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19:53 IST

वैशालीनगर के उद्यान में कथित अतिक्रमण पर हाईकोर्ट ने कहा, कानून के हिसाब से फैसला लें

मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने जिलाधिकारी और नागपुर महानगरपालिका आयुक्त को याचिकाकर्ता की शिकायतों पर नियमानुसार निर्णय लेने को कहा।

वैशालीनगर के उद्यान में कथित अतिक्रमण पर हाईकोर्ट ने कहा, कानून के हिसाब से फैसला लें तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

नागपुर: उत्तर नागपुर के वैशालीनगर में 1966 से मौजूद सार्वजनिक उद्यान में कथित अतिक्रमण का मामला मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ पहुंचा था। खंडपीठ ने जिलाधिकारी, नागपुर और आयुक्त, नागपुर महानगरपालिका को निर्देश दिया है कि इस अतिक्रमण पर वे कानून के दायरे में रहकर फैसला लें।

न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति रजनीश व्यास की खंडपीठ ने सोमवार को जनहित याचिका पर सुनवाई की। सुनवाई के बाद खंडपीठ ने यह आदेश दिया और याचिका का निपटारा कर दिया।

याचिका वरिष्ठ नागरिक मुरलीधर सहारे ने दायर की है। उनका कहना है कि नागरिक को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी के मंजूर ले-आउट में यह भूखंड सार्वजनिक उद्यान के लिए आरक्षित है। याचिका के मुताबिक पिछले करीब 58 वर्षों से यह उद्यान आसपास के लोगों के लिए सुबह-शाम टहलने की जगह है और बच्चों के खेलने का एकमात्र सार्वजनिक स्थान है।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता संजय करमरकर ने खंडपीठ के सामने कई आरोप रखे। उनके मुताबिक स्थानीय जनप्रतिनिधियों की विकास निधि का दुरुपयोग करके उद्यान के बीच में दीवार खड़ी की जा रही है और उसे दो हिस्सों में बांटा जा रहा है।

आरोप यह भी है कि उद्यान के उत्तरी हिस्से में बुद्ध विहार और दक्षिणी हिस्से में मंदिर के नाम पर बिना किसी वैधानिक अनुमति के पक्का निर्माण किया जा रहा है। याचिका में कहा गया कि यह पूरा निर्माण महाराष्ट्र प्रादेशिक एवं नगर नियोजन अधिनियम (MRTP Act) के प्रावधानों का उल्लंघन है और इससे उद्यान का मूल, प्राकृतिक और सार्वजनिक स्वरूप खत्म हो रहा है।

याचिका में यह भी कहा गया कि नागरिकों ने बार-बार शिकायत की, लेकिन प्रशासन ने न तो मौके का निरीक्षण किया और न ही अतिक्रमण रोकने के लिए कोई कार्रवाई की।

खंडपीठ ने याचिकाकर्ता की शिकायतों का संज्ञान लेते हुए कहा कि सार्वजनिक उद्यान के आरक्षित भूखंड पर किसी भी तरह का निर्माण या अतिक्रमण वैधानिक प्रक्रिया के अधीन ही होना चाहिए।

अदालत ने जिलाधिकारी और महानगरपालिका आयुक्त से कहा कि वे याचिकाकर्ता की शिकायतों पर महाराष्ट्र प्रादेशिक एवं नगर नियोजन अधिनियम और महानगरपालिका के संबंधित नियमों के तहत फैसला लें। यह फैसला मामले के गुण-दोष के आधार पर होना चाहिए, याचिकाकर्ता को सुनवाई का मौका दिया जाए और कार्रवाई कानून के मुताबिक सुनिश्चित की जाए।

इन निर्देशों के साथ ही खंडपीठ ने जनहित याचिका का निपटारा कर दिया।

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