गुरूवार, 29 अक्टूबर 2026

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महाराष्ट्र की सभी स्कूलों और आंगनवाड़ियों में सुरक्षित पीने का पानी देने के निर्देश जारी

महाराष्ट्र की सभी स्कूलों और आंगनवाड़ियों में सुरक्षित पीने का पानी देने के निर्देश जारी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

पानी आपूर्ति और स्वच्छता विभाग ने स्कूलों, आंगनवाड़ियों और दुर्गम आदिवासी बस्तियों तक सुरक्षित पीने का पानी पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।

पुणे: राज्य की सभी स्कूलों और आंगनवाड़ियों के साथ आदिवासी बहुल और दुर्गम इलाकों के वंचित टोले-बस्तियों तक सुरक्षित पीने का पानी पहुंचाने के लिए पानी आपूर्ति और स्वच्छता विभाग ने अहम निर्देश दिए हैं। कक्ष अधिकारी अंजली बोडके ने यह जानकारी दी।

जल जीवन मिशन के तहत स्कूलों और आंगनवाड़ियों में पानी की सप्लाई चालू रखने के आदेश हैं। इसके साथ शौचालयों में पानी और हाथ धोने की सुविधा भी चालू रखनी होगी। जिन आदिवासी बस्तियों में अब तक नल कनेक्शन नहीं पहुंचा, उन्हें योजना में जोड़ने के लिए प्रस्ताव 15 नवंबर तक जमा करने की मोहलत दी गई है।

आंकड़ों की बात करें तो जल जीवन मिशन के तहत राज्य में स्कूलों और आंगनवाड़ियों के लिए 6,629 योजनाएं मंजूर हैं। इनमें से 6,357 योजनाओं का काम पूरा हो चुका है, जबकि बाकी 272 काम अभी चल रहे हैं। जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को यह पक्का करना है कि जो योजनाएं पूरी हो गई हैं, उनमें अच्छी क्वालिटी का पीने का पानी मिल रहा हो, शौचालयों में पानी आ रहा हो और हाथ धोने की सुविधा चालू हो।

जिन योजनाओं का काम अधूरा है, उनके पूरा होने तक बच्चों को पानी की दिक्कत न हो, इसके लिए निर्देश दिए गए हैं। पास की किसी योजना से अस्थायी नल कनेक्शन दिया जाए, या टैंकर अथवा पानी की टंकी से वैकल्पिक इंतजाम किया जाए।

असुरक्षित आदिवासी समूह (पीवीटीजी) और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीएजेजीयूए) के तहत दुर्गम बस्तियों को पानी की योजनाओं में प्राथमिकता दी गई है। पीवीटीजी के तहत आने वाले 16 जिलों में कुल 4,352 योजनाएं हैं, जिनमें से 2,187 पूरी हो चुकी हैं। बाकी 2,165 योजनाओं को दिसंबर 2028 तक पूरा करने की योजना बताई गई है।

पानी की क्वालिटी की जांच के बारे में भी साफ निर्देश हैं। आदिवासी बहुल इलाकों में पीने के पानी के स्रोतों के साथ नल से दिए जाने वाले पानी की भी प्रयोगशाला में जांच होगी। साल में एक बार रासायनिक जांच और दो बार जैविक जांच करनी होगी। इसके अलावा प्रशिक्षित महिला स्वयंसेवकों के जरिए हर महीने जैविक जांच कराने के निर्देश हैं।

वंचित टोले-बस्तियों के लिए जो प्रस्ताव भेजे जाएंगे, उनमें वहां की आबादी, जरूरी नल कनेक्शनों की संख्या, वितरण व्यवस्था और अतिरिक्त निधि का ब्योरा देना होगा।

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