मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:00 IST

वेंटिलेटर, सीटी स्कैन जैसे मेडिकल इक्विपमेंट के दाम पर लगेगी लगाम, MDR के बाद अब TMR

सरकार अब TMR यानी ट्रेड मार्जिन रैशनलाइजेशन पर विचार कर रही है, ताकि मेडिकल उपकरणों की खरीद कीमत और मरीज से लिए जाने वाले चार्ज के बीच का बड़ा फासला कम हो सके।

वेंटिलेटर, सीटी स्कैन जैसे मेडिकल इक्विपमेंट के दाम पर लगेगी लगाम, MDR के बाद अब TMR
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

घर के किसी सदस्य को अस्पताल में एडमिट करना पड़े और डिस्चार्ज के वक्त बिल हाथ में आए, तो अक्सर आंकड़े देखकर होश उड़ जाते हैं। इलाज के दौरान दवाइयों के अलावा कई तरह का मेडिकल सामान भी इस्तेमाल होता है, जिसकी वजह से बिल में काफी बढ़ोतरी दिखती है। लेकिन क्या कभी सोचा है कि कोई मेडिकल उपकरण अस्पताल कितने में खरीदता है और मरीज से उसके लिए कितना चार्ज लिया जाता है?

दरअसल जब मेडिकल उपकरणों की खरीद कीमत और मरीजों से वसूली जाने वाली रकम में बड़ा फर्क सामने आया, तब यह बहस और तेज हो गई। इसी के चलते TMR यानी ट्रेड मार्जिन रैशनलाइजेशन पर चर्चा शुरू हुई है। बहुत लोगों को शायद यह पता ही न हो कि TMR क्या चीज है, तो पहले यही समझ लेते हैं।

TMR के तहत एक ऐसी प्राइसिंग व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है, जिसका मकसद मेडिकल उपकरण की खरीद कीमत और मरीज से लिए जाने वाले चार्ज के बीच का बड़ा गैप कम करना है। मान लीजिए किसी अस्पताल को कोई मेडिकल उपकरण 100 रुपए में मिलता है और वह मरीज से उसके 400 रुपए चार्ज करता है, तो TMR का फोकस इस अंतर को कम करने पर है। इस पर अभी बातचीत जारी है।

यह ध्यान देने वाली बात है कि महाराष्ट्र FDA की जांच में कुछ चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। इस जांच में सामने आया कि कुछ मेडिकल उपकरणों की खरीद कीमत और MRP में बहुत बड़ा फर्क है।

सवाल यह है कि सरकार मेडिकल उपकरणों पर कितना मार्जिन फिक्स करेगी? सरकार का मार्जिन अभी तय नहीं हुआ है, इस पर अभी भी बातचीत चल रही है।

सर्वे में यह भी सामने आया कि मेडिकल प्रोडक्ट्स पर 150 फीसदी से लेकर 2,841 फीसदी तक मुनाफा कमाया जा रहा है। अस्पताल ने एक कैथेटर 29.41 रुपए में खरीदा और मरीज से उसके 310 रुपए वसूले गए। अस्पताल ने एक सिरिंज 6.75 रुपए में खरीदी और मरीज से उसके 57.20 रुपए लिए गए। अस्पताल ने एक नेब्युलाइजर या ऑक्सीजन मास्क 40 से 45 रुपए में खरीदा और मरीज से उसके 650 से 715 रुपए तक चार्ज किए गए। अस्पताल ने एक IV इन्फ्यूजन सेट 11.05 रुपए में खरीदा और मरीज से उसके 325 रुपए वसूले गए।

अस्पतालों का कहना साफ है कि किसी भी मेडिकल सामान की खरीद कीमत और मरीज से ली जाने वाली रकम के फर्क से उन्हें मुनाफा नहीं होता। उनका यह भी कहना है कि उन्हें कई और जरूरी खर्चों का हिसाब भी रखना पड़ता है।

TMR का मतलब यही है कि मेडिकल सामान की खरीद कीमत और मरीजों से लिए जाने वाले चार्ज के बीच का फासला कम किया जाए। इसका मतलब यह है कि अस्पताल को सप्लाई मिलने वाले सामान की कीमत क्या है और अभी अस्पताल मरीजों से उसके लिए कितना चार्ज ले रहा है, इस पर गौर किया जाएगा।

अस्पतालों का कहना है कि मेडिकल प्रोडक्ट्स की MRP उसे बनाने वाली कंपनी तय करती है। इसके अलावा अस्पताल को मशीनरी, सफाई, मरीजों की सुरक्षा, इमरजेंसी सर्विस और स्टाफ से जुड़े खर्च भी उठाने पड़ते हैं।

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