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पुणे के लाइसेंसी फेरीवालों पर 750 रुपये जुर्माना, बिल देर से मिले, NGO ने मांगी राहत

जानिव संस्था का कहना है कि पुणे महानगरपालिका के लाइसेंसी फेरीवालों को फीस के बिल समय पर नहीं मिले, फिर भी उनसे 750 रुपये की पेनल्टी वसूली जा रही है।

पुणे के लाइसेंसी फेरीवालों पर 750 रुपये जुर्माना, बिल देर से मिले, NGO ने मांगी राहत तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

पुणे के लाइसेंसी फेरीवालों से 750 रुपये की पेनल्टी वसूली जा रही है, जबकि उन्हें फीस भरने की आखिरी तारीख से पहले बिल मिले ही नहीं। यह दावा जानिव नाम की NGO ने किया है। संस्था ने मांग की है कि पुणे महानगरपालिका यह जुर्माना फौरन वापस ले।

NGO ने यह भी मांग रखी है कि फेरीवालों को बकाया फीस भरने के लिए छह महीने की मोहलत दी जाए और रकम किस्तों में जमा करने की इजाज़त मिले। इसके लिए संस्था ने महापौर और महानगरपालिका आयुक्त को ज्ञापन सौंपा है। आयुक्त टाउन वेंडिंग कमेटी के अध्यक्ष भी हैं।

ज्ञापन जानिव के महाराष्ट्र राज्य सचिव संजय शानके ने दिया है। शानके पुणे और पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिकाओं की टाउन वेंडिंग कमेटियों के सदस्य भी हैं। उन्होंने पीएमसी के अतिक्रमण विभाग पर आरोप लगाया है कि वह लाइसेंसी फेरीवालों तक फीस के बिल पहुंचाने में देरी कर रहा है।

ज्ञापन के मुताबिक फेरीवालों को अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर की फीस 20 अक्टूबर से पहले एडवांस में भरनी होती है। संस्था का कहना है कि इस तारीख के बाद भी बिल फेरीवालों के हाथ में नहीं पहुंचे।

संस्था के दावे के अनुसार 24 अक्टूबर तक वार्ड ऑफिसों के ज़रिए बिल बांटे ही नहीं गए थे। शानके ने सवाल उठाया है कि जब बिल समय पर मिले ही नहीं, तो फेरीवालों से तय मियाद में पैसे भरने की उम्मीद कैसे की जा सकती है।

शानके के मुताबिक जो फेरीवाले बाद में फीस भरने अधिकारियों के पास जाते हैं, उनसे असली रकम के ऊपर 750 रुपये की पेनल्टी ली जाती है।

संस्था की दलील है कि नगर प्रशासन की देरी की सज़ा फेरीवालों को नहीं मिलनी चाहिए। उसने मांग की है कि जुर्माना तुरंत रद्द किया जाए और पेनल्टी की रकम बिल बांटने में देरी के जिम्मेदार अधिकारियों से वसूली जाए।

जानिव ने लाइसेंसी फेरीवालों के लिए फीस भरने में छह महीने की मोहलत मांगी है। उसने पीएमसी से किस्तों में भुगतान की सुविधा देने की भी अपील की है। संस्था का कहना है कि इससे बिलिंग में देरी की मार झेल रहे फेरीवालों का बोझ हल्का होगा।

ज्ञापन में कहा गया है कि महापौर और महानगरपालिका आयुक्त दखल दें और यह पक्का करें कि प्रशासनिक देरी का आर्थिक नुकसान फेरीवालों को न उठाना पड़े। संस्था ने पेनल्टी माफी, मोहलत और किस्तों की सुविधा पर जल्द फैसला लेने की मांग की है।

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