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10:17 IST

155 साल के मानसून रिकॉर्ड में 111 साल पानी सामान्य रहा, 27 साल सूखे गए

आईआईटीएम और आईएमडी के लंबे आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि 1871 से 2026 के बीच ज्यादातर वर्षों में बारिश सामान्य रही। इस बार एल-निनो के तेज होने से सूखे की आशंका जताई गई है।

155 साल के मानसून रिकॉर्ड में 111 साल पानी सामान्य रहा, 27 साल सूखे गए तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

देश के मानसून के करीब डेढ़ सौ साल के इतिहास को देखें तो ज्यादातर वर्षों में बारिश सामान्य रही है। आईआईटीएम और आईएमडी के लंबे समय के आंकड़ों से यह बात सामने आई है। सिर्फ कम बारिश वाले साल गिने-चुने नहीं रहे, बल्कि बहुत से साल सामान्य मानसून के रहे।

1871 से 2026 तक की बारिश के विश्लेषण के मुताबिक 111 साल सामान्य बारिश वाले रहे। 27 साल सूखे रहे और 18 साल ऐसे रहे जब औसत से ज्यादा पानी गिरा। हालांकि भारतीय मौसम विभाग के रिटायर्ड मौसम वैज्ञानिक दिनेश मिश्रा का कहना है कि इस साल एल-निनो दिसंबर तक तेज होने की संभावना है, इसलिए सूखे का संकट खड़ा हो सकता है।

लंबे समय के बारिश के ग्राफ से मानसून का रुझान समझना हो तो सिर्फ औसत देखना काफी नहीं है। ग्राफ के वर्गीकरण में औसत से 10 फीसदी से ज्यादा कमी वाले साल सूखे माने गए हैं। जिन सालों में औसत से 10 फीसदी से ज्यादा बारिश हुई, उन्हें गीले सालों की श्रेणी में रखा गया है। बाकी सभी साल सामान्य गिने गए हैं।

सामान्य बारिश का मतलब यह नहीं कि साल सूखे से मुक्त रहा। एल-निनो को मानसून की कमजोरी से जोड़ा जाता है, लेकिन हर एल-निनो वाले साल में सूखा पड़ता ही हो, ऐसा नहीं है। दूसरी तरफ सीजन की कुल बारिश सामान्य हो तब भी उसका असमान बंटवारा, बारिश के बीच लंबे खंड और कम समय में होने वाली अतिवृष्टि का असर खेती, पानी की सप्लाई और शहरों के इंतजाम पर पड़ सकता है। फिर भी 111 सामान्य सालों का आंकड़ा राहत देने वाला है।

दिनेश मिश्रा ने कहा, "यह आंकड़ा पूरे देश का है, पर महाराष्ट्र पर भी लागू होता है। पहले सूखे के पैमाने अलग थे। अब एल-निनो, ला-निना और आईओडी के अध्ययन से मौसम के बदलाव को ज्यादा व्यापक तरीके से समझा जा सकता है। एल-निनो हर तीसरे साल आता है और कभी-कभी चौथे साल। इसलिए तीन से चार साल में सूखा पड़ता है। इसी वजह से लंबे आंकड़ों में नॉर्मल मानसून के साल ज्यादा हैं।"

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