विद्याधर जोशी बोले, स्पॉन्सरशिप और राजनेताओं के प्रायोजन से गणेशोत्सव की मिट्टी पलीद हो गई
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मराठी सिनेमा के वरिष्ठ अभिनेता विद्याधर जोशी ने गणेशोत्सव के बदलते स्वरूप पर खुलकर अपनी राय रखी है। उन्होंने साफ कहा कि जब से त्योहारों में स्पॉन्सरशिप शुरू हुई, तब से गणेशोत्सव की मिट्टी हो गई है।
पिछले कुछ सालों से गणेशोत्सव के बदलते रूप पर लगातार चर्चा हो रही है। सार्वजनिक गणेश मंडलों की भली मोटी यानी बहुत बड़ी मूर्तियां, तरह-तरह की आकर्षक सजावट, ध्वनि प्रदूषण और बढ़ती इवेंटबाजी को लेकर कई लोगों ने नाराजगी जताई है। इस बार के गणेशोत्सव के दौरान कुछ जगहों पर गणेश मूर्तियों के गिरने की घटनाएं भी सामने आईं। इससे सार्वजनिक गणेशोत्सव के बदलते तौर-तरीकों पर एक बार फिर सवाल उठे हैं।
कई लोगों को इस बात का भी दुख है कि त्योहारों में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण और इवेंटबाजी से उनकी पवित्रता कम हो रही है। कला जगत के कई कलाकार पहले भी इस पर बोल चुके हैं। अब मराठी सिनेमा के वरिष्ठ अभिनेता विद्याधर जोशी ने भी इस पर बेबाक राय दी है।
हाल ही में 'आरपार' को दिए इंटरव्यू में जोशी ने गणेशोत्सव में आए बदलावों पर बात की। उन्होंने चिंता जताई और कुछ बातों की कड़े शब्दों में आलोचना भी की। जोशी ने कहा, "सच कहूं तो त्योहारों में जब से स्पॉन्सरशिप शुरू हुई, खासकर जब से राजनेताओं ने प्रायोजन देना शुरू किया, तब से गणेशोत्सव की मिट्टी हो गई है।"
अपने बचपन के गणेशोत्सव को याद करते हुए उन्होंने पहले चंदा जुटाने का तरीका भी बताया। जोशी के मुताबिक, "हम छोटे थे तो दो रुपये, पांच रुपये, ग्यारह रुपये या पच्चीस रुपये से घर-घर जाकर चंदा इकट्ठा करते थे। उत्सव खत्म होने के बाद जिनसे चंदा लिया था, उनके पास जाकर बाकायदा छपा हुआ हिसाब देते थे।"
जोशी ने कहा कि गणेशोत्सव में व्यावसायिक प्रायोजन आने के बाद उत्सव का स्वरूप काफी बदल गया। इसी दौरान उन्होंने राजनेताओं से मिलने वाले प्रायोजन पर भी नाराजगी जताई।
उन्होंने कहा, "गणपति चाल में था या मैदान में, इससे ज्यादा अहमियत अब अलग-अलग कंपनियों से और सबसे घटिया बात यह कि राजनेताओं से मिलने वाली स्पॉन्सरशिप को मिल गई है। राजनेताओं का यह प्रायोजन शुरू हुआ, तभी से गणेशोत्सव की मिट्टी हो गई।" इन शब्दों में जोशी ने अपनी नाराजगी और गुस्सा जाहिर किया।
गणेशोत्सव के बदलते स्वरूप पर विद्याधर जोशी की यह बेबाक टिप्पणी इन दिनों चर्चा में है।