पिंपरी-चिंचवड में सारथी हेल्पलाइन पर 4,713 शिकायतें अटकीं, लोग बोले- बिना काम के बंद कर दी जाती हैं
पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका की सारथी हेल्पलाइन पर 15 अक्टूबर 2026 तक 4,713 शिकायतें पेंडिंग थीं, इनमें 1,340 एक महीने से ज्यादा पुरानी हैं।
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पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका (PCMC) की सारथी हेल्पलाइन शहर के लोगों की नागरिक समस्याएं जल्दी और ठीक से सुलझाने के लिए शुरू की गई थी। लेकिन अब यही हेल्पलाइन प्रशासन की सुस्ती के बोझ तले दबी नजर आ रही है। महानगरपालिका की सारथी हेल्पलाइन, महाराष्ट्र सरकार के आपले सरकार पोर्टल और केंद्र सरकार के पब्लिक ग्रीवांस (PG) पोर्टल को मिलाकर 5,000 से ज्यादा शिकायतें पेंडिंग हैं। इनमें से 1,300 से ज्यादा शिकायतें एक महीने से भी अधिक समय से हल नहीं हुई हैं।
सारथी को 15 अगस्त 2013 को तत्कालीन महानगरपालिका आयुक्त डॉ. श्रीकर परदेशी की खास पहल के तौर पर शुरू किया गया था, ताकि लोगों की समस्याएं सुलझ सकें। मगर अब शिकायतें जमा होती जा रही हैं और नागरिक सवाल उठा रहे हैं कि हेल्पलाइन ठीक से चल भी रही है या नहीं।
PCMC के इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 15 अक्टूबर 2026 तक सारथी पर आई 4,713 शिकायतें पेंडिंग थीं। इनमें से 1,340 शिकायतें 30 दिन से ज्यादा पुरानी हैं। सबसे ज्यादा 738 शिकायतें वृक्ष संवर्धन विभाग के पास अटकी हैं। J वार्ड के सिविल इंजीनियरिंग विभाग में 227 और उसके हेल्थ विभाग में 173 शिकायतें पेंडिंग हैं।
तीन अतिरिक्त आयुक्तों में विक्रांत बागडे के पास सबसे कम, यानी सिर्फ सात शिकायतें पेंडिंग हैं। अतिरिक्त आयुक्त तृप्ति सांडभोर के पास 62 और कुलदीप जंगम के पास 55 शिकायतें पेंडिंग हैं।
इस ढेर के लिए प्रशासन की निष्क्रियता को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। लोगों का आरोप है कि कुछ शिकायतों को बिना असली समस्या सुलझाए ही निपटा हुआ दिखा दिया जाता है। इसी वजह से वैसी ही शिकायतें बार-बार लौट आती हैं। लोगों का कहना है कि सिर्फ शिकायत दर्ज करने और बंद करने पर नहीं, बल्कि समस्या सच में हल करने पर जोर होना चाहिए।
पिछले छह महीने के आंकड़े बताते हैं कि उद्यान विभाग से सबसे ज्यादा शिकायतें जुड़ी हैं। इनमें खतरनाक पेड़ों की छंटाई, सूखे पेड़ हटाना, सार्वजनिक बगीचों की हालत सुधारना और कचरे की समस्याएं शामिल हैं। लोगों का आरोप है कि विभाग के धीमे कामकाज और वरिष्ठ अधिकारियों के ध्यान न देने से ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई। नागरिकों की शिकायतें निपटाने में उद्यान विभाग सबसे धीमा निकला है।
महानगरपालिका के रवैये से लोगों में काफी नाराजगी है। कई लोगों का आरोप है कि कर्मचारी मौके पर जाते ही नहीं और समस्या सुलझाते भी नहीं। शिकायत को बस सिस्टम में या कागज पर 'क्लोज्ड' लिख दिया जाता है। जब लोगों को शिकायत बंद होने का मैसेज आता है और वे जाकर देखते हैं, तो अक्सर कुछ भी नहीं बदला होता। लोग इसे गुमराह करने वाला तरीका कहते हैं और उनके मुताबिक यह कर्मचारियों पर असरदार निगरानी न होने को दिखाता है।
बताया गया है कि हाल की एक बैठक में महानगरपालिका आयुक्त डॉ. विजय सूर्यवंशी ने पेंडिंग शिकायतों पर नाराजगी जताई और कुछ अधिकारियों को फटकार लगाई। फिर भी प्रशासन के रवैये में सुधार कम ही दिख रहा है।
स्मार्ट सिटी योजना के तहत स्मार्ट सारथी ऐप और वेबसाइट शुरू की गई थी, लेकिन लोगों का कहना है कि ये ठीक से नहीं चल रहीं। कुछ महीने पहले सारथी शिकायतों के लिए WhatsApp सुविधा भी शुरू हुई थी, जो टेंडर की अवधि खत्म होने से बंद हो गई। WhatsApp से शिकायत करने वालों को बताया जा रहा है कि मेंटेनेंस की वजह से सेवा उपलब्ध नहीं है और असुविधा के लिए खेद है।
PCMC के सहायक आयुक्त अमित पंडित ने कहा, "टेंडर की अवधि खत्म हो जाने से WhatsApp सुविधा बंद की गई है। लेकिन हेल्पलाइन चालू है। पेंडिंग शिकायतों की नियमित समीक्षा होती है और संबंधित विभागों को उन्हें सुलझाने के निर्देश दिए गए हैं। महानगरपालिका आयुक्त ने भी बैठकों में इस बारे में निर्देश दिए हैं।"
अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर शिकायतों की स्थिति यह है: सारथी हेल्पलाइन पर 7,600 शिकायतें आईं और 4,713 पेंडिंग हैं। आपले सरकार पर 752 आईं और 117 पेंडिंग हैं। PG पोर्टल पर 291 आईं और 50 पेंडिंग हैं।
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