भांडुप जलशुद्धीकरण केंद्र का 36.83 करोड़ का ठेका मिठी घोटाले से कथित जुड़ी कंपनी को
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मुंबई महापालिका की स्थायी समिति में बुधवार को वर्गो स्पेशलिटीज को मिले ठेके पर सवाल उठे, फिर भी प्रस्ताव मंजूर हो गया।
मुंबई को पानी देने वाले भांडुप संकुल के जलशुद्धीकरण केंद्र की मरम्मत का 36.83 करोड़ रुपये का ठेका एक ऐसी कंपनी को दिया गया है, जिसका मिठी नदी गाद सफाई घोटाले से कथित संबंध बताया जा रहा है। कंपनी का नाम वर्गो स्पेशलिटीज प्राइवेट लिमिटेड है। उसे चुने जाने पर बुधवार को मुंबई महापालिका की स्थायी समिति में सवाल खड़े किए गए।
भांडुप का यह जलशुद्धीकरण केंद्र 900 MLD यानी 900 दशलक्ष लीटर रोज़ की क्षमता वाला है। कंपनी को इसके खराब हो चुके हिस्से बदलने का काम सौंपा जाना है। विवाद इसलिए खड़ा हुआ कि कंपनी के पूर्व संचालक और बहुसंख्य हिस्सेदार जयेश जोशी का नाम मिठी नदी गाद सफाई घोटाले की जांच में सामने आया था।
यह जांच आर्थिक अपराध शाखा ने की थी। मामला 2021-22 और 2022-23 के वित्त वर्षों में मुंबई महापालिका के दिए गाद सफाई के ठेकों में कथित गड़बड़ी का है। बताया गया है कि जयेश जोशी को मई 2025 में गिरफ्तार किया गया था। इसी वजह से सवाल उठा कि ऐसी कंपनी भांडुप के ठेके के लिए पात्र कैसे मानी गई।
अतिरिक्त महापालिका आयुक्त (प्रकल्प) अभिजीत बांगर ने बताया कि कंपनी को निविदा में हिस्सा लेने की इजाज़त क्यों दी गई। उनके मुताबिक इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें से एक वर्गो कंपनी से जुड़ा संचालक था। जब पता चला कि कंपनी भांडुप की निविदा में भाग ले रही है, तो मामला महापालिका के वरिष्ठ कानूनी सलाहकारों के पास भेजा गया।
प्रशासन का कहना है कि प्रथमदृष्टया मामला कंपनी के खिलाफ नहीं, बल्कि उस व्यक्ति के खिलाफ दर्ज हुआ था। अगर वह व्यक्ति अब कंपनी से जुड़ा नहीं है, तो सिर्फ इसी आधार पर कंपनी को अपात्र नहीं ठहराया जा सकता। बांगर ने यह भी कहा कि आगे चलकर कोई इस फैसले को अदालत में चुनौती न दे, इसलिए कानूनी सलाह ली गई थी।
इस प्रोजेक्ट के लिए दो कंपनियों ने निविदा भरी थी, वर्गो स्पेशलिटीज और सुएज़ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड। GST छोड़कर वर्गो का भाव 28.38 करोड़ रुपये था, जबकि सुएज़ इंडिया का 31.59 करोड़ रुपये।
निविदा जमा करने की आखिरी तारीख 21 जनवरी 2026 थी। दोनों कंपनियों की तकनीकी निविदाएं पात्र पाई गईं। इसके बाद 21 अप्रैल को आर्थिक निविदाएं खोली गईं। वर्गो का भाव सुएज़ इंडिया से कम निकला, इसलिए महापालिका के जल अभियांत्रिकी विभाग ने उसी को ठेका देने की सिफारिश की। विभाग ने यह भी लिखा कि कंपनी ने महापालिका की शर्तें पूरी की हैं, उसे दूसरे नागरी विभागों के लिए ऐसे काम करने का अनुभव है और उसके भाव मौजूदा बाज़ार भाव के हिसाब से ठीक हैं।
योजना के मुताबिक भांडुप जलशुद्धीकरण केंद्र के छह क्लैरिफायर टैंकों की मरम्मत बारिश का मौसम छोड़कर 24 महीनों में पूरी करनी है। हर टैंक का काम अलग-अलग होगा और काम खत्म होने के बाद तीन साल की दोष दायित्व अवधि (Defect Liability Period) रहेगी।
बुधवार को स्थायी समिति ने यह प्रस्ताव मंजूर कर दिया। अब मिठी नदी घोटाले से कथित संबंध वाली कंपनी को मुंबई के इस अहम जलशुद्धीकरण प्रोजेक्ट का ठेका देने के फैसले पर सबकी नज़र महापालिका प्रशासन की भूमिका पर टिकी है।
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