पुणे में बिना लाइसेंस पटाखा स्टॉल बढ़े, बोर्ड की जांच सिर्फ अधिकृत कंपनियों तक
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दिवाली से पहले पुणे में असली और घटिया पटाखों की पहचान आम खरीदार के लिए लगभग नामुमकिन है। लाइसेंस वाले व्यापारी और नागरिक अवैध स्टॉल पर कार्रवाई की कमी की शिकायत कर रहे हैं।
पुणे में दिवाली के लिए पटाखे फूटने शुरू हो चुके हैं, लेकिन खरीदार के लिए यह पहचानना लगभग नामुमकिन है कि कौन सा पटाखा शोर और सुरक्षा के मानकों पर खरा है और कौन सा अवैध और खतरनाक हो सकता है। व्यापारियों और नागरिकों का कहना है कि बिना लाइसेंस वाले विक्रेताओं पर कार्रवाई कमज़ोर है और संभावित रूप से घटिया माल बेचने वाले स्टॉल की संख्या तेज़ी से बढ़ी है।
खाने-पीने की चीज़ों का मामला इससे अलग है। फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) मिलावटी और गंदे खाने पर सख्ती कर सकता है, जिसकी कमान तुकाराम मुंढे जैसे अधिकारियों के हाथ में रही है। बिना लाइसेंस वाले विक्रेताओं के घटिया पटाखों पर नज़र रखना इसके मुकाबले बहुत मुश्किल है। वजह यह है कि पटाखे एक अलग नियम-ढांचे के तहत आते हैं, जिसमें कई एजेंसियां शामिल हैं।
महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) हर साल अधिकृत निर्माताओं के पटाखों की जांच करता है कि वे शोर की तय सीमा और सुरक्षा की शर्तों पर खरे उतरते हैं या नहीं। अवैध और खतरनाक विस्फोटकों की बिक्री रोकना पुलिस, नगर निगम और दूसरी तय एजेंसियों का काम है। व्यापारियों और नागरिकों का कहना है कि बिना अनुमति वाले स्टॉल पर कार्रवाई काफी नहीं है। कुछ लोगों ने FDA को ऐसा मॉडल बताया, जिसकी तरह काम होना चाहिए।
नागरिक राकेश कदम ने कहा, "गैर-मानक पटाखों पर रोक लगनी चाहिए, क्योंकि वे सुरक्षित नहीं हैं और आम लोग उन्हें आसानी से पहचान नहीं सकते। अवैध पटाखों और बिना लाइसेंस के विक्रेताओं पर नज़र रखने वाले विभागों को FDA की तरह काम करना चाहिए।"
नुकसान में लाइसेंस वाले व्यापारी भी हैं। पुणे फायरक्रैकर ट्रेडर्स एसोसिएशन के सदस्य सीताराम खाडे ने कहा, "पुणे में पटाखे बेचने का लाइसेंस सिर्फ 50-60 व्यापारियों के पास है। हम सिर्फ अधिकृत माल बेचते हैं। मिसाल के तौर पर कोथरुड में सिर्फ दो अधिकृत लाइसेंस धारक हैं, लेकिन वहां 70 से 100 स्टॉल लग गए हैं। ये सारे बिना अनुमति वाले स्टॉल गैर-मानक पटाखे बेच रहे हैं।"
खाडे के मुताबिक पुणे महानगरपालिका और पुलिस को अवैध स्टॉल पर कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा, "हर साल गैर-मानक पटाखे बेचने वाले अवैध व्यापारियों की संख्या बढ़ती दिख रही है, क्योंकि उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती।"
MPCB का कहना है कि उसकी सालाना जांच में अधिकृत निर्माताओं के पटाखे शोर के तय मानकों पर खरे मिले हैं। बोर्ड के एक अधिकारी ने कहा, "बोर्ड ने अधिकृत कंपनियों के 16 तरह के पटाखों की जांच की और सभी डेसिबल की तय सीमा के भीतर मिले।" अधिकारी ने यह भी बताया, "हम जांच के लिए पटाखे बेतरतीब ढंग से चुनते हैं। Anil Fireworks Factory, Myna, Dinesh Fireworks और Devasenaathipathi Fireworks, इन चार कंपनियों के उत्पाद जांचे गए।" अधिकारी के मुताबिक सभी जांचे गए पटाखों का शोर तय सीमा में रहा और ध्वनि दबाव का स्तर उनके डिब्बों पर छपा था।
अधिकारी ने साफ किया कि जांच सिर्फ अधिकृत कंपनियों के बनाए पटाखों तक सीमित है। इससे बड़ी कमी रह जाती है, क्योंकि बिना अनुमति वाले विक्रेताओं का माल बोर्ड की नियमित सैंपलिंग और जांच में शायद कभी आता ही नहीं।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि घनी बस्तियों में, जहां एक साथ कई पटाखे फूटते हैं, शोर का असली असर कहीं ज़्यादा हो सकता है। एक कार्यकर्ता ने कहा, "तय सीमा में आने वाले पटाखे भी अलग-अलग फूटकर कुल मिलाकर काफी ध्वनि प्रदूषण पैदा कर सकते हैं।"
ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मानकों के तहत एक पटाखे के लिए चार मीटर की दूरी पर अधिकतम 125 dB(AI) Leq शोर की इजाज़त है। जुड़े हुए या लड़ी वाले पटाखों के लिए यह सीमा 110 dB(AI) Leq है।
पुणे सिटी पुलिस ने भी दिवाली के दौरान कुछ पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर पाबंदी लगाई है। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (प्रशासन) संजय पाटिल ने 23 अक्टूबर को आदेश जारी किया। इसमें पटाखों की पारंपरिक लड़ियों की बिक्री, उन्हें रखने और फोड़ने पर रोक है। धागे में लिपटे और "एटम बम" के नाम से बिकने वाले पटाखों पर भी यही रोक लागू है।
आदेश के मुताबिक रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच आवाज़ करने वाले पटाखे फोड़ना मना है। इस दौरान सिर्फ रोशनी वाले पटाखों की इजाज़त है। सार्वजनिक सड़कों पर और अस्पताल व स्कूल जैसे प्रतिबंधित इलाकों में पटाखे फोड़ने पर भी रोक है।
इन पाबंदियों और MPCB की सालाना जांच के बावजूद नागरिक पटाखा निर्माण और बिक्री के नियमों में ज़्यादा पारदर्शिता और सख्ती चाहते हैं। कोथरुड के निवासी राजेंद्र गोखले ने कहा, "बाज़ार में कई कंपनियों के पटाखे दिखते हैं। नकली और असली में फर्क करना एक चुनौती है। प्रशासन को अधिकृत पटाखों की सूची लगानी चाहिए।"
अधिकृत व्यापारी अवैध विक्रेताओं पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं और निवासी मंज़ूर शुदा उत्पादों की पहचान के साफ तरीके चाहते हैं। प्रशासन के सामने चुनौती जांच और कार्रवाई के बीच की इस खाई को पाटने की है। MPCB की सालाना जांच से अधिकृत निर्माताओं के उत्पादों पर कुछ भरोसा बनता है, लेकिन बिना अनुमति वाले स्टॉल की बढ़ती संख्या चिंता का विषय बनी हुई है।


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