मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:59 IST

ट्रम्प-शी जिनपिंग बैठक में तैवान का मुद्दा फिर छिड़ा, चीन ने अमेरिका को दिया साफ संदेश

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात में तैवान का मुद्दा फिर चर्चा के केंद्र में आ गया।

ट्रम्प-शी जिनपिंग बैठक में तैवान का मुद्दा फिर छिड़ा, चीन ने अमेरिका को दिया साफ संदेश
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई एक अहम बैठक में तैवान का मुद्दा एक बार फिर उठा। अमेरिका और चीन के बीच व्यापार, टेक्नोलॉजी और अंतरराष्ट्रीय रिश्तों पर बातचीत चल रही थी, उसी दौरान चीन ने तैवान को लेकर अपना रुख साफ कर दिया। शी जिनपिंग ने ट्रम्प को यह संदेश दिया कि अमेरिका को तैवान की आजादी के खिलाफ भूमिका लेनी चाहिए।

शी जिनपिंग ने बैठक में यह भी साफ किया कि तैवान का मसला चीन की राष्ट्रीय सार्वभौमता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़ा हुआ है। चीन की भूमिका के मुताबिक तैवान चीन का ही हिस्सा है, और उसका आखिरी एकीकरण बीजिंग की नीति का एक बड़ा मुद्दा है। इसीलिए चीन चाहता है कि अमेरिका न तो तैवान की आजादी को सपोर्ट करे, और न ही उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाए।

अमेरिका और चीन के बीच तैवान के मसले पर पहले भी कई बार मतभेद हो चुके हैं। तैवान अपनी सरकार, चुनाव व्यवस्था और प्रशासन खुद चलाता है, लेकिन चीन उस पर अपना दावा लगातार बनाए रखता है। यही वजह है कि तैवान का मुद्दा दोनों महाशक्तियों के बीच सबसे संवेदनशील विषयों में गिना जाता है।

ट्रम्प और जिनपिंग की इस बैठक के बाद अब सबकी नजर इस पर है कि तैवान को लेकर अमेरिका की असल भूमिका क्या रहने वाली है। अमेरिका के तैवान के साथ औपचारिक राजनयिक रिश्ते भले न हों, लेकिन दोनों देशों के बीच मजबूत अनौपचारिक संबंध हैं। अमेरिका तैवान को सुरक्षा के लिए हथियार भी देता है और उसकी सुरक्षा को अहमियत देता रहा है।

वहीं दूसरी ओर, ट्रम्प प्रशासन चीन के साथ व्यापार और दूसरे अहम मुद्दों पर भी बातचीत कर रहा है, इसलिए तैवान को लेकर अमेरिका के सामने संतुलन बनाए रखने की चुनौती बनी हुई है। इस बैठक में तैवान का मुद्दा उठने से अमेरिका और चीन के रिश्तों में यह संवेदनशील मसला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

तैवान के भविष्य को लेकर अमेरिका और चीन के बीच सालों से तनाव चला आ रहा है। चीन तैवान की आजादी की किसी भी औपचारिक घोषणा का विरोध करता रहा है, जबकि तैवान में चीन के साथ रिश्तों को लेकर अलग-अलग राय है और वहां का प्रशासन अपने फैसले खुद, स्वतंत्र रूप से लेता है।

ट्रम्प और जिनपिंग की मुलाकात में आर्थिक और व्यापार से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ तैवान का सवाल भी अहम बनकर सामने आया है। आगे आने वाले समय में इस मुद्दे पर दोनों देशों का रुख किस तरह आगे बढ़ता है, इस पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी। तैवान का मसला सिर्फ चीन और तैवान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें अमेरिका की एशिया-पैसिफिक नीति का भी एक बड़ा हिस्सा जुड़ा हुआ है।

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