जुहू बीच पर फिर दिखे निर्माण स्थलों के पाइप, हटाए जाने के कुछ ही दिन बाद लौटे
मरीन इकोलॉजिस्ट शौनक मोदी ने बताया कि जुहू तारा रोड के पास दो जगह पाइप फिर लगे हैं। समुद्री जीवों को नुकसान की चिंता फिर उठी है।
जुहू बीच पर निर्माण स्थलों का पानी छोड़ने वाले पाइप फिर दिखने लगे हैं। आरोप है कि इन पाइपों से पानी सीधे समुद्र तट पर छोड़ा जा रहा है। इससे समुद्री जीवों को नुकसान पहुंचने की चिंता एक बार फिर उठ गई है। कुछ दिन पहले ये पाइप हटा दिए गए थे, लेकिन अब बीच के एक और हिस्से में वे नजर आए हैं।
मरीन इकोलॉजिस्ट शौनक मोदी ने इसकी जानकारी दी। मोदी कोस्टल कंजर्वेशन फाउंडेशन के डायरेक्टर और मरीन लाइफ ऑफ मुंबई के संस्थापक हैं। उनका कहना है कि पहले वाली जगह पर भी पाइप दोबारा जोड़ दिए गए हैं।
4 नवंबर को मोदी ने X पर तस्वीरें और वीडियो डाले। इनमें जुहू तारा रोड पर लिटिल इटली रेस्टोरेंट के पास पाइपों से समुद्र में पानी जाता दिख रहा था। उन्होंने लिखा, "मेडुसा के सिरों की तरह एक और सिर निकल आया है। यह पिछले वाले से कुछ सौ मीटर दूर है। @mybmcwardKW, कृपया इस निर्माण स्थल पर भी कार्रवाई कीजिए। जगह जुहू तारा रोड पर लिटिल इटली रेस्टोरेंट के सामने है।"
मोदी ने बताया कि पाइपों से बीच पर पानी निकलता देखकर उन्हें झटका लगा। पहली जगह पर तीन पाइप स्टॉर्मवॉटर ड्रेन से जुड़े थे और उनसे पानी बीच पर आ रहा था। वहां से करीब 250 मीटर दूर तीन पाइपों का एक और सेट पास के निर्माण स्थल से पानी छोड़ रहा था। दोनों जगहें जुहू तारा रोड की इसी पट्टी पर करीब 250 मीटर के फासले पर हैं।
BMC के K West वार्ड ने 4 नवंबर को शाम 6.26 बजे इस पोस्ट का जवाब दिया। वार्ड ने कहा कि शिकायत संबंधित विभाग को भेज दी गई है। शाम 6.31 बजे मोदी ने वार्ड से शिकायत नंबर मांगा। उन्होंने यह भी लिखा कि पहली जगह पर पाइप फिर लगा दिए गए हैं, और वहां की तस्वीरें भी साथ में डालीं। 5 नवंबर को दोपहर 2.08 बजे वार्ड ने जवाब दिया कि BMC के MARG पोर्टल पर शिकायत दर्ज हो गई है। MARG शिकायत नंबर KW_202600164716 है।
मामला नया नहीं है। मोदी ने इस निकासी के बारे में सबसे पहले 24 अक्टूबर को X पर चेताया था। उन्होंने कहा था कि इससे समुद्री जीवों को नुकसान हो सकता है और तटीय पारिस्थितिकी तंत्र बिगड़ सकता है। 26 अक्टूबर को खबर आई कि एक निर्माण स्थल से कई दिनों से मटमैला पानी और कीचड़ जुहू बीच पर और समुद्र में छोड़ने का आरोप है। इससे समुद्री प्रदूषण और तटीय पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान की चिंता जताई गई थी।
उस निकासी से बीच की एक फुट से ज्यादा रेत कट गई थी। बीच का एक बड़ा हिस्सा बारीक कीचड़ से ढक गया था। यह तलछट समुद्र की तह में रहने वाले जीवों पर जम सकती है और पानी की साफ़ दिखने की क्षमता घटा सकती है, जिससे पर्यावरण पर असर और बढ़ सकता है। इसके बाद पाइप हटा दिए गए थे। अब दो जगह उनके फिर दिखने से बीच पर निकासी जारी रहने की चिंता दोबारा खड़ी हो गई है।
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