पुणे की महात्मा फुले मंडई के पास नकली 500 के नोट पकड़े गए, चार आरोपी गिरफ्तार
विश्रामबाग पुलिस ने नकली नोट बनाने और चलाने वाले गिरोह के चार लोगों को पकड़ा। उनके पास से 5 लाख 64 हजार रुपये के 1 हजार 128 नकली नोट और प्रिंटर, मॉनिटर जैसा सामान जब्त हुआ।
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पुणे के बीचोबीच नकली पाँच सौ रुपये के नोट चलाने की कोशिश करने वाले और उन्हें बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। विश्रामबाग पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है। उनके पास से 5 लाख 64 हजार रुपये के 1 हजार 128 नकली नोट मिले हैं। साथ में प्रिंटर, मॉनिटर और दूसरा सामान भी जब्त किया गया है।
पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इस गिरोह ने और कितने नकली नोट बनाए और क्या उन्हें बाजार में चला भी दिया गया। यह भी जाँच चल रही है कि ये नोट आखिर कहाँ बनाए गए।
गिरफ्तार आरोपियों के नाम सलमान जैनद्दीन राजे (30 साल, आंबेगाव केडगाव, तहसील दौंड), शाफाज फिरोज अन्सारी (30 साल, नालासोपारा), विशाल विलास गलांडे (37 साल, सुरुपखन वाडी, तहसील माण, जिला सातारा) और अभिजित रावसाहेब कांबळे (30 साल, शिरोळ, जिला कोल्हापूर) हैं। इस मामले में विश्रामबाग पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया है।
यह कार्रवाई पुलिस उपायुक्त कृषिकेश रावळे के मार्गदर्शन में हुई। वरिष्ठ निरीक्षक नवनाथ जगताप, पुलिस हवालदार सचिन अहिवळे, शैलेश सुर्वे, सचिन कदम, कैलास डुकरे और उनकी टीम ने इसे अंजाम दिया।
शुरुआत एक सूचना से हुई। पुलिसकर्मी सचिन अहिवळे और शैलेश सुर्वे को खबर मिली कि महात्मा फुले मंडई इलाके में एक संदिग्ध आदमी नकली नोट लेकर आने वाला है। दोनों ने यह जानकारी वरिष्ठ निरीक्षक नवनाथ जगताप को दी। इसके बाद पुलिस ने 14 अक्टूबर को शुक्रवार पेठ में महात्मा फुले मंडई के पीछे, म्हसोबा मंदिर के सामने वाली अंदरूनी सड़क पर जाल बिछाया।
वहाँ पाँच सौ रुपये के नकली नोट लेकर पहुँचे सलमान राजे को पुलिस ने पकड़ लिया। उसके पास से पाँच सौ के 805 नकली नोट मिले, जिनकी कुल कीमत 4 लाख 2 हजार 500 रुपये है।
पूछताछ में पता चला कि उसके तीन साथी और हैं। इसके बाद पुलिस ने सातारा और कोल्हापुर में रहने वाले संदिग्धों को हिरासत में लिया। उनके पास से नकली नोट बनाने में इस्तेमाल होने वाला सामान जब्त किया गया, जिसमें प्रिंटर, मॉनिटर, की-बोर्ड, माउस, सीपीयू और दूसरी चीजें शामिल हैं। इस सामान की कीमत 21 हजार 100 रुपये है। इसी आगे की कार्रवाई में 323 और नकली नोट भी जब्त हुए।
अब पुलिस के सामने चुनौती यह है कि नकली नोट बनने से लेकर बाजार में बँटने तक की पूरी कड़ी का पता लगाया जाए।
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