मुंबई के महानगरपालिका स्कूलों में मिड-डे मील के चावल की क्वालिटी पर सवाल
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बृहन्मुंबई महानगरपालिका की शिक्षा समिति के सदस्यों ने स्कूलों में खिचड़ी के लिए इस्तेमाल होने वाले कच्चे चावल की क्वालिटी पर सवाल उठाए हैं।
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की शिक्षा समिति के सदस्यों ने महानगरपालिका स्कूलों में मिड-डे मील बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले कच्चे चावल की क्वालिटी पर सवाल खड़े किए हैं। सदस्यों का कहना है कि स्कूलों के प्रिंसिपल पहले ही बच्चों को परोसी जाने वाली खिचड़ी की क्वालिटी को लेकर शिकायत कर चुके हैं, लेकिन गड़बड़ी की जड़ खुद अनाज में है।
यह मुद्दा सोमवार को शिक्षा समिति में शिवसेना (UBT) के सदस्य प्रियंक राऊत ने सबसे पहले उठाया। राऊत ने कहा, "हम अक्सर सुनते हैं कि प्रिंसिपल बच्चों को दी जाने वाली खिचड़ी की क्वालिटी खराब होने की शिकायत करते हैं। अब हमें पता चल गया है कि दिक्कत अनाज में ही है।"
विपक्ष की नेता किशोरी पेडणेकर ने भी यह मामला उठाया। उन्होंने कहा कि स्कूलों में दिए जाने वाले खाने में कई समस्याएं हैं, अनाज की क्वालिटी से लेकर उसकी सप्लाई चेन में कथित गड़बड़ियों तक। पेडणेकर ने आरोप लगाया, "खिचड़ी बनाने के लिए जो चावल इस्तेमाल होता है, उसमें टूटे दाने और दूसरी अशुद्धियां हैं।" उन्होंने लैब में जांच कराने की मांग की और महानगरपालिका से इस मामले को देखने का आग्रह किया।
कॉर्पोरेटरों ने खाने को लेकर और भी शिकायतें गिनाईं। उनके मुताबिक खाना ठीक से पकाया नहीं जाता और उसका स्वाद खराब रहता है, सब्जियां कच्ची रह जाती हैं, खाने में बाल निकलते हैं और पके हुए चावल में कंकड़ मिलने के मामले भी हुए हैं।
चर्चा में अनाज की सप्लाई चेन में कथित खामियों का मुद्दा भी सामने आया। राऊत ने पुराने FIR की जानकारी भी पेश की। इनमें कथित तौर पर ऐसे ट्रक ड्राइवरों को गिरफ्तार किया गया था जो मिड-डे मील का अनाज कहीं और बेच रहे थे। आरोप यह भी है कि खिचड़ी बनाने वाले NGO को घटिया अनाज दिया गया।
मुंबई के एक महानगरपालिका स्कूल के प्रिंसिपल ने कहा, "यह सच है कि स्कूलों को खिचड़ी की क्वालिटी की दिक्कत झेलनी पड़ती है। हमारी खिचड़ी में अक्सर न खाने लायक दाने मिलते थे। लेकिन हमने मिड-डे मील बनाने वाली संस्था बदल दी, और अब समस्या खत्म हो गई है।"
वहीं महानगरपालिका के एक अधिकारी ने कहा, "जो मुद्दा उठाया गया है, हम उसे देख रहे हैं और उस पर रिपोर्ट बना रहे हैं। उसके बाद जरूरी कार्रवाई की जाएगी। इस बीच मिड-डे मील योजना के सभी SOP का पालन किया जा रहा है।"
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