यूपीएससी की तैयारी: ऐसे नोट्स बनाइए कि रिवीजन आसान हो जाए
यूपीएससी सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी में नोट्स कैसे बनाएं, ताकि कम वक्त में पूरा विषय दोबारा पढ़ा जा सके।
यूपीएससी सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी में किताबें और स्टडी मटेरियल पढ़ना जितना जरूरी है, सही नोट्स बनाना भी उतना ही जरूरी है। परीक्षा नजदीक आती है तो पूरा सिलेबस दोबारा पढ़ने का वक्त नहीं मिलता। तब यही नोट्स सबसे ज्यादा काम आते हैं। लेकिन नोट्स अगर बहुत लंबे हों, इधर-उधर बिखरे हों और बिना किसी तरीके के बने हों, तो रिवीजन आसान होने के बजाय और मुश्किल हो सकता है। इसलिए ऐसे नोट्स बनाइए, जिन्हें जरूरत पड़ने पर कुछ ही घंटों में दोबारा पढ़ा जा सके।
सबसे पहले यह तय कीजिए कि क्या लिखना है। नोट्स बनाते वक्त हर लाइन लिखने की जरूरत नहीं होती। किताब या लेख में जो जानकारी पहले से मौजूद है, उसे जस की तस नोट्स में उतारने से बचिए। पहले समझिए कि यूपीएससी के लिए कौन सी जानकारी अहम है और कौन सी सिर्फ आम जानकारी है। अहम फैक्ट्स, आंकड़े, कारण, असर, उदाहरण, सरकारी योजनाएं, रिपोर्ट और किसी मुद्दे के अलग-अलग पहलू नोट्स में जरूर रखिए।
एक विषय के नोट्स एक ही जगह रखिए। तैयारी में एक ही विषय को कई जगह से पढ़ना पड़ सकता है। ऐसे में सबसे बड़ी गलती यह होती है कि विद्यार्थी उसी विषय की जानकारी अलग-अलग नोटबुक या फाइल में लिखते रहते हैं। इससे रिवीजन के वक्त जानकारी ढूंढने में वक्त जाया होता है। कोशिश कीजिए कि किसी विषय के सारे अहम पॉइंट एक ही जगह जुड़ते जाएं। बाद में नई जानकारी मिले तो पुराने नोट्स दोबारा लिखने के बजाय उसी जगह पर जोड़ दीजिए।
नोट्स छोटे और पॉइंट के हिसाब से रखिए। यूपीएससी के नोट्स का मकसद किताब को दोबारा लिखना नहीं है। इसलिए लंबे पैराग्राफ के बजाय छोटे पॉइंट, कीवर्ड और छोटे वाक्य इस्तेमाल कीजिए। मिसाल के तौर पर किसी योजना के नोट्स बना रहे हों, तो उसका मकसद, शुरू होने का साल, संबंधित मंत्रालय, लाभार्थी और मुख्य खासियतें अलग-अलग पॉइंट में लिख सकते हैं। इससे रिवीजन में पूरा विषय जल्दी समझ आ जाता है।
करंट अफेयर्स को अलग से रटने के बजाय स्टैटिक विषयों के साथ जोड़ना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है। जैसे किसी खबर का ताल्लुक पर्यावरण से हो, तो उसके नोट्स में पर्यावरण से जुड़ी संबंधित अवधारणाएं भी जोड़ सकते हैं। इसी तरह कोई नई सरकारी योजना पढ़ते वक्त उससे जुड़ा संविधान, अर्थव्यवस्था या सामाजिक मुद्दा भी नोट्स में जोड़ा जा सकता है।
हर विषय में उदाहरण जरूर जोड़िए। सिर्फ फैक्ट्स लिखकर रखने के बजाय उनके साथ अच्छे और छोटे उदाहरण रखिए। किसी सामाजिक मुद्दे, सरकारी योजना या पर्यावरण से जुड़े विषय में कोई असली घटना, रिपोर्ट या केस स्टडी हो, तो उसे एक-दो लाइन में लिख लीजिए। मेन्स का जवाब लिखते वक्त ऐसे उदाहरण आपके जवाब को ज्यादा असरदार बना सकते हैं।
प्रीलिम्स और मेन्स के नोट्स अलग तरीके से बनाइए। प्रीलिम्स के लिए फैक्ट्स, आंकड़े, जगहें, संस्थाएं, योजनाएं और अहम टर्म्स ज्यादा मायने रखते हैं। वहीं मेन्स के लिए किसी मुद्दे के कारण, असर, चुनौतियां, सरकारी कदम और आगे का रास्ता ज्यादा अहम होता है। इसलिए नोट्स बनाते वक्त साफ रखिए कि कौन सा पॉइंट प्रीलिम्स के लिए है और कौन सा मेन्स के लिए।
नोट्स में खाली जगह भी छोड़िए। यूपीएससी की तैयारी कई महीने और कभी-कभी सालों तक चलती है। इस दौरान पुराने विषय से जुड़ी नई जानकारी मिल सकती है। इसलिए हर टॉपिक के बीच थोड़ी जगह छोड़िए या डिजिटल नोट्स में बाद में जानकारी जोड़ने की सहूलियत रखिए। इससे हर बार नए नोट्स बनाने की जरूरत नहीं पड़ती।
सबसे जरूरी बात यह है कि नोट्स रिवीजन के लिए आसान हों। अच्छे नोट्स की पहचान इससे नहीं होती कि वे कितने लंबे हैं, बल्कि इससे होती है कि पूरा विषय कितनी जल्दी दोबारा याद आ जाता है। नोट्स तैयार होने के बाद हर रिवीजन के साथ उन्हें और छोटा और बेहतर बनाने की कोशिश कीजिए। आखिर में नोट्स ऐसे हों कि परीक्षा से पहले कम वक्त में पढ़कर पूरे विषय के मुख्य मुद्दे याद रखे जा सकें।