बुधवार, 28 अक्टूबर 2026

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विशाखा राऊत की अपील कोकण भवन में खारिज, पार्षद पद बचाने की कोशिश को झटका

विशाखा राऊत की अपील कोकण भवन में खारिज, पार्षद पद बचाने की कोशिश को झटका तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सियासत PT24 राजनीति डेस्क

जाति प्रमाणपत्र अवैध ठहराए जाने के मामले में मुंबई की पूर्व महापौर विशाखा राऊत की अपील कोकण भवन में खारिज हो गई। ठाकरे गुट के लिए इसे राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

मुंबई में ठाकरे गुट को बड़ा झटका लगा है। पार्षद पद रद्द होने के बाद पूर्व महापौर विशाखा राऊत ने जो अपील दाखिल की थी, उसे कोकण भवन में खारिज कर दिया गया। पार्षदों की अपात्रता के इस मामले में इसे उद्धव ठाकरे गुट के लिए राजनीतिक धक्का माना जा रहा है। राऊत ने यह अपील इस आरोप के खिलाफ की थी कि उनका जाति प्रमाणपत्र अवैध है।

इस फैसले से शिंदे गुट की प्रिया सरवणकर को बड़ी राहत मिलने की बात कही जा रही है।

मिली जानकारी के मुताबिक विशाखा राऊत का अन्य पिछड़ा यानी OBC वर्ग का जाति प्रमाणपत्र पालघर की जाति पड़ताल समिति ने अवैध ठहराया था। इसके बाद महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें छह साल के लिए पार्षद पद के लिए अपात्र करार दिया। राऊत ने इस कार्रवाई को मुंबई उच्च न्यायालय में चुनौती दी, लेकिन अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी। अब हालात ऐसे बने हैं कि प्रिया सरवणकर गुरव के लिए पार्षद पद पर दावा करने का रास्ता खुल सकता है।

आखिर विशाखा राऊत का पद क्यों रद्द हुआ था? मुंबई नगर निगम के चुनाव में राऊत ने ठाकरे गुट के टिकट पर चुनाव लड़ा था। उस चुनाव में उन्होंने शिंदे गुट की प्रिया सरवणकर को हराया था। इसके बाद सरवणकर ने राऊत की जीत को चुनौती दी। राऊत का जाति वैधता प्रमाणपत्र अवैध ठहराए जाने पर उनका पद रद्द किया गया, और आगे के छह साल वे चुनाव भी नहीं लड़ सकती थीं।

सरकार के नगर विकास विभाग ने इस बारे में अधिसूचना भी जारी की थी। फिर रितू तावडे ने घोषणा की थी कि विशाखा राऊत का पार्षद पद रद्द हो गया है। इस घोषणा के बाद राऊत ने कहा था कि वे इस फैसले को कानूनी तौर पर चुनौती देंगी।

इस बीच सर्वोच्च न्यायालय से राऊत को अस्थायी राहत मिली थी। पद रद्द होने के बाद उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की थी और मांग की थी कि इस फैसले पर रोक लगाई जाए। इसके बाद अदालत ने आदेश दिया था कि राऊत की खाली हुई जगह पर किसी की नियुक्ति न की जाए और फिलहाल उस जगह को खाली ही रखा जाए। अदालत ने अपने आदेश में चुनाव आयोग और राऊत की प्रतिद्वंद्वी प्रिया सरवणकर को भी नोटिस जारी किया था और उन्हें इस मामले में अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया था।

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