विधान परिषद चुनाव में हार के बाद महायुति की बैठक, एक-दो दिन में होगा मंथन
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में महायुति को दो और महाविकास आघाडी को तीन सीटें मिलीं। हार के बाद तीनों दल आपस में भिड़े हैं।
विधान परिषद के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव का नतीजा आ गया है। इसमें महायुति सिर्फ दो सीटें जीत पाई, जबकि महाविकास आघाडी ने तीन सीटें अपने नाम कीं। महायुति के लिए इसे बड़ा झटका माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि गठबंधन के अंदर की खींचतान, विवाद और एक-दूसरे की टांग खिंचाई की वजह से उसे यह बड़ी हार झेलनी पड़ी।
हार के बाद भाजपा और राष्ट्रवादी ने खुलकर आरोप लगाया है कि यह पराभव शिंदे सेना की वजह से हुआ। शिंदे सेना ने पलटकर भाजपा को गद्दारी का आईना दिखाया है। चुनाव के बहाने तीनों पार्टियों के झगड़े अब सबके सामने आ गए हैं। इसी वजह से महायुति ने एक बड़ा फैसला लिया है। फैसला यह है कि अगले एक-दो दिन में हार पर मंथन किया जाएगा।
हार और उसके बाद बढ़े तनाव से तस्वीर यही बन रही है कि महायुति में सब कुछ ठीक नहीं है। इसी पृष्ठभूमि में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार, यानी महायुति के तीनों प्रमुख नेताओं की बैठक होने वाली है। यह बैठक एक-दो दिन में हो जाएगी। बताया जा रहा है कि इसमें हार के विश्लेषण, अंदरूनी विवादों और आगे के डैमेज कंट्रोल पर चर्चा होगी।
बैठक में खास तौर पर पुणे और संभाजीनगर की हार पर बात होगी। कहा जा रहा है कि इन्हीं दो शहरों पर ज्यादा फोकस रहेगा। वहीं शिंदे गुट की तरफ से अमरावती का मुद्दा आगे बढ़ाने की कोशिश होगी, ऐसा बताया जा रहा है। भाजपा की ओर से रवींद्र धंगेकर को हटाने की मांग उठाए जाने के संकेत भी मिल रहे हैं। इसलिए सबकी नजर इस पर है कि धंगेकर पर कार्रवाई बैठक से पहले होती है या बैठक के बाद। सूत्रों के मुताबिक, अगर धंगेकर पर कार्रवाई हुई तो राष्ट्रवादी की तरफ से सवाल उठ सकता है कि फिर अब्दुल सत्तार का क्या होगा। इसीलिए पूरे राज्य की नजर इस बैठक पर टिकी है।
नतीजे के बाद आरोप-प्रत्यारोप भी खूब चले। भाजपा के प्रवक्ता नवनाथ बन ने रवींद्र धंगेकर पर कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि धंगेकर ने बाल से गला काटा है और शिंदे को झारी के शुक्राचार्यों पर कार्रवाई करनी चाहिए। दूसरी तरफ धंगेकर ने कहा है कि राज्य के नेतृत्व से जनता नाराज है और नेतृत्व बदलना चाहिए।
शिंदे सेना के आनंद परांजपे ने सवाल किया कि क्या सारी सीटें भाजपा ही लड़े, यह जिद किसलिए है। उन्होंने यह भी पूछा कि अमरावती और संभाजीनगर में आपके नेताओं ने हमारे खिलाफ प्रचार कैसे किया। शिंदे के विधायक अब्दुल सत्तार ने कहा कि मैंने खुलेआम शरद पवार गुट का प्रचार किया था, तब मुझे किसी ने कुछ क्यों नहीं कहा।
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