मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026

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मुंबई में जनवरी से अगस्त तक 875 नाबालिग लड़कियां लापता, 846 का पता चला

मुंबई पुलिस ने जनवरी से अगस्त 2026 के बीच नाबालिग लड़कियों के किडनैपिंग के 875 मामले दर्ज किए, जिनमें से 846 का पता लगा लिया गया।

मुंबई में जनवरी से अगस्त तक 875 नाबालिग लड़कियां लापता, 846 का पता चला तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

मुंबई पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल जनवरी से अगस्त के बीच शहर में नाबालिग लड़कियों से जुड़े किडनैपिंग के 875 मामले दर्ज हुए। इनमें से 846 लड़कियों को बरामद किया गया या उनका पता लगा लिया गया। इस हिसाब से पता लगाने की दर करीब 97 फीसदी रही।

पिछले साल के मुकाबले तस्वीर कुछ बेहतर है। 2025 में इन्हीं आठ महीनों के दौरान पुलिस ने ऐसे 941 मामले दर्ज किए थे और 879 का पता लगाया था। तब पता लगाने की दर करीब 93 फीसदी थी। यानी 2026 के पहले आठ महीनों में पिछले साल के उसी वक्त से कम मामले दर्ज हुए। अकेले अगस्त 2026 में पुलिस ने 109 केस दर्ज किए और 91 का पता लगाया।

सोशल एक्टिविस्ट का कहना है कि इनमें से कई मामलों में टीनएज लड़कियां अपनी मर्ज़ी से घर छोड़ देती हैं। इसकी वजह अक्सर रोमांटिक रिश्ते, घर के झगड़े, भेदभाव या दुर्व्यवहार होता है। उनके मुताबिक हर मामले को सिर्फ़ क्रिमिनल नज़रिए से देखने के बजाय इन हालात को समझना ज़रूरी है।

पुलिस अधिकारियों ने साफ़ किया है कि कोई भी नाबालिग लापता हो तो किडनैपिंग का केस दर्ज करना ही चाहिए, चाहे ऐसे संकेत हों कि बच्चा अपनी मर्ज़ी से गया है। उनका कहना है कि लापता होने के हालात जानने, बच्चे को ढूंढने और उसकी सुरक्षा पक्की करने के लिए जांच ज़रूरी है।

जुलाई में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य विधानसभा में कुछ डेटा रखा था, जिससे पता चलता है कि लोग घर क्यों छोड़ते हैं। 2021 से 2026 तक के इस डेटा के मुताबिक, करीब 46.32 फीसदी लापता महिलाएं कथित तौर पर रोमांटिक रिश्तों की वजह से घर छोड़ती हैं। 20 फीसदी मामलों में परिवार से जुड़ी समस्याएं थीं और 2 फीसदी में मानसिक तनाव का ज़िक्र किया गया।

पुरुषों के मामले में पैटर्न अलग दिखा। करीब 32 फीसदी कथित तौर पर घरेलू समस्याओं की वजह से घर छोड़ते हैं, जबकि 9.12 फीसदी मामले रोमांटिक रिश्तों से जुड़े थे। एक्टिविस्ट का कहना है कि इन आंकड़ों से साफ़ है कि गुमशुदगी की जांच में पारिवारिक झगड़ों, इमोशनल परेशानी, भेदभाव और गलत व्यवहार को देखना कितना ज़रूरी है।

21 जुलाई को दादर की हिंदू कॉलोनी के एक स्कूल से सात साल की एक बच्ची लापता हो गई। माटुंगा पुलिस ने CCTV फुटेज खंगाले, उसकी हरकतों का पता लगाया और आखिर में उसे पायधोनी में ढूंढ निकाला। पूछताछ में बच्ची ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि उसे अपने माता-पिता की याद आ रही थी।

उसी दिन सेवरी की 13 साल की क्लास IX की एक स्टूडेंट स्कूल के बाद लापता हो गई। बाद में वह दोस्तों से मिलकर लौट आई। ये घटनाएं बताती हैं कि पुलिस नाबालिग के हर गायब होने के मामले की जांच क्यों करती है, भले ही बच्ची अकेले गई हो या नहीं।

अगस्त में भिवंडी में 17 साल की लड़कियों से जुड़े दो अलग-अलग मामले सामने आए। एक मामले में टीनएजर कथित तौर पर किसी दोस्त से मिलने घर से निकली थी। दूसरे मामले में कामतघर के ब्रह्मानंद नगर की एक लड़की रात करीब 2 बजे घर से निकल गई, जब उसके घरवाले सो रहे थे। शांतिनगर और नारपोली पुलिस ने किडनैपिंग का केस दर्ज किया और लड़कियों को ढूंढने के लिए सर्च शुरू की।

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