25 अक्टूबर को मनता है विश्व ऑपेरा दिवस, इटली से दुनिया तक पहुंची यह कला
हर साल 25 अक्टूबर को दुनिया भर में विश्व ऑपेरा दिन मनाया जाता है। इटली के फ्लोरेंस से निकली इस कला का सफर आज दुनिया के बड़े शहरों के ऑपेरा हाउसों तक पहुंच चुका है।
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हर साल 25 अक्टूबर को पूरी दुनिया में 'वर्ल्ड ऑपेरा डे' यानी विश्व ऑपेरा दिवस बड़े उत्साह से मनाया जाता है। यह दिन सिर्फ एक संगीत विधा का जश्न नहीं है। ऑपेरा एक पुरानी और शास्त्रीय कला है, जो सदियों से इंसानी संस्कृति, भावनाओं और नाटक की दुनिया को समृद्ध करती आई है। यह दिन उसी कला को बचाए रखने और आगे बढ़ाने के लिए समर्पित है। संगीत, संवाद, अभिनय, नृत्य और भव्य मंच सजावट, इन सबका अनोखा मेल ही ऑपेरा है। दुनिया भर में इस कला की अहमियत को सामने रखना और नई पीढ़ी को इससे जोड़ना, इस दिन का मुख्य मकसद है।
इस दिन को मनाने की औपचारिक शुरुआत साल 2019 में हुई। OPERA America, Opera Europa और Opera Latinoamérica, इन तीन जाने-माने अंतरराष्ट्रीय ऑपेरा संगठनों ने मिलकर 25 अक्टूबर को 'वर्ल्ड ऑपेरा डे' घोषित किया।
25 अक्टूबर की तारीख चुनने के पीछे एक ऐतिहासिक वजह भी है। इसी दिन मशहूर ऑपेरा संगीतकार जॉर्ज बिजे (Georges Bizet) और जोहान स्ट्रॉस द्वितीय (Johann Strauss II) की जयंती पड़ती है। इन दोनों दिग्गजों ने ऑपेरा को दुनिया भर में पहुंचाने में बहुत बड़ा योगदान दिया था। उनके इसी योगदान को सम्मान देने के लिए यह तारीख तय की गई।
बहुत से लोग पूछते हैं कि ऑपेरा आखिर है क्या। आसान शब्दों में कहें तो यह पश्चिमी नाट्यकला की एक विधा है, जिसमें पूरी कहानी संगीत और गानों के जरिए पेश की जाती है। इसमें कलाकारों का लाइव गायन होता है, ऑर्केस्ट्रा बजता है, नाटकीय अभिनय होता है और कहानी के हिसाब से नृत्य भी शामिल रहता है।
ऑपेरा की शुरुआत 16वीं सदी के आखिर में इटली के फ्लोरेंस शहर में हुई। जैकोपो पेरी ने 1597 में 'डाफ्ने' (Dafne) नाम का पहला ऑपेरा रचा। इसके बाद 17वीं और 18वीं सदी में, यानी बारोक दौर में, पूरे यूरोप में ऑपेरा की लोकप्रियता बहुत बढ़ गई। वक्त के साथ इसकी दो मुख्य किस्में मशहूर हुईं। एक है ऑपेरा सिरिया (Opera Seria), जो गंभीर और नाटकीय विषयों पर आधारित होता है। दूसरी है ऑपेरा बुफा (Opera Buffa), जो मजेदार और हल्के-फुल्के विषयों पर बनता है। आज वियना, पेरिस, लंदन, मिलान और न्यू यॉर्क जैसे बड़े शहरों के ऑपेरा हाउसों में यह कला जिंदा रखी जा रही है।
विश्व ऑपेरा दिवस पर दुनिया के अलग-अलग देशों में संगीत कार्यक्रम, लाइव प्रस्तुतियां, प्रदर्शनियां, वर्कशॉप और मुफ्त ऑनलाइन वेबिनार होते हैं। इनके जरिए नौजवान कलाकार अपनी कला दुनिया के सामने रखते हैं। ऑपेरा सिर्फ गिने-चुने शास्त्रीय दर्शकों के लिए न रहे और समाज के हर तबके तक पहुंचे, इसके लिए स्कूल और कॉलेजों में भी कई कार्यक्रम चलाए जाते हैं। मानवाधिकार और संस्कृति के जानकारों की राय है कि प्यार, गुस्सा, दुख, खुशी और त्याग जैसी गहरी भावनाओं को ऑपेरा जितने असरदार ढंग से जाहिर करता है, उतनी ताकत से कोई और माध्यम नहीं कर पाता।
डिजिटल दौर में, जब मनोरंजन के नए साधन हाथ में हैं, शास्त्रीय कला को बचाए रखना बड़ी चुनौती है। फिर भी ऑपेरा ने तकनीक को अपनाया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म और लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए उसने नए दर्शक जोड़ने शुरू कर दिए हैं। मन की शांति, संस्कृति की पहचान और इंसानी संवेदनाओं को जगाए रखने में ऑपेरा की जगह आज भी बेमिसाल है।
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