शुक्रवार, 6 नवंबर 2026

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सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद BMC की मुख्य विधि अधिकारी कोमल पंजाबी जबरन छुट्टी पर भेजी गईं

सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद BMC की मुख्य विधि अधिकारी कोमल पंजाबी जबरन छुट्टी पर भेजी गईं तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 शहर डेस्क

अतिक्रमण और अदालती मामलों में लापरवाही पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद मुंबई महानगरपालिका ने विधि विभाग की मुख्य कानून अधिकारी को छुट्टी पर भेजा और उनका काम संयुक्त कानून अधिकारी सुखश्री मोडले को सौंपा।

मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने अपने विधि विभाग की मुख्य कानून अधिकारी एड. कोमल राजेश पंजाबी को तुरंत प्रभाव से जबरन छुट्टी पर भेज दिया है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट की उस सख्त टिप्पणी के बाद उठाया गया है, जो अतिक्रमण और अदालती मामलों में लापरवाही को लेकर महानगरपालिका और पालिका आयुक्त अश्विनी भिडे के खिलाफ की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों में BMC और आयुक्त अश्विनी भिडे को कड़े शब्दों में फटकारा था। इसके बाद पालिका प्रशासन एकदम हरकत में आ गया। बताया गया है कि बोरिवली इलाके के अतिक्रमण और मिया खान के मामले समेत कुछ और अहम अदालती केसों में विधि विभाग महानगरपालिका का पक्ष ठीक से नहीं रख पाया था।

कोमल पंजाबी के पास जो भी कामकाज था, उसका अतिरिक्त जिम्मा अब संयुक्त कानून अधिकारी सुखश्री मिलिंद मोडले को दिया गया है। महानगरपालिका के सामान्य प्रशासन विभाग ने इस बारे में 6 नवंबर 2026 को आधिकारिक आदेश जारी किया। आदेश के मुताबिक अगला आदेश आने तक सुखश्री मोडले अपने मूल पद के साथ मुख्य कानून अधिकारी का अतिरिक्त कार्यभार भी संभालेंगी।

सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद पालिका में कई चीजें तेजी से हुईं। उपमहापौर संजय घाडी और पालिका की विधि समिति की एक आपात बैठक हुई। उसमें विधि विभाग के कामकाज पर भारी नाराजगी जताई गई। बोरिवली अतिक्रमण मामले में विधि विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस भी थमाया गया। इसके बाद प्रशासन ने मुख्य कानून अधिकारी कोमल पंजाबी को सीधे जबरन छुट्टी पर भेजने की कार्रवाई की।

कोमल पंजाबी के कामकाज पर सवाल पहले भी उठ चुके थे। सत्ताधारी शिवसेना पार्टी ने उनके काम करने के तरीके पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई थीं। शिवसेना की पार्षद समृद्धी काते ने महानगरपालिका की सभा में आपत्ति का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया था कि "कोमल पंजाबी अदालत में महानगरपालिका का पक्ष ठीक से नहीं रखतीं और मामलों की अधूरी जानकारी देती हैं। साथ ही वे अपनी पसंद के कर्मचारियों को गलत तरीके से तरक्की देकर दूसरे योग्य अधिकारियों के साथ अन्याय कर रही हैं।"

सत्ताधारी पार्टी की इन शिकायतों, विधि समिति की नाराजगी और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों की वजह से प्रशासन को यह सख्त कार्रवाई करनी पड़ी। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद मुख्य विधि अधिकारी को हटाए जाने से मुंबई महानगरपालिका के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में बड़ी हलचल मच गई है।

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