बीएमसी स्कूलों के मिड-डे मील चावल की क्वालिटी पर सवाल, जांच के आदेश
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मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के स्कूलों में मिड-डे मील के चावल की क्वालिटी पर सवाल उठने के बाद अर्बन एजुकेशन कमिटी की चेयरपर्सन राजेश्री शिरवाडकर ने जांच के आदेश दिए हैं।
मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के स्कूलों में मिड-डे मील स्कीम के तहत बच्चों को जो चावल दिया जाता है, उसकी क्वालिटी पर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि ट्रांसपोर्टेशन और डिस्ट्रीब्यूशन के दौरान अच्छी क्वालिटी का चावल हटाकर उसकी जगह खराब क्वालिटी का चावल दिया जा रहा है। अर्बन एजुकेशन कमिटी की चेयरपर्सन राजेश्री शिरवाडकर ने इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
सोमवार को हुई कमिटी की मीटिंग में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पार्टी के मेंबर प्रियांक राउत ने चावल का सैंपल सामने रखा। उन्होंने एक साल पहले भिवंडी में राशन का सामान ले जा रहे एक ट्रक को रोके जाने के मामले में दर्ज FIR की कॉपी भी कमिटी को सौंपी। राउत ने मांग की कि इस मामले में कथित गड़बड़ियों की जांच की जाए।
इसी मीटिंग में शिवसेना (UBT) के मेंबर अंकित प्रभु ने मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के स्कूलों में डेंगू और मलेरिया के मरीजों की बढ़ती संख्या का मुद्दा उठाया। उन्होंने मांग की कि स्टूडेंट्स का रेगुलर हेल्थ चेक-अप कराया जाए। साथ ही मच्छरों को पनपने से रोकने के लिए स्कूलों में पानी की टंकियों की जांच हो। प्रभु ने यह भी कहा कि गर्मी से होने वाली बीमारियों से स्टूडेंट्स को बचाने के लिए ज़रूरी हेल्थ उपाय किए जाएं।
कांग्रेस पार्षद कमर जहां सिद्दीकी ने मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के किंडरगार्टन पर बढ़ते खर्च को लेकर सवाल किए। उन्होंने कहा कि एडमिनिस्ट्रेशन को बताना चाहिए कि इन किंडरगार्टन पर खर्च हुए फंड का इस्तेमाल कैसे किया जाता है।
सिद्दीकी के पेश किए आंकड़ों के मुताबिक फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में किंडरगार्टन पर 14.50 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए बजट का प्रोविजन बढ़ाकर 18.46 करोड़ रुपये कर दिया गया, यानी 27.35 परसेंट की बढ़ोतरी। उन्होंने मांग की कि 2025-26 में हुए असल खर्च की डिटेल्स जमा कराई जाएं।
इसके अलावा सिद्दीकी ने वार्ड के हिसाब से चल रहे किंडरगार्टन की संख्या, रजिस्टर्ड स्टूडेंट्स की संख्या और उनकी अटेंडेंस की जानकारी भी मांगी। उन्होंने पूछा कि किंडरगार्टन का आखिरी फिजिकल इंस्पेक्शन कब हुआ था, स्टूडेंट्स की अटेंडेंस वेरिफाई करने के लिए कौन सा तरीका अपनाया जाता है और क्या ओवरपेमेंट का कोई मामला सामने आया है। उन्होंने यह भी मांग की कि हर वार्ड के किंडरगार्टन की लिस्ट और इंस्पेक्शन रिपोर्ट कमिटी के सामने रखी जाए।
कमिटी की चेयरपर्सन राजेश्री शिरवाडकर ने मामले को सुरक्षित रख लिया है। उन्होंने साफ किया कि उठाए गए मुद्दों की एडमिनिस्ट्रेशन स्टडी करेगा।
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