आरएएफ फेयरफोर्ड के पास 5 संदिग्धों की गिरफ्तारी पर पुलिस और ट्रम्प के दावों में टकराव
ब्रिटेन के आरएएफ फेअरफोर्ड एयरबेस के पास पांच संदिग्धों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के बयानों में विरोधाभास सामने आया है, जिससे ईरान से जुड़ी साजिश की अटकलें तेज हो गई हैं।
ब्रिटेन में एक हवाई ठिकाने के पास पांच संदिग्ध लोगों की गिरफ्तारी ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। यह गिरफ्तारी 'आरएएफ फेअरफोर्ड' नाम के उस एयरबेस के पास हुई, जो ब्रिटिश और अमेरिकी सेना दोनों इस्तेमाल करती हैं। गिरफ्तारी के बाद ब्रिटिश प्रशासन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तरफ से आए बयानों में साफ विरोधाभास दिखा, जिसने यह कार्रवाई असल में क्या थी, इस पर कई सवाल और शक पैदा कर दिए हैं।
सोमवार को सामने आई इस खबर के मुताबिक, ब्रिटिश पुलिस ने आरएएफ फेअरफोर्ड एयरबेस के ठीक पास से पांच लोगों को हिरासत में लिया। यही वह एयरबेस है जिसका इस्तेमाल हाल के दिनों में अमेरिका ने ईरान के अलग-अलग ठिकानों पर हवाई हमले करने और अपने मिशन तैयार करने के लिए किया था। जैसे ही संदिग्ध गाड़ियां एयरबेस की तरफ बढ़ती दिखाई दीं, सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत उन्हें घेर लिया और पांच संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया। इस इलाके में विस्फोटक होने के शक के चलते एहतियात के तौर पर करीब 85 परिवारों को वहां से हटाया गया।
इस पूरी कार्रवाई से जुड़े दावों में सबसे पहली गड़बड़ गिरफ्तारी के फौरन बाद ही सामने आ गई। ब्रिटिश पुलिस ने कहा है कि वह इस मामले में 'ईरान कनेक्शन' यानी ईरान के किसी एजेंट का हाथ है या नहीं, इसकी गहराई से जांच कर रही है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि पुलिस ने अभी तक गिरफ्तार किए गए इन पांच लोगों के नाम, उनकी नागरिकता या उनके पास से मिले किसी हथियार के बारे में कोई ठोस जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। अधिकारियों का कहना है कि क्या यह एयरबेस उड़ाने की साजिश थी, इस पर जांच अभी जारी है।
इस मामले में दूसरी बहुत अहम बात यह है कि ब्रिटिश पुलिस और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बयानों में खुला टकराव नजर आया। ब्रिटिश पुलिस के हवाले से बताया गया कि एक लोकल शख्स ने संदिग्ध गाड़ियों के बारे में फोन करके जानकारी दी, जिसके बाद यह कार्रवाई हुई। यानी इसमें किसी बड़ी अंतरराष्ट्रीय खुफिया एजेंसी की पहले से तय कोई भूमिका नहीं थी। दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पत्रकारों से बात करते हुए इसे खुफिया एजेंसियों की बड़ी कामयाबी बताया। ट्रम्प के दावे के मुताबिक, ये संदिग्ध लंबे समय से खुफिया एजेंसियों की निगरानी में थे और सही वक्त पर कार्रवाई करके एक बड़ी साजिश को नाकाम किया गया। इन दो बड़े बयानों में जो फर्क है, उसकी वजह से ब्रिटिश एजेंसियों के दावों पर शक के बादल छा गए हैं।
इस पूरी घटना के पीछे ईरान युद्ध में ब्रिटेन की बदलती भूमिका को जिम्मेदार माना जा रहा है। पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने अमेरिका को ईरान के खिलाफ संघर्ष में पूरा साथ देने से इनकार कर दिया था, जिसकी वजह से वाशिंगटन और लंदन के बीच तनाव पैदा हो गया था। लेकिन सत्ता परिवर्तन और राजनीतिक घटनाओं के बाद ब्रिटेन का नया नेतृत्व ईरान और मध्य पूर्व के संघर्ष को लेकर ज्यादा आक्रामक रुख अपनाता दिख रहा है। सऊदी अरब की मदद करना हो या रक्षा करार, ब्रिटेन अब आक्रामक भूमिका की तरफ बढ़ता नजर आ रहा है।
इतिहास पर नजर डालें तो ब्रिटेन पर पहले भी युद्धों में उतरने के लिए झूठी या आधी-सच्ची जानकारी के इस्तेमाल के आरोप लगते रहे हैं। 2002-03 के इराक युद्ध के दौरान या लीबिया के संघर्ष के दौरान भी इसी तरह की राजनीतिक और खुफिया जानकारी के जरिए जनता की सोच को मोड़ने की कोशिश हुई थी। फिलहाल ईरान ने ब्रिटेन के किसी सीधे सैन्य ठिकाने पर हमला नहीं किया है। ऐसे में पांच संदिग्धों की गिरफ्तारी का यह मामला क्या ब्रिटेन को ईरान युद्ध में सीधे उतारने के लिए तैयार की जा रही जमीन है, इस बारे में दुनियाभर के विश्लेषक शक जाहिर कर रहे हैं।