३ अक्टूबर को राष्ट्रीय साखर विरोधी दिन: ज्यादा चीनी से सेहत को खतरा, नैसर्गिक विकल्प अपनाने की बात
राष्ट्रीय साखर विरोधी दिन (National No Sugar Day) हर साल ३ अक्टूबर को मनाया जाता है, ताकि लोग ज्यादा चीनी के नुकसान को समझें और सेहतमंद जीवनशैली की तरफ बढ़ें।
हर साल ३ अक्टूबर को 'राष्ट्रीय साखर विरोधी दिन' (National No Sugar Day) मनाया जाता है। इसका मकसद लोगों को यह बताना है कि ज्यादा चीनी खाने से शरीर पर बुरा असर पड़ता है, और उन्हें सेहतमंद जीवनशैली की तरफ मोड़ना है। यह दिन हर किसी को मौका देता है कि वह अपनी थाली में चीनी की मात्रा देखे और आगे आने वाले सेहत के खतरों से बचने की सोचे।
आज की तेज और आधुनिक जीवनशैली में खाने-पीने की आदतें पूरी तरह बदल गई हैं। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक हम बिना जाने ऐसी कई चीजें खा-पी लेते हैं, जिनमें चीनी जरूरत से कहीं ज्यादा होती है। चीनी की यही बढ़ती आदत आज गंभीर बीमारियों की बड़ी वजह बन रही है।
पिछले कुछ दशकों में पैकेट वाले खाने की चीजें, सॉफ्ट ड्रिंक्स, एनर्जी ड्रिंक्स, बेकरी का सामान और तरह-तरह की मिठाइयां बाजार में भी और रोज के खाने में भी बहुत बढ़ गई हैं। प्रोसेस करके बनाई गई (Refined) चीनी में कोई विटामिन, खनिज या फायबर नहीं होता। वह शरीर को सिर्फ खाली कैलरीज (Empty Calories) देती है।
लेख के मुताबिक इससे शरीर में इन्सुलिन अचानक बढ़ जाता है और चयापचय (Metabolism) बिगड़ता है। इसी वजह से मोटापा, टाइप-२ डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी और फैटी लिवर जैसी बीमारियां बहुत कम उम्र में ही दिखने लगी हैं। छोटे बच्चों में दांत सड़ने और चिड़चिड़ेपन की मुख्य वजह भी ज्यादा चीनी को ही माना जाता है।
राष्ट्रीय साखर विरोधी दिन पर स्कूल, कॉलेज, मेडिकल संस्थान, अस्पताल और फिटनेस क्लबों के जरिए देशभर में जागरूकता के कई अभियान चलाए जाते हैं। इस दिन विशेषज्ञ डॉक्टर और पोषण विशेषज्ञ (Dietitians) लोगों से बात करते हैं और खाने से रिफाइंड चीनी धीरे-धीरे कम करने की सलाह देते हैं।
चीनी को एकदम छोड़ देना शुरू में मुश्किल लग सकता है, लेकिन उसके नैसर्गिक और सेहतमंद विकल्प आसानी से मिल जाते हैं। सफेद चीनी की जगह खाने में शुद्ध गुड़, शहद, खजूर, नारियल का गुड़ या मौसम के ताजे फल शामिल किए जा सकते हैं। बताया गया है कि ये विकल्प सिर्फ मिठास ही नहीं देते, बल्कि जरूरी खनिज, एंटीऑक्सिडेंट्स और फायबर भी देते हैं, जिससे खून में शुगर का स्तर काबू में रखने में मदद मिलती है।
इस दिन को सिर्फ एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि ऐसी सोच बताया गया है जो जिंदगी में हमेशा के लिए अच्छा बदलाव ला सकती है। संतुलित और लंबी उम्र वाली जिंदगी के लिए बेवजह शरीर में जा रही चीनी पर रोक लगाना बहुत जरूरी बताया गया है।
जब खाने से प्रोसेस की हुई चीनी कम की जाती है, तो कुछ ही दिनों में शरीर की ऊर्जा बढ़ती है, त्वचा पर अच्छी चमक आती है, वजन काबू में रहता है और मन ज्यादा एकाग्र होता है। यह दिन सिखाता है कि सेहतमंद समाज और मजबूत पीढ़ी बनाने के लिए खाने-पीने की आदतों में अनुशासन लाना हम सबकी जिम्मेदारी है। इसलिए इस दिन पर रोज के खाने में चीनी कम करने और नैसर्गिक व पौष्टिक चीजें अपनाने का पक्का संकल्प लेने की बात कही गई है।