मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
AQI 303 | Very Poor 18:39 IST

सिंहगढ़ के पुणे दरवाजे से गुजरी विदेशी साइकिलों की रेस, ASI ने कहा कोई इजाजत नहीं दी

सिंहगढ़ किले के ऐतिहासिक पुणे दरवाजे पर डाउनहिल माउंटेन बाइकिंग के दौरान साइकिलें दौड़ाने का आरोप है। ASI ने साफ कहा है कि उसने कभी इजाजत नहीं दी और आयोजकों को नोटिस भेजा जाएगा।

सिंहगढ़ के पुणे दरवाजे से गुजरी विदेशी साइकिलों की रेस, ASI ने कहा कोई इजाजत नहीं दी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

सिंहगढ़ किले का पुणे दरवाजा मराठा वीरता की निशानी माना जाता है और छत्रपति शिवाजी महाराज के चाहने वालों के लिए बहुत मायने रखता है। आरोप है कि इसी दरवाजे के ऊपर से वीकेंड पर हुई डाउनहिल माउंटेन बाइकिंग रेस के दौरान साइकिलें दौड़ाई गईं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI का कहना है कि उसने अपने इलाके में ऐसी किसी गतिविधि की इजाजत कभी दी ही नहीं थी।

इस घटना के बाद सवाल उठ रहे हैं कि भीड़ वाली हेरिटेज जगह पर इतना जोखिम भरा खेल आयोजन कैसे होने दिया गया। यह भी पूछा जा रहा है कि क्या वन विभाग की लगाई शर्तों को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया।

ZLS डाउनहिल माउंटेन बाइकिंग पुणे फाइनल रेस का आयोजन Zoravan ने किया था। इसमें नौ देशों के करीब 28 साइकिलिस्ट शामिल हुए। पुणे फॉरेस्ट डिवीजन ने 22 से 25 अक्टूबर के बीच वन क्षेत्र के अंदर रेस के लिए शर्तों के साथ इजाजत दी थी। अधिकारियों के मुताबिक इस मंजूरी का मतलब यह नहीं था कि खिलाड़ी किले के उन हिस्सों से भी गुजरें जो ASI के अधिकार में आते हैं और जहां रोक है। ASI ने पुष्टि की कि उसने रेस की इजाजत नहीं दी थी। अधिकारियों ने इशारा किया कि बिना इजाजत गतिविधि कराने वालों पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

पुणे फॉरेस्ट डिवीजन के डिप्टी कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स ने 21 अक्टूबर 2026 की तारीख वाली चिट्ठी में रेस डायरेक्टर गौतम तावडे को 12 शर्तों पर इवेंट कराने की इजाजत दी थी। आयोजकों और खिलाड़ियों की निजी जिम्मेदारी भी इसमें जोड़ी गई थी। शर्तें साफ थीं। वन क्षेत्र में सिर्फ सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक जाया जा सकता था, रात में रुकना मना था, और सिंहगढ़ पर पर्यटकों की भारी भीड़ को देखते हुए शनिवार और रविवार को रास्ता बंद नहीं किया जा सकता था। आयोजकों को यह भी पक्का करना था कि आने वालों को रुकावट न हो, वन कानूनों का उल्लंघन न हो और वन्यजीव, पेड़ पौधे और सरकारी संपत्ति को नुकसान न पहुंचे। वन रेंज अधिकारी को यह हक भी दिया गया था कि जंगल या वन्यजीवों की सुरक्षा का कोई मसला आए तो वह इवेंट रोक दे। चिट्ठी में गाड़ियों को रोक वाले इलाकों में जाने से रोकने की बात थी और किसी हादसे की जिम्मेदारी आवेदक पर डाली गई थी।

वन अधिकारियों का कहना है कि इजाजत साइकिलिंग और पुणे ग्रैंड टूर पहल को बढ़ावा देने के लिए दी गई थी। उनका आरोप है कि कुछ खिलाड़ी ऐतिहासिक दरवाजे समेत किले के परिसर में साइकिल चलाते दिखे, यानी इजाजत का गलत इस्तेमाल हुआ। अधिकारियों के मुताबिक मामला नजर में आते ही उन्होंने यह गतिविधि रुकवा दी। वन विभाग की इजाजत ASI के अलग अधिकार को खत्म नहीं करती, जो स्मारक के संरक्षित हिस्सों पर लागू है।

ASI के असिस्टेंट डायरेक्टर डॉ. विलास वाहणे ने कहा, "हमने वीडियो और जानकारी देखी है, साथ ही आयोजकों, वन विभाग और दूसरे अधिकारियों की विस्तृत रिपोर्ट भी देखी हैं। रेस की इजाजत किले की दहलीज तक के इलाके के लिए थी, जो वन विभाग के तहत आता है, खुद सिंहगढ़ किले के लिए नहीं। आयोजकों ने गैरकानूनी तरीके से काम किया और नियम तोड़े। उन्होंने हमारे विभाग से कभी इजाजत मांगी ही नहीं। हम जल्द ही आयोजकों, साइकिलिस्टों और इवेंट से जुड़े दूसरे लोगों को उनकी हरकतों के लिए नोटिस भेजेंगे।" दूसरी तरफ आयोजकों का कहना है कि उन्होंने जरूरी इजाजतें ली थीं और वे किसी उल्लंघन से इनकार करते हैं।

सिंहगढ़ के प्रवेश द्वार पर साइकिलों की यह कलाबाजी देखकर शिवाजी महाराज के अनुयायी और चाहने वाले नाराज हैं। उनके लिए यह किला सिर्फ घूमने की जगह नहीं, बल्कि महाराज और मराठा योद्धाओं के बलिदान, साहस और सैन्य इतिहास की निशानी है। उनकी चिंता है कि गहरे ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्व वाली जगह को जोखिम भरे स्टंट का बैकड्रॉप नहीं बनाना चाहिए, खासकर तब जब वीकेंड पर बड़ी संख्या में परिवार और सैलानी किले पर आते हैं। वन विभाग की अपनी इजाजत में ही कहा गया था कि वीकेंड की भीड़ में रास्ता बंद नहीं होगा। ऐसे में संकरे, ढलान वाले और भीड़ भरे किले के रास्ते पर हादसे का खतरा भी चिंता की वजह बन गया है।

अब असल सवाल यह है कि आयोजकों ने इवेंट को वन विभाग की इजाजत वाले इलाके तक रखा या खिलाड़ियों को ASI के हिस्सों में भी जाने दिया। वन क्षेत्र में रेस की इजाजत का मतलब संरक्षित स्मारक पर गतिविधि की इजाजत नहीं होता। यह सवाल भी है कि प्रस्तावित रास्ते पर जिन-जिन विभागों का अधिकार था, उन सबसे मंजूरी ली गई या नहीं।

सिंहगढ़ का पुराना नाम कोंढाणा है। महाराष्ट्र की ऐतिहासिक यादों में इसकी खास जगह है, खासकर 1670 की उस लड़ाई की वजह से जो तानाजी मालुसरे से जुड़ी है। इसकी किलेबंदी, दरवाजे और खड़ी चढ़ाई वाले रास्ते उसी विरासत का हिस्सा हैं। इसलिए बड़े सार्वजनिक आयोजन का प्रस्ताव आए तो सुरक्षा और संरक्षण बेहद जरूरी हो जाता है। इस मामले से साफ है कि अधिकारियों को तय रास्ते साफ बताने, विभागों के बीच मंजूरियों का तालमेल रखने और यह पक्का करने की जरूरत है कि एडवेंचर स्पोर्ट्स संरक्षित ढांचों या भीड़ वाले रास्तों तक न पहुंचें। शिवाजी महाराज के चाहने वालों और विरासत की फिक्र करने वाले नागरिकों को साइकिलिंग या खेल आयोजनों से दिक्कत नहीं है। सवाल यह है कि क्या ऐसे आयोजन किले के इतिहास का सम्मान करेंगे, आने वालों को सुरक्षित रखेंगे और इजाजत की हदों का सख्ती से पालन करेंगे।

#पुणे#PT24#Pune

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे