा गया।
संगठन की मांग है कि केंद्र सरकार ने पीआईपी के तहत मानदेय में जो कटौती की है, उसे वापस लेकर पहले की तरह मानदेय शुरू किया जाए। सभी कर्मचारियों को कम से कम 26 हजार रुपये मासिक वेतन देकर कर्मचारी का दर्जा दिया जाए और समूह प्रवर्तकों को सरकारी सेवा में शामिल किया जाए, यह आग्रह भी रखा गया।
इसके अलावा रिटायरमेंट की उम्र 60 से बढ़ाकर 65 साल करने, वेतन सहित छुट्टी मंजूर करने, ऑनलाइन कामों की सख्ती बंद करने और बिना मेहनताने के कराए जा रहे काम रोकने की मांग भी उठी। केंद्र और राज्य का मेहनताना हर महीने नियमित देने की मांग भी की गई।
आंदोलन के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सरकारी निवास 'रामगिरी' पर प्रतिनिधिमंडल से बात की। उन्होंने कहा कि आशा वर्कर और समूह प्रवर्तकों के सवाल सुलझाने के लिए दिवाली के बाद जल्द ही उच्चस्तरीय बैठक होगी। उन्होंने राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को भी निर्देश दिए कि स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और एटक के पदाधिकारियों की बैठक रखी जाए।
इस दौरान गडचिरोली के सह संरक्षक मंत्री आशीष जायसवाल मौजूद थे। मोर्चे की अगुवाई एटक के प्रदेश महासचिव श्याम काले, उपाध्यक्ष विनोद झोडगे-पाटील, शिवकुमार गणवीर, मंगला पांडे, शालू कुथे, नयन गायकवाड और रामचंद्र पाटील ने की। संगठन ने चेतावनी दी कि अगर दिवाली के बाद की बैठक में मांगें नहीं मानी गईं तो शीतकालीन अधिवेशन के दौरान पूरे राज्य में 'महापड़ाव मोर्चा' निकाला जाएगा।
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