चार चश्मदीदों की गवाही से पुणे में छेड़छाड़ के मामले में बाप-बेटे को एक साल की सश्रम कैद
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राजगढ़ पुलिस स्टेशन में 2016 में दर्ज मामले में कोर्ट ने अयाज और परवेज तांबोली को दोषी ठहराया। दोनों पर 5,000 रुपये जुर्माना भी लगा।
पुणे की एक कोर्ट ने एक महिला से गाली-गलौज और छेड़छाड़ के मामले में बाप-बेटे को दोषी ठहराया है। यह केस करीब दस साल पहले राजगढ़ पुलिस स्टेशन में दर्ज हुआ था। फैसले में सबसे अहम भूमिका चार चश्मदीद गवाहों की रही, जिन्होंने महिला के बयान की पुष्टि की।
फर्स्ट क्लास ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ए. एन. शिंदे ने हवेली तालुका के खेड शिवापुर के रहने वाले अयाज महबूब तांबोली (60) और उनके बेटे परवेज अयाज तांबोली (35) को एक-एक साल की सश्रम कैद सुनाई। दोनों पर महिला को गालियां देने और उससे छेड़छाड़ करने का आरोप साबित माना गया।
कोर्ट ने सजा के साथ हर दोषी पर 5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अगर दोनों यह जुर्माना नहीं भरते, तो उन्हें दो महीने की अतिरिक्त साधारण कैद काटनी होगी।
ट्रायल के दौरान सरकारी पक्ष ने कुल नौ गवाहों से पूछताछ करवाई। इनमें पीड़िता, चार चश्मदीद और मेडिकल अफसर शामिल थे। चश्मदीदों के बयान इसलिए निर्णायक साबित हुए कि उन्होंने पीड़िता की गवाही से मेल खाती बातें कोर्ट में रखीं। इससे आरोपियों के खिलाफ अभियोजन का केस मजबूत हुआ।
सरकार की तरफ से यह केस सहायक सरकारी वकील शीला घोडेश्वर ने लड़ा। उन्होंने सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर अपनी दलीलें रखीं। सबूतों को कैसे परखा जाए और गवाही कितनी भरोसेमंद मानी जाए, इस पर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के कई फैसलों का हवाला भी दिया।
अभियोजन ने खास तौर पर इस बात पर जोर दिया कि पीड़िता का बयान और चश्मदीदों के बयान आपस में एक जैसे हैं। कोर्ट के सामने मेडिकल सबूत भी पेश किए गए।
गवाहियों और उपलब्ध सबूतों की जांच करने के बाद कोर्ट ने दोनों को दोषी करार दिया और सश्रम कैद की सजा सुनाई।
यह मामला 2016 में राजगढ़ पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। कोर्ट की कार्यवाही का काम विद्याधर निचित ने संभाला।
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