शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट

माहिम में BMC के AI कैमरे पर सवाल, बिना कचरे के भी बजी चेतावनी

माहिम में BMC के AI कैमरे पर सवाल, बिना कचरे के भी बजी चेतावनी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 शहर डेस्क

गजानन वाटिका के पास लगे कैमरे को कुछ लोग अच्छा कदम बता रहे हैं, पर झूठे अलर्ट, तेज आवाज और कचरा गाड़ी की देरी की शिकायतें भी हैं।

कचरा फेंकने की आदत पर रोक लगाने के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने माहिम में गजानन वाटिका के पास एक AI कैमरा लगाया है। यह जगह ऐसी है जहां अक्सर कचरा जमा हो जाता है। कुछ स्थानीय लोगों ने इस पहल को अच्छा बताया है, लेकिन मौके पर किए गए एक परीक्षण में यह सवाल खड़ा हुआ कि यह सिस्टम कचरा फेंकने वालों को कितनी सही पहचान पाता है।

मौके पर जाकर देखा गया तो रिपोर्टर जब कैमरे की निगरानी वाले दायरे में आया-गया, तब ऑडियो चेतावनी बार-बार बजी। यह तब भी हुआ जब रिपोर्टर के हाथ में कचरे की कोई थैली नहीं थी। इससे झूठे अलर्ट की आशंका बढ़ती है, खासकर रात के वक्त।

BMC के मुताबिक यह AI कैमरा कचरे वाली जगह की तरफ आने वाले लोगों को पहचानता है और फौरन ऑडियो चेतावनी देता है कि कचरा न फेंकें। यह कदम सार्वजनिक जगहों पर बार-बार जमा होने वाले कचरे से निपटने की BMC की कोशिशों का हिस्सा है। BMC ने संकेत दिया है कि मुंबई में दूसरी जगहों पर भी ऐसे ही कैमरे लगाने की योजना है।

मौके की पड़ताल में कई बातें सामने आईं। कैमरा लगाने से पहले BMC ने जगह साफ कर दी थी। जिन लोगों ने निगरानी वाली जगह पर कचरा डालना बंद किया, वे तिकोने बगीचे के दूसरे हिस्सों में कचरा फेंकते दिखे। रिपोर्टर के अनुमान के मुताबिक करीब 40 मिनट में एक ऐसी जगह पर, जहां शुरू में कचरे की एक थैली थी, पांच-छह थैलियां और जमा हो गईं। यहां रहने वालों और कचरा उठाने वालों ने बताया कि उन्हें कचरा गाड़ी का इंतजार करना पड़ता है।

BMC से पूछा गया था कि कैमरे का AI असल में क्या पहचानता है, साथ ही आवाज की तेजी, कचरा उठाने में देरी और कचरा दूसरी जगहों पर चले जाने की यहां रहने वालों की चिंताओं पर भी जवाब मांगा गया था। खबर लिखे जाने तक BMC का जवाब नहीं आया था।

जगह के सामने कारोबार करने वाले नरेश जैन ने बताया कि शुरू में कैमरे से लोग रुक गए थे और कचरा डालना बंद हो गया था। लेकिन उनके मुताबिक आवाज की तेजी चिंता की बात बन गई। उन्होंने कहा, "अधिकारियों ने कल कैमरे लगाए और हम इसे लेकर काफी उत्सुक थे। कैमरे की घोषणाओं से लोग सचमुच रुक गए थे। लेकिन बुधवार को घोषणा की आवाज बहुत तेज और चौंकाने वाली थी। जब स्थानीय लोगों ने अधिकारियों को बताया, तो वे आए और आवाज कम कर दी।" दिन में ट्रैफिक के शोर के बीच कम की गई आवाज ठीक लगती है, पर यहां रहने वालों को डर है कि रात में ये घोषणाएं कहीं परेशान न करें।

जगह के सामने की इमारत में रहने वाली मीनल पाटिल गुरुवार को शाम 4 बजे से 4.35 बजे तक घर का कचरा लेकर खड़ी रहीं, क्योंकि वहां तैनात निगम कर्मचारी ने उन्हें कचरा गाड़ी का इंतजार करने को कहा था। उन्होंने कहा, "हमारे घर में रोज मछली खाई जाती है और पकाने से निकलने वाला कचरा घर में रखें तो बहुत बदबू करता है। इसलिए अगर अधिकारी चाहते हैं कि हम इसे उन जगहों पर न डालें जहां अब तक डालते आए हैं, तो उन्हें कचरा उठाने के फेरे बढ़ाने होंगे, और गाड़ियां कब आएंगी इसका समय बताया जाए तो मदद होगी।"

पास की एक इमारत में कचरा इकट्ठा करने का काम करने वाली एक महिला ने बताया कि वे दो घंटे गाड़ी का इंतजार करती रहीं, पर गाड़ी नहीं आई। उन्होंने कहा, "मैं यहां 2 घंटे गाड़ी के आने का इंतजार करती रही, पर वह नहीं आई। यहां के अधिकारी ने बताया कि गाड़ी शायद ट्रैफिक में फंसी होगी। अगर ऐसा है तो और गाड़ियां चाहिए। पहल बहुत अच्छी है, पर साथ ही इलाके के लोगों से कहा गया है कि 2 से 3 दशकों में जो आदत पड़ी है, उसे भूल जाएं। यह बदलाव मुश्किल है।"

स्थानीय निवासी सुनील लक्ष्मण परब ने पहल का स्वागत किया, पर कहा कि इसकी कामयाबी अमल की कमियां दूर करने पर टिकी है। उन्होंने कहा, "अगर यह चीज कामयाब रही, तो दूसरे इलाकों में इसे लागू करना शहर के लिए बहुत फायदेमंद होगा। हमारे यहां कई जगहें हैं जिन्हें ऐसी देखभाल चाहिए। अगर नई जगहों पर कचरा जमा होने और कम फेरों जैसी दिक्कतें अधिकारी दूर कर दें, तो फिर हमें पीछे मुड़कर नहीं देखना पड़ेगा।"

#मुंबई#शहर#PT24#Civic#Mumbai

विज्ञापन

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप 'आप' पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे