मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:21 IST

यूपीएससी के सौ साल पूरे, भारत मंडपम में मोदी बोले: भर्ती में नेशन फर्स्ट और सिटीजन फर्स्ट

दिल्ली के भारत मंडपम में यूपीएससी की स्थापना के 100 साल पूरे होने पर शताब्दी समारोह हुआ, जिसमें पंतप्रधान नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि थे।

यूपीएससी के सौ साल पूरे, भारत मंडपम में मोदी बोले: भर्ती में नेशन फर्स्ट और सिटीजन फर्स्ट
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) को बने 100 साल पूरे हो गए हैं। इसी मौके पर दिल्ली के भारत मंडपम में शताब्दी समारोह रखा गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थे। उन्होंने लोक सेवा आयोगों से जुड़े 100 ऐतिहासिक फैसलों पर बनी एक किताब का विमोचन किया। इसके साथ ही शताब्दी का स्मारक सिक्का और एक खास डाक टिकट भी जारी किया गया।

आंकड़ों की बात करें तो 2025 में UPSC की तरफ से कराई गई परीक्षाओं में 10 से 12 लाख विद्यार्थी शामिल हुए थे। इनमें से 9 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों ने सिविल सर्विस परीक्षा के लिए अर्जी भरी थी।

मोदी ने बताया कि 1952 में यूपीएससी की परीक्षा में महिलाओं की हिस्सेदारी सिर्फ 3 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 30 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि यूपीएससी के इतिहास में अब तक चार महिलाएं अध्यक्ष बनी हैं, और इनमें से तीन 2014 के बाद बनीं। उनके मुताबिक ये सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, ये दिखाते हैं कि मौके कितने बढ़े हैं।

प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि 1926 में जब इस संस्था की नींव रखी गई थी, तब इसका इंतजाम अलग था। देश आजाद हुआ तो यूपीएससी ने आजाद भारत के सपनों और व्यवस्था को सामने रखकर अपनी जिम्मेदारियां अच्छे से निभाईं। अब भारत का भविष्य सामने है, क्योंकि 21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है और अगले 25 साल लोगों और संस्थाओं, दोनों के लिए बहुत खास हैं।

मोदी ने कहा कि विकसित भारत के लिए जैसे प्रशासन की जरूरत है, उसका एक बड़ा जरिया यूपीएससी और राज्यों के सिलेक्शन कमीशन हैं। आज जिन नौजवानों की भर्ती हो रही है, वे विकसित भारत में अहम रोल निभाएंगे। इसके लिए दो बातें हमेशा याद रखनी होंगी: पहली कसौटी है "नेशन फर्स्ट" यानी राष्ट्र पहले, और दूसरी है "सिटीजन फर्स्ट" यानी नागरिक पहले। हर चयन प्रक्रिया इन्हीं पैमानों पर होती है, और इस भावना वाले उम्मीदवार चुने गए तो राष्ट्रीय लक्ष्य पूरे करना आसान होगा।

एआई (AI) के दौर का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जब एआई पल पल कुछ कागजात जांच सकता है, तब नागरिक भी फौरन समाधान चाहते हैं। सिलेक्शन के पैरामीटर और रिक्रूटमेंट प्रक्रिया पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे नौजवानों को सार्वजनिक सेवा में लाना होगा जो किसी सरकारी दफ्तर के लिए नहीं, बल्कि "पब्लिक सर्विस" यानी लोकसेवा करने के लिए खिंचे हों। उम्मीदवार को कितनी जानकारी है, यह देखना जरूरी है, लेकिन यह जानना भी उतना ही जरूरी है कि वह सिविल सर्विस में क्यों आना चाहता है। उन्होंने बदलती आकांक्षाओं के हिसाब से चयन प्रक्रिया को देखने की जरूरत बताई।

यूपीएससी का शताब्दी समारोह 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को हो रहा है। पहले दिन भारत मंडपम में "शताब्दी समारोह, मंथन" कार्यक्रम हुआ। इसमें देश भर के राज्य लोक सेवा आयोगों के अध्यक्ष, सदस्य, वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षाविद और यूपीएससी के अधिकारी शामिल हुए।

यूपीएससी एक संवैधानिक संस्था है और इसका प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 315 में किया गया है। परीक्षा के सवाल विशेषज्ञों की मदद से तैयार होते हैं। उत्तर पुस्तिका में कोडिंग की व्यवस्था रहती है, ताकि जांचने वाले परीक्षक को उम्मीदवार का नाम और रोल नंबर पता न चले। इंटरव्यू के दौरान भी उम्मीदवार की निजी जानकारी सीमित रखी जाती है।

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