MMR में बिजली चोरी के 2,285 मामले पकड़े, BEST भी हॉटस्पॉट पर सख्ती की तैयारी में
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महावितरण ने अप्रैल 2026 से अब तक करीब Rs 10.07 करोड़ की बिजली चोरी पकड़ी, जबकि BEST सायन, माटुंगा, वडाला, दादर और धारावी जैसे इलाकों में कार्रवाई बढ़ाएगा।
मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) में बिजली चोरी के खिलाफ दो बड़ी बिजली कंपनियां कार्रवाई तेज कर रही हैं। महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (MSEDCL), जिसे महावितरण भी कहा जाता है, ने अप्रैल 2026 से अब तक बिजली चोरी के 2,285 मामले पकड़े हैं। इनमें करीब Rs 10.07 करोड़ का नुकसान हुआ है। उधर बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट (BEST) अंडरटेकिंग उन इलाकों में कार्रवाई की तैयारी में है, जहां पिछले 33 सालों में दर्ज बिजली चोरी के लगभग आधे मामले आए हैं।
पहले महावितरण की बात। एक खास एंटी-थेफ्ट कैंपेन के दौरान कंपनी ने करीब 37.6 लाख यूनिट बिजली के बिना इजाज़त इस्तेमाल की पहचान की। कंपनी ने 1,494 कंज्यूमर्स से लगभग Rs 7.6 करोड़ वसूल लिए हैं। 185 कंज्यूमर्स के खिलाफ FIR दर्ज हुई है, और दूसरे नियम तोड़ने वालों पर कानूनी कार्रवाई चल रही है।
यह ड्राइव इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 2003 के सेक्शन 135 के तहत चलाई जा रही है, जो बिजली चोरी से जुड़ा है। भांडुप सर्कल के चीफ इंजीनियर संजय पाटिल के गाइडेंस में डिविजनल सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर दीपक पाटिल, धनराज बिक्कड़ और लक्ष्मण काकड़े के अंडर स्पेशल टीमें बनाई गईं। इन टीमों का काम नियम तोड़ने वालों की पहचान करना और बकाया रकम वसूलना है।
महावितरण के डेटा के मुताबिक पेन डिविजन में सबसे ज़्यादा 1,079 मामले दर्ज हुए, जिनमें Rs 3.39 करोड़ की चोरी हुई। वाशी डिविजन में मामले 771 रहे, लेकिन उनकी अनुमानित कीमत Rs 4.87 करोड़ है, जो तीनों डिविजन में सबसे ज़्यादा है। ठाणे में Rs 1.80 करोड़ के 435 मामले दर्ज किए गए।
महावितरण ने कहा है कि कैंपेन आगे भी जारी रहेगा। कंपनी ने कंज्यूमर्स से अपील की है कि वे सिर्फ़ ऑथराइज़्ड कनेक्शन से ही बिजली इस्तेमाल करें। बिजली चोरी करते पाए जाने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अब BEST का हाल। उसने 1993 से 2026 के बीच बिजली चोरी के 30,932 मामले पकड़े हैं, जिनसे Rs 261.72 करोड़ का नुकसान हुआ। इसमें से अंडरटेकिंग ने Rs 220.05 करोड़ वसूल कर लिए हैं, यानी कुल रकम का 84.08%।
दो सिविक वार्ड, F नॉर्थ और G नॉर्थ में 15,061 केस हैं, जो कुल केस का लगभग आधा है। इन वार्ड में सायन, माटुंगा, वडाला, दादर, माहिम और धारावी जैसे इलाके आते हैं। BEST इन ज़्यादा मामलों वाले इलाकों में सख्ती बढ़ाने की योजना बना रहा है, जिसकी शुरुआत सायन, माटुंगा, वडाला, दादर और धारावी से होगी। खास टीमें नए केस की जांच करेंगी, पुराने नियमों के उल्लंघन की फिर से जांच करेंगी और बकाया बिजली बिलों पर फॉलो-अप करेंगी।
BEST के नौ वार्ड में रिकवरी रेट अलग-अलग हैं। कालबादेवी में सबसे ज़्यादा 98.9% रिकवरी रेट दर्ज हुआ, जबकि बायकुला में सबसे कम 69.58%। बायकुला में ही सबसे ज़्यादा बकाया भी है, Rs 14.72 करोड़। अधिकारियों ने बताया कि रिकवरी पेंडिंग रहने की वजह कोर्ट की कार्रवाई, लंबा रिकवरी प्रोसेस, न चुकाया गया ब्याज और बकाया बिजली बिल वाली प्रॉपर्टी की बिक्री है।
महावितरण और BEST की इस तेज़ ड्राइव का मकसद बिना इजाज़त बिजली की खपत पर रोक लगाना, रेवेन्यू रिकवरी सुधारना और पूरे मुंबई तथा बड़े मेट्रोपॉलिटन इलाके में बिजली चोरी के खिलाफ़ सख्ती करना है।
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