आईआईटी मुंबई ने छात्रों से पूछा, परीक्षा में नकल क्यों करते हैं
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आईआईटी मुंबई ने परीक्षा में नकल की वजहें जानने के लिए छात्रों का सर्वे शुरू किया है। साहिल वाकोडे की आत्महत्या के बाद संस्थान परीक्षा और अनुशासन के नियमों की समीक्षा भी कर रहा है।
आईआईटी मुंबई ने यह समझने के लिए खास सर्वे शुरू किया है कि छात्र परीक्षा में नकल क्यों करते हैं। पढ़ाई का दबाव, अच्छे नंबर लाने की होड़, इंटर्नशिप और कैंपस प्लेसमेंट की फिक्र, और नकल पर मिलने वाली सजा, इन सबका छात्रों के फैसलों पर क्या असर पड़ता है, इसी की पड़ताल इस सर्वे में की जाएगी।
माना जा रहा है कि यह सर्वे उसी समीक्षा का हिस्सा है, जो संस्थान ने साहिल वाकोडे नाम के छात्र की आत्महत्या के बाद परीक्षा और अनुशासन के नियमों पर शुरू की है।
सर्वे का नाम 'Academic Integrity: Students' Perspective' है। अंडरग्रैजुएट अकैडमिक काउंसिल (UGAC) ने सवालों की शक्ल में यह सर्वे छात्रों को भेजा है। इसमें बहुविकल्पीय और खुले, दोनों तरह के मिलाकर करीब 18 सवाल हैं। साफ कहा गया है कि छात्रों की पहचान गुप्त रखी जाएगी और उनके ई-मेल आईडी भी जमा नहीं किए जाएंगे।
सवालों से यह जानने की कोशिश है कि छात्र नकल करने की बात कब सोचते हैं, उसके पीछे कौन से दबाव होते हैं और क्या कड़ी सजा नकल रोकने में कारगर है। मसलन, फेल होने का डर हो तो क्या आप नकल के बारे में सोचेंगे, क्या अच्छे नंबर का दबाव नकल को सही ठहराने की ओर ले जाता है, और पढ़ाई में प्रदर्शन का इंटर्नशिप और प्लेसमेंट पर कितना असर पड़ता है। यह भी पूछा गया है कि पकड़े जाने का डर छात्रों को रोकता है या नहीं, दोस्तों का असर नकल के फैसले पर पड़ता है या नहीं, और जो छात्र नकल नहीं करते, उन्हें अपनी तैयारी पर भरोसा रोकता है या कार्रवाई का डर। एक सवाल यह भी है कि कड़ी सजा से ज्यादा परीक्षा में सख्त निगरानी और सुरक्षा कारगर है या नहीं, और बहुत कड़ी सजा हो तो क्या छात्र गलती मानने या मदद मांगने से डरते हैं। आखिर में पूछा गया है कि कड़ी सुरक्षा के चलते ईमानदार छात्रों को भी क्या शक के घेरे में होने जैसा लगता है।
जुलाई 2026 में मंजूर हुए सख्त परीक्षा नियमों को लेकर संस्थान में पहले ही विवाद हो चुका है। इन नियमों के मुताबिक परीक्षा हॉल में मोबाइल फोन मिलने पर छात्र को FR (Fail and Repeat) ग्रेड देने और एक सत्र के लिए निलंबित करने का प्रावधान था। नियमों की आलोचना हुई तो सीनेट की विशेष बैठक में कड़ी सजा वाले प्रावधानों को फिलहाल रोक दिया गया।
नियमों की समीक्षा के लिए बनी समिति ने अंतरिम रिपोर्ट सौंपी है। उसमें परीक्षा की गड़बड़ियां दर्ज करने की एक जैसी प्रक्रिया, छात्रों की बात सुनने और उन्हें मदद दिलाने के लिए क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) हेल्पलाइन शुरू करने की सिफारिश की गई है।
आईआईटी मुंबई में बीटेक दूसरे साल के छात्र साहिल वाकोडे की 18 सितंबर को आत्महत्या से मौत हुई थी। आरोप है कि मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन इस्तेमाल करते पकड़े जाने के कुछ घंटों बाद उन्होंने जान दे दी। संस्थान का कहना था कि साहिल ने प्रश्नपत्र ChatGPT पर अपलोड करके जवाब पाने की कोशिश की थी। संस्थान ने यह भी साफ किया था कि उन पर कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं हुई थी और उन्हें काउंसलिंग दी गई थी।
दूसरी ओर साहिल के माता-पिता ने संस्थान में जातिगत भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया है। इस मामले में प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में मामला दर्ज हुआ है।
घटना के बाद छात्रों ने कैंपस में आंदोलन किया। फिर आईआईटी मुंबई के निदेशक प्रो. शिरीष केदारे ने परीक्षा नियमों और अनुशासन की प्रक्रिया की समीक्षा के लिए आठ सदस्यों की समिति बनाई, जिसमें चार प्रोफेसर और चार छात्र हैं।
समिति ने अंतरिम रिपोर्ट में सिफारिश की है कि परीक्षा में गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई की प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी हो। इसके तहत निरीक्षक गड़बड़ी को तुरंत रोकें, संबंधित सामग्री जब्त करें और पूरी घटना दर्ज करें। छात्र को अपनी बात रखने का मौका भी दिया जाए। निरीक्षक और छात्र के बयान और मौजूद सबूत एक जैसे तरीके से दर्ज हों। छात्र के परीक्षा हॉल छोड़ने के बाद निरीक्षक QRT हेल्पलाइन से संपर्क करें, ताकि जरूरी मदद मिल सके।
ये सिफारिशें अभी अंतिम नहीं हैं और सीनेट में इन पर चर्चा चल रही है। इस बीच नए सर्वे के जरिए आईआईटी मुंबई छात्रों की सोच समझकर नकल रोकने के लिए ज्यादा न्यायसंगत और कारगर नियम बनाना चाहता है।
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