स्कूल और आंगनवाड़ी में पानी चालू रखने का आदेश, आदिवासी बस्तियों के प्रस्ताव 15 नवंबर तक
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जल जीवन मिशन के तहत राज्य के स्कूलों और आंगनवाड़ियों में पानी की सप्लाई चालू रखने के निर्देश जारी हुए हैं। नल कनेक्शन से वंचित आदिवासी बस्तियों के प्रस्ताव 15 नवंबर 2026 तक जमा करने होंगे।
महाराष्ट्र के सभी स्कूलों और आंगनवाड़ियों में पीने का साफ पानी चालू रखने के लिए पानी आपूर्ति और स्वच्छता विभाग ने निर्देश जारी किए हैं। ये निर्देश आदिवासी बहुल और दुर्गम इलाकों के उन टोलों और बस्तियों के लिए भी हैं, जहां अब तक पानी नहीं पहुंचा है। जल जीवन मिशन के तहत स्कूलों और आंगनवाड़ियों में पानी की सप्लाई, शौचालयों के लिए पानी और हाथ धोने की सुविधा चालू रखने को कहा गया है।
नल कनेक्शन से अब तक वंचित रही आदिवासी बस्तियों को योजना में शामिल करने के लिए प्रस्ताव जमा करने की आखिरी तारीख 15 नवंबर 2026 तय की गई है।
यह जानकारी कक्ष अधिकारी अंजली बोडके ने सरकारी परिपत्र के जरिए दी है। परिपत्र के मुताबिक जल जीवन मिशन के तहत राज्य में स्कूलों और आंगनवाड़ियों के लिए कुल 6 हजार 629 योजनाएं मंजूर हुई हैं। इनमें से 6 हजार 357 योजनाओं का काम पूरा हो चुका है, जबकि बाकी 272 योजनाओं का काम चल रहा है।
जिन योजनाओं का काम पूरा हो गया है, वहां अच्छी क्वालिटी का पीने का पानी, शौचालयों के लिए पानी और हाथ धोने की सुविधा चालू है या नहीं, इसकी पुष्टि जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को करनी होगी। जहां काम अधूरा है, वहां काम पूरा होने तक पास की किसी योजना से अस्थायी नल कनेक्शन देने, टैंकर भेजने या पानी की टंकी रखने जैसी वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश हैं। इसके लिए 15वें वित्त आयोग के फंड का इस्तेमाल करने को कहा गया है।
आदिवासी बस्तियों को पानी आपूर्ति योजनाओं में प्राथमिकता दी जाएगी। खास तौर पर असुरक्षित आदिवासी समूह (पीवीटीजी) और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीएजेजीयूए) के तहत आने वाली दुर्गम बस्तियों को तरजीह मिलेगी। पीवीटीजी के तहत आने वाले 16 जिलों में 4 हजार 352 योजनाएं हैं। इनमें से 2 हजार 187 पूरी हो चुकी हैं और 2 हजार 165 योजनाओं का काम चल रहा है। इन योजनाओं को दिसंबर 2028 तक पूरा करने की तैयारी है।
पानी की क्वालिटी की जांच को लेकर भी निर्देश दिए गए हैं। आदिवासी बहुल इलाकों में पीने के पानी के स्रोतों और नल कनेक्शन से मिलने वाले पानी की प्रयोगशाला में साल में एक बार केमिकल जांच और दो बार जैविक जांच करनी होगी। इसके अलावा प्रशिक्षित महिला स्वयंसेवकों के जरिए हर महीने जैविक जांच कराने के भी निर्देश हैं।
वंचित टोलों और बस्तियों के प्रस्ताव में वहां की आबादी, जरूरी नल कनेक्शनों की संख्या, वितरण व्यवस्था और अतिरिक्त फंड का ब्योरा देना होगा।
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