बिना झोपड़पट्टी वाले प्लॉट पर SRA की छूट पर सवाल, अश्विनी भिडे ने सीएम फडणवीस को लिखा पत्र
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मुंबई महानगरपालिका आयुक्त अश्विनी भिडे ने SRA के कामकाज पर आपत्ति जताई है। उन्होंने नियम 33(11) के प्रस्ताव फिर से महापालिका को सौंपने की मांग की है।
मुंबई महानगरपालिका की आयुक्त अश्विनी भिडे ने झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण यानी SRA के कामकाज पर आपत्ति जताते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखा है। पत्र में खास तौर पर विकास नियंत्रण नियमावली (DCPR) के नियम 33(11) का मुद्दा उठाया गया है। भिडे का कहना है कि जिन प्लॉटों पर झोपड़पट्टी है ही नहीं, वहां भी SRA की तरफ से झोपड़पट्टी पुनर्वसन वाली छूट दी जा रही है।
इसी आपत्ति के आधार पर भिडे ने मांग की है कि SRA से विशेष नियोजन प्राधिकरण के अधिकार वापस ले लिए जाएं और नियम 33(11) के तहत आने वाले प्रस्ताव दोबारा मुंबई महापालिका के पास भेजे जाएं।
पत्र में बताया गया है कि बिना झोपड़पट्टी वाले प्लॉटों के 300 से ज्यादा विकास प्रस्ताव अभी SRA के पास पेंडिंग हैं। भिडे के मुताबिक नियम 33(11) में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है, फिर भी SRA नियम 33(10) की छूट दे रही है, जो झोपड़पट्टी पुनर्वसन के लिए बनी है। पत्र में यह भी कहा गया है कि बिना झोपड़पट्टी वाले प्लॉटों को झोपड़पट्टी वाले प्लॉटों के साथ जोड़कर दोनों पर एक जैसे नियम और छूट लागू की जा रही हैं। इस वजह से आम शहरी विकास नियमों के मुकाबले कम कड़े पैमानों पर इमारतें बनाने की इजाजत मिल रही है।
बांद्रा से दहिसर तक के प्रस्तावों पर भी पत्र में आपत्ति दर्ज है। आरोप है कि एक इलाके की योजना के बदले दूसरे दूर के इलाके में PTC फ्लैट दिए जा रहे हैं। भिडे ने यह भी लिखा है कि बिल्डर प्रस्ताव महापालिका की जगह SRA के पास जमा कर रहे हैं, जिससे मुंबई महापालिका और राज्य सरकार की आमदनी पर असर पड़ रहा है। बांद्रा, जुहू, वरली और मालाबार हिल जैसे महंगे इलाकों के बिना झोपड़पट्टी वाले प्लॉटों के प्रस्ताव भी महापालिका की बजाय SRA के पास जा रहे हैं।
भिडे ने नगर विकास विभाग से दो मांगें की हैं। पहली, महाराष्ट्र प्रादेशिक नियोजन व नगर रचना अधिनियम 1966 की धारा 154 के तहत 15 अक्टूबर 2024 को जारी मार्गदर्शक सूचनाओं पर SRA से सख्ती से अमल करवाया जाए, और नियम 33(10) की छूट नियम 33(11) में लागू न की जाए। दूसरी, SRA का विशेष नियोजन प्राधिकरण (Special Planning Authority) का दर्जा हटाया जाए और नियम 33(11) के सभी विकास प्रस्ताव मुंबई महापालिका के दायरे में लाए जाएं।
इस पत्र पर सियासत भी शुरू हो गई है। संजय राऊत ने कहा था कि पत्र में लिखा है कि मुंबई के कुछ बिल्डर गैरकानूनी तरीके से प्रोजेक्ट हासिल कर रहे हैं और उनके नाम भी पत्र में दिए गए हैं। राऊत के मुताबिक सब कुछ मुख्यमंत्री के नाम पर चल रहा है और आयुक्त को बेचैन होकर ऐसा पत्र लिखना पड़े, यह बहुत गंभीर बात है।
इसका जवाब भाजपा के प्रवक्ता नवनाथ बन ने दिया। उन्होंने कहा कि बिल्डरों को बचाने का इतिहास उद्धव ठाकरे का है और संजय राऊत को राई का पहाड़ बनाने की आदत है। बन ने सवाल किया कि उस पत्र में किस बिल्डर का नाम है। उनका कहना था कि जिनका इतिहास मराठी लोगों को बेघर करने का है, वे बिल्डरों और लोगों के घरों के बारे में न बोलें।
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