बालेवाड़ी का 14 साल से बेकार पुल, स्वाभिमानी पार्टी ने दशहरे पर पूजा कर जताया विरोध
पुणे महानगरपालिका की सीमा में आने वाले बालेवाड़ी और पिंपरी-चिंचवड के कासपटेवाड़ी को जोड़ने वाला पुल 14 साल से इस्तेमाल में नहीं है। स्वाभिमानी पार्टी ने दशहरे पर वहीं पूजा कर प्रशासन से जवाब मांगा।
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पुणे महानगरपालिका (PMC) की सीमा में आने वाले बालेवाड़ी को पिंपरी-चिंचवड के कासपटेवाड़ी से जोड़ने वाला एक पुल पिछले 14 साल से इस्तेमाल में नहीं है। इसी बात को लेकर स्वाभिमानी पार्टी ने दशहरे के मौके पर पुल पर पूजा की और प्रशासन के कामकाज पर सवाल उठाए। पार्टी ने इसे प्रतीकात्मक विरोध बताया है।
इस विरोध की अगुवाई स्वाभिमानी पार्टी ने की। पार्टी के लोगों का कहना था कि इस पुल को बनाने में कई करोड़ रुपये खर्च हुए, फिर भी वह किसी काम का नहीं रहा। उन्होंने पूछा कि जनता का इतना पैसा लगने के बाद भी पुल बेकार क्यों पड़ा है।
प्रदर्शन करने वालों के मुताबिक विकास योजना (DP) में सड़क की अलाइनमेंट बदल दी गई। इसकी वजह से पुल उस रास्ते से कट गया, जिसके लिए उसे बनाया गया था। उनका आरोप है कि यह बदलाव करते वक्त प्रभावित किसानों को भरोसे में नहीं लिया गया, और इसी वजह से यह ढांचा बेकार पड़ा है।
प्रदर्शन करने वालों ने उन किसानों के मुआवजे का मुद्दा भी उठाया, जिनकी जमीन पुल के लिए ली गई थी। उनका दावा है कि प्रभावित जमीन मालिकों को अब तक कोई मुआवजा नहीं मिला। उन्होंने प्रशासन पर आरोप लगाया कि वह इस पुराने मसले को सुलझा नहीं पाया।
पार्टी के लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि बेकार पड़ा यह पुल और उसके आसपास का इलाका स्थानीय लोगों के लिए परेशानी बन गया है। उनके मुताबिक वहां निर्माण का मलबा डाला जा रहा है, गाड़ियां खड़ी की जा रही हैं, शराब पी जा रही है और जुआ खेला जा रहा है। इसके अलावा दूसरी कथित गैरकानूनी गतिविधियां भी वहां होने का आरोप है।
प्रदर्शन करने वालों ने सवाल किया कि इन सब गतिविधियों और पुल के बेकार रहने से लोगों को जो दिक्कत हो रही है, उसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी।
दशहरे पर की गई यह प्रतीकात्मक पूजा लंबे समय से हो रही देरी की तरफ ध्यान खींचने के लिए थी। पार्टी चाहती है कि इस प्रोजेक्ट और बाकी पड़े मुआवजे के मामले में महानगरपालिका प्रशासन जवाबदेही तय करे।
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