बदलापुर में 2018 की मारपीट: प्रवीण मुकणे को गैर-इरादतन हत्या में आठ साल की सश्रम कैद
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कल्याण कोर्ट ने कहा कि अभियोजन हत्या का इरादा साबित नहीं कर सका। सह-आरोपी सत्यवान वाघे संदेह का लाभ देकर बरी।
ठाणे जिले की एक अदालत ने 2018 में बदलापुर में हुई मारपीट के मामले में प्रवीण संतोष मुकणे को गैर-इरादतन हत्या का दोषी करार दिया है। कोर्ट ने उसे आठ साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। अदालत का कहना है कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि उसने हत्या के इरादे से वार किया था।
यह फैसला शुक्रवार को कल्याण कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आर वी तामहनेकर ने सुनाया। इसी मामले में दूसरे आरोपी सत्यवान बालकृष्ण वाघे को कोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। वाघे को सभी आरोपों से बरी किया गया है।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक वारदात 7 नवंबर 2018 की रात की है। ठाणे जिले के बदलापुर इलाके में एक किराना दुकान के पास राजेश उर्फ चिड्या रमेश वाघे और आरोपियों के बीच झगड़ा हो गया था। आरोप है कि इसी दौरान वाघे ने लकड़ी का एक डंडा लाकर मुकणे के हाथ में थमा दिया, और मुकणे ने उस डंडे से राजेश के सिर पर वार कर दिया।
अभियोजन पक्ष ने बताया कि घायल राजेश को फौरन अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने वहां पहुंचने पर ही उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (हत्या) और धारा 34 (समान इरादा) के तहत FIR दर्ज की थी।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 11 गवाहों से पूछताछ कराई। अतिरिक्त सरकारी वकील कदंबिनी एम खंडागले ने कहा, "सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 11 गवाहों की जांच की। इसके साथ मेडिकल रिपोर्ट और पोस्टमॉर्टम के नतीजे भी पेश किए गए, जिनसे मौत की वजह सिर की अप्राकृतिक चोट होना पुख्ता हुआ।"
सबूतों को परखने के बाद जज ने कहा कि मुख्य हमलावर के खिलाफ अभियोजन पक्ष ने उसका कृत्य और उसकी जानकारी तो साबित कर दी, लेकिन पहले से सोचा-समझा हत्या का इरादा साबित नहीं हो सका। इसी वजह से मुकणे को IPC की धारा 304 (भाग II) के तहत दोषी ठहराया गया। यह धारा हत्या की श्रेणी में न आने वाली गैर-इरादतन हत्या की है, जबकि शुरुआती आरोप धारा 302 का था।
कोर्ट ने मुकणे को आठ साल के सश्रम कारावास के साथ 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना न भरने पर उसे दो महीने की अतिरिक्त सश्रम कैद काटनी होगी। अदालत ने 8 नवंबर 2018 से विचाराधीन कैदी के तौर पर उसके जेल में बिताए समय को सजा में समायोजित करने की भी मंजूरी दी।
कोर्ट ने मृतक के आश्रितों के लिए भी निर्देश दिया है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, ठाणे को कहा गया है कि वह उचित मुआवजे का आकलन करे।
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