सातारा जिला बैंक चुनाव में रिकॉर्ड 97.92 फीसदी वोटिंग, महायुति के घटकों में ही सीधी टक्कर
छायाचित्रे सत्यापित केलेली नाहीत
सातारा जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के चुनाव में रिकॉर्ड वोटिंग हुई है। भाजपा, राष्ट्रवादी और शिवसेना के बीच दबदबे की लड़ाई है, नतीजे 3 नवंबर को आएंगे।
सातारा जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के पांच साल में होने वाले चुनाव में रिकॉर्ड 97.92 फीसदी वोटिंग हुई है। इससे जिले की राजनीति के सत्ता समीकरणों की असली परीक्षा शुरू हो गई है। नतीजे 3 नवंबर को आएंगे।
ऊपर से देखें तो भाजपा, राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार गुट) और शिवसेना महायुति के तौर पर मैदान में उतरी हैं। लेकिन असल में तीनों के बीच दबदबे की लड़ाई चल रही है। 12 सीटों पर ज्यादा से ज्यादा निदेशक जिताने के लिए भाजपा और राष्ट्रवादी ने पूरी ताकत झोंक दी है।
खंडाला तालुका सोसायटी निर्वाचन क्षेत्र की लड़ाई सिर्फ 50 वोटों की थी, और यही इस चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा में रही। यहां राष्ट्रवादी के अजय भोसले, भाजपा के अनिरुद्ध गाढवे और निर्दलीय एड. शामराव गाढवे के बीच तिकोना मुकाबला हुआ। हर वोट निर्णायक था, इसलिए दोनों पार्टियों ने वोट जोड़ने और मतदाताओं को एकजुट रखने के लिए खास रणनीति बनाई थी। राष्ट्रवादी ने अपने वोट सुरक्षित रखने के लिए मतदाताओं को सैर पर भेजा, जबकि भाजपा ने भी जीत के लिए जोरदार मोर्चाबंदी की।
वोटिंग के दिन राहत व पुनर्वास मंत्री मकरंद पाटील सुबह करीब ग्यारह बजे मतदान केंद्र पर पहुंचे और अपने मतदाताओं को वोट डलवाने लाए। इसके बाद ग्रामविकास मंत्री जयकुमार गोरे भी अपने मतदाताओं के साथ केंद्र परिसर में पहुंचे। भाजपा के मतदाताओं की गाड़ियों का काफिला आते ही भीड़ से 'चोर-चोर' की आवाजें उठीं और दोनों गुटों में कहासुनी शुरू हो गई। बात धक्का-मुक्की और मारपीट तक पहुंच गई। कुछ देर के लिए केंद्र के आसपास तनाव रहा। पुलिस ने तुरंत दखल दिया, जिससे बड़ी अनहोनी टल गई। पुलिस निरीक्षक महेंद्र जगताप के मार्गदर्शन में वहां कड़ा बंदोबस्त लगाया गया था।
सांसद उदयनराजे भोसले और सार्वजनिक निर्माण मंत्री शिवेंद्रसिंहराजे भोसले सीधे चुनावी मैदान में नहीं थे, फिर भी सातारा तालुका की राजनीतिक हलचल पर उनकी बारीक नजर रही। शिवेंद्रसिंहराजे ने साफ किया है कि महायुति के सीट बंटवारे में ज्यादा सीटें छोड़कर उन्होंने मुख्यमंत्री को दिया वचन निभाया। फिर भी मतदान केंद्र के आसपास दोनों राजाओं के समर्थकों की मौजूदगी और परदे के पीछे की हलचल को देखते हुए बैंक के सत्ता समीकरण में उनका रिमोट कंट्रोल अहम रहने वाला है।
फलटण में पारंपरिक राजनीतिक विरोधी रामराजे नाईक निंबालकर और सांसद रणजितसिंह नाईक निंबालकर वोटिंग के मौके पर आमने-सामने आ गए। राजनीतिक टकराव के लिए जाने जाने वाले इन दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराया और नमस्कार का आदान-प्रदान किया। फलटण की राजनीति में यह दुर्लभ पल चर्चा का विषय बना। कुछ दिन पहले कराड में रामराजे और जयकुमार गोरे एक ही मंच पर पास-पास बैठकर खुलकर बातें करते दिखे थे। इन घटनाओं से विरोधियों के बीच नए समीकरणों की चर्चा चल पड़ी है। अगर रामराजे विरोधियों से तालमेल बिठाने का रुख अपनाते हैं तो जिले की राजनीति पर क्या असर होगा, इसे लेकर भी अटकलें लग रही हैं।
माण तालुका में महायुति के तौर पर चुनाव लड़ने का दावा किया जा रहा है, लेकिन वहां ग्रामविकास मंत्री जयकुमार गोरे बनाम शेखर गोरे और मनोज पोळ की प्रतिष्ठा की लड़ाई चल रही है। इससे यहां भाजपा बनाम राष्ट्रवादी की टक्कर और तीखी हो गई है। पाटण में प्रभारी मंत्री शंभूराज देसाई और सत्यजितसिंह पाटणकर के बीच पारंपरिक राजनीतिक संघर्ष ने चुनाव में रंग भरा है। महाबळेश्वर में चर्चा है कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की ताकत संजय मोरे के पीछे है, और उनके सामने सोनाली राजपुरे की चुनौती है। अनुसूचित जनजाति और भटके वर्ग की सीटों पर भी कड़ा मुकाबला है।
रिकॉर्ड वोटिंग से सभी पार्टियों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। भाजपा ने जिले में व्यापक मोर्चाबंदी की है, पर राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार गुट) और शिवसेना ने भी अपनी ताकत दिखाई है। सबकी नजर इस पर है कि बैंक में शिवसेना की एंट्री कितनी असरदार रहती है, भाजपा की संख्या बढ़ती है या राष्ट्रवादी अपना दबदबा बनाए रखती है।
माण में सबसे बड़ा सवाल यह रहेगा कि जयकुमार गोरे बैंक में पहुंचते हैं या शेखर गोरे उन्हें कड़ी चुनौती देते हैं। इसलिए 3 नवंबर की मतगणना सिर्फ उम्मीदवारों की हार-जीत की नहीं, बल्कि महायुति के भीतर की ताकत की परीक्षा और सातारा जिले की आगे की राजनीतिक दिशा तय करने वाली होगी।
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