पुणे के सारसबाग में 'Killotsav 2026' में 4,000 से ज़्यादा लोगों ने बनाए किलों के मॉडल, बुक ऑफ वर्ल्ड
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रविवार, 1 नवंबर को सारसबाग में हुए कार्यक्रम में स्टूडेंट्स, पैरेंट्स और शहर के लोगों ने प्राकृतिक मिट्टी से महाराष्ट्र के ऐतिहासिक किलों के छोटे मॉडल बनाए।
पुणे, 3 नवंबर 2026: पुणे के सारसबाग में रविवार, 1 नवंबर को 'Killotsav 2026 - My Heritage, My Pride' नाम का कार्यक्रम हुआ। इसमें 4,000 से ज़्यादा लोग शामिल हुए, जिनमें स्टूडेंट्स, पैरेंट्स और शहर के आम लोग थे। सबने प्राकृतिक मिट्टी से महाराष्ट्र के ऐतिहासिक किलों के छोटे मॉडल बनाए। इस पूरी गतिविधि को बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने मान्यता दी है।
यह आयोजन Artwala Foundation और Aarambh Foundation ने पुणे महानगरपालिका (PMC) के सहयोग से किया था। रिकॉर्ड इन्हीं तीनों के नाम पर दर्ज हुआ है, यानी Artwala Foundation, Aarambh Foundation और पुणे महानगरपालिका के नाम पर।
बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के इंडिया डिवीज़न के प्रतिनिधि मौके पर मौजूद थे। उन्होंने वहां चल रही पूरी गतिविधि को परखा और उसकी जांच की। इसके बाद निगम के अधिकारियों, आयोजकों और हिस्सा लेने वालों की मौजूदगी में रिकॉर्ड की मान्यता का ऐलान किया गया।
इस पहल का मकसद बच्चों और नौजवानों को हाथ से काम करते हुए महाराष्ट्र के किलों की विरासत से जोड़ना था। साथ ही छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़े इतिहास से भी उनकी पहचान कराना था। हर प्रतिभागी को प्राकृतिक मिट्टी दी गई और उनसे कहा गया कि वे अपनी कल्पना का इस्तेमाल करके किले का छोटा मॉडल तैयार करें।
कार्यक्रम में पुणे की मेयर मंजूषा दीपक नागपुरे और डिप्टी मेयर परशुराम वाडेकर मौजूद रहे। उनके साथ अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (उद्यान विभाग) अशोक घोरपडे भी कार्यक्रम में आए थे।
PMC ने अपने उद्यान विभाग के ज़रिए इस आयोजन में मदद की। इसके अलावा IT, सिक्योरिटी, इलेक्ट्रिकल, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, फायर ब्रिगेड, एजुकेशन और हेल्थ जैसे दूसरे विभागों ने भी सहयोग दिया। पूरा आयोजन महानगरपालिका आयुक्त नवल किशोर राम के मार्गदर्शन में हुआ।
दोनों फाउंडेशनों के प्रतिनिधि और PMC के अधिकारी, दोनों ही कार्यक्रम की योजना बनाने और उसे ज़मीन पर उतारने में शामिल रहे। मंच का संचालन रवींद्र जगदाले ने किया।
कुल मिलाकर, सारसबाग में हुए इस कार्यक्रम में स्टूडेंट्स, पैरेंट्स और शहर के लोगों ने मिलकर मिट्टी से महाराष्ट्र के ऐतिहासिक किलों के मॉडल बनाए, और बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने इसे मान्यता दी।
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