पुणे की रसायन कंपनी का लाइसेंस फिर बहाल, मुंढे की कार्रवाई पर रोक से विवाद
अन्न व औषध प्रशासन आयुक्त तुकाराम मुंढे की कार्रवाई पर मंत्री नरहरी झिरवळ ने रोक लगाकर रांजणगाव की एक रसायन कंपनी का लाइसेंस फिर बहाल कर दिया।
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अन्न और औषध प्रशासन के आयुक्त तुकाराम मुंढे के एक फैसले का विरोध अब सरकार के भीतर से ही शुरू होने का दावा सामने आया है। पुणे में जहरीली शराब की घटना के बाद मिथेनॉल की नियम तोड़कर बिक्री और स्टोरेज करने वाली कंपनियों के लाइसेंस रद्द किए गए थे। इनमें रांजणगाव की एक रसायन कंपनी पर भी सख्त कार्रवाई हुई थी।
इस कंपनी ने मंत्री नरहरी झिरवळ के पास अपील की थी। अब कार्रवाई पर रोक लगाकर कंपनी का लाइसेंस फिर से बहाल कर दिया गया है। दावा है कि पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के दबाव में यह हुआ, और इसी से विवाद भड़क गया है। चर्चा इस बात की है कि झिरवळ ने यह फैसला किसके दबाव में लिया।
पहले देखें कि मामला क्या था। पुणे में जहरीली शराब से 22 लोगों की जान गई थी। ड्यूटी में कोताही और लापरवाही के आरोप में राज्य उत्पादन शुल्क विभाग के 13 अधिकारियों और 9 पुलिस कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया था। मुख्य आरोपियों समेत दूसरे आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।
इसके बाद अन्न और औषध प्रशासन ने पुणे विभाग की 102 मिथेनॉल कंपनियों की जांच की। नियम तोड़ने वाली 15 कंपनियों के लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द कर दिए गए, जबकि 28 कंपनियों के लाइसेंस सस्पेंड किए गए। रांजणगाव औद्योगिक बस्ती की एक विवादित रसायन कंपनी भी इनमें शामिल थी।
नियम के मुताबिक दोषी पाई गई 22 कंपनियों ने आयुक्त मुंढे की इस कार्रवाई के खिलाफ अन्न और औषध प्रशासन विभाग के मंत्री नरहरी झिरवळ के यहां अपील दाखल की थी।
रांजणगाव की कंपनी की अपील पर झिरवळ ने फैसला सुनाया। उन्होंने मुंढे की कार्रवाई को रद्द कर दिया और कंपनी का लाइसेंस पहले की तरह बहाल कर दिया। दावा किया जा रहा है कि अजितदादा की राष्ट्रवादी कांग्रेस के एक नेता ने लाइसेंस लौटाने के लिए झिरवळ से सिफारिश की थी।
मंत्री झिरवळ ने 9 सितंबर को सुनवाई की, कंपनी पर हुई कार्रवाई को रोक दिया और लाइसेंस बहाल करने का फैसला लिया। आरोप लग रहे हैं कि मुंढे की कार्रवाई को सरकार के अंदर से ही इस तरह कमजोर किया जा रहा है। इस बीच झिरवळ ने सफाई दी है कि अपील करने वाले के सबूत और हकीकत सामने आने के बाद ही उन्होंने अपने विवेक से यह फैसला लिया।
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