विधान परिषद नतीजों के बाद अमोल मिटकरी बोले, आत्मपरीक्षण नहीं हुआ तो पार्टी को चुकानी पड़ेगी कीमत
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राज्य की 5 विधान परिषद सीटों के चुनाव के नतीजे आ गए हैं। महायुति ने 5 में से तीन सीटें जीती हैं, जबकि महाविकास आघाड़ी के खाते में 2 सीटें गई हैं। इनमें से एक सीट पर सीधा मुकाबला राष्ट्रवादी बनाम राष्ट्रवादी का था।
मराठवाड़ा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में शरद पवार की राष्ट्रवादी की तरफ से प्रतापसिंह पाटील उम्मीदवार थे, जबकि अजित पवार की राष्ट्रवादी ने सतीश चव्हाण को मैदान में उतारा था। सतीश चव्हाण को हार का सामना करना पड़ा, जिससे राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेताओं में निराशा है। पार्टी के कार्याध्यक्ष प्रफुल पटेल के बाद अब पूर्व विधायक अमोल मिटकरी ने भी ट्वीट करके पार्टी को घर से ही आईना दिखाया है।
अमोल मिटकरी ने कहा कि चुनाव में नतीजा पार्टी के पक्ष में आए तो श्रेय लेने के लिए आगे आना और हालात खिलाफ हों तो जिम्मेदारी से हाथ झटक लेना, ऐसी राजनीति अब बंद होनी चाहिए। उनके मुताबिक, जब पार्टी के हाथ से राजनीतिक मौके फिसल रहे थे, तब यह खोजा जाना चाहिए कि गलती ठीक कहां हुई, किस स्तर पर संवाद रुक गया और संभावित राजनीतिक ताकत पार्टी से बाहर क्यों चली गई। मिटकरी ने यह भी कहा कि नेतृत्व का सम्मान सिर्फ मंच पर नारे लगाने से नहीं होता, नेतृत्व के फैसलों को जमीन पर कामयाब करके दिखाना पड़ता है।
मिटकरी ने हर्षदा जाधव-देशमुख और किरण सरनाईक की जीत का भी जिक्र किया। उनका कहना है कि इन जीतों ने राष्ट्रवादी कांग्रेस के सामने एक अहम सबक रखा है। राजनीतिक महत्वाकांक्षा रखने वाले काबिल लोगों को अगर वक्त पर संवाद, सही मौका और भरोसा न दिया जाए, तो वे अपना रास्ता खुद बना लेते हैं। मिटकरी के मुताबिक, फिर उनकी जीत का विश्लेषण करने से ज्यादा जरूरी यह आत्मपरीक्षण करना है कि वे पार्टी से दूर क्यों गईं। इस तरह उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं पर तंज कसा है।
मिटकरी ने कहा कि आज जरूरत एक-दूसरे पर दोष मढ़ने की नहीं, बल्कि जिम्मेदारी तय करने की है। उन्होंने कहा कि सुनेत्रा भाभी का नेतृत्व और मजबूत करने के लिए पार्टी के हर स्तर को आत्मपरीक्षण करना चाहिए। वरना संगठन की कमियों की कीमत पार्टी को आने वाले चुनावों में चुकानी पड़ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी का नुकसान हो जाने के बाद हाथ झटक देना आसान होता है, पर पार्टी का नुकसान होने ही न देना, यही सच्चे नेतृत्व की कसौटी है।
इससे पहले प्रफुल पटेल ने भी ट्वीट किया था। उन्होंने लिखा कि आज के विधान परिषद के नतीजे एक साफ और अहम चेतावनी हैं। लोगों का भरोसा फिर से जीतने, पार्टी की प्राथमिकताएं नए सिरे से तय करने और संगठन में सुधार करने के लिए तुरंत और सख्त आत्मपरीक्षण करना होगा। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि प्रफुल पटेल ने नाम लिए बिना सीधे पार्टी नेतृत्व को सार्वजनिक सलाह दी है।
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