ट्रम्प-शी भेट के दौरान कैपिटॉल के बाहर तिबेट समर्थकों का प्रदर्शन
वॉशिंग्टन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के वक्त कैपिटॉल के पास तिबेट समर्थक कार्यकर्ताओं ने जोरदार नारेबाजी की।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की वॉशिंग्टन में मुलाकात चल रही थी, उसी वक्त अमेरिकी कैपिटॉल के आसपास तिबेट समर्थक कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए। इन कार्यकर्ताओं ने तिबेट में मानवाधिकार, धार्मिक आजादी और वहां मीडिया को ज्यादा पहुंच मिलनी चाहिए, ऐसी मांगें उठाईं। चीन की नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए इन प्रदर्शनकारियों ने तिबेट में जो हालात हैं, उस पर दुनिया भर का ध्यान खींचने की कोशिश की।
शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा के दौरान वॉशिंग्टन में अलग-अलग गुटों ने चीन की नीतियों के विरोध में प्रदर्शन किए। तिबेटी कार्यकर्ता कैपिटॉल के पास जमा होकर तिबेट की आजादी और उसके अधिकारों का मुद्दा उठाते नजर आए। कुछ प्रदर्शनकारियों के हाथों में तिबेट के झंडे और आजादी की मांग वाले पोस्टर थे। इस प्रदर्शन में सिर्फ तिबेट ही नहीं, बल्कि हांगकांग, शिनजियांग और ताइवान से जुड़े मुद्दे उठाने वाले कार्यकर्ता भी शामिल हुए।
तिबेट-नेपाल सीमा पर आई बाढ़ और भूस्खलन के बाद तिबेट के हालात की जानकारी बाहर की दुनिया तक पहुंचने में दिक्कत आ रही है, ऐसा दावा कुछ मानवाधिकार संगठनों और तिबेट समर्थक संस्थाओं ने किया है। आपदा प्रभावित इलाकों में पत्रकारों को घुसने में परेशानी हो रही है, यह भी बताया जा रहा है। इसी वजह से तिबेट में स्वतंत्र पत्रकारों को ज्यादा पहुंच मिलनी चाहिए और आपदा से जूझ रहे लोगों की असली स्थिति दुनिया के सामने आनी चाहिए, यह मांग प्रदर्शनकारियों ने की।
इस बाढ़ की पृष्ठभूमि में तिबेट में सूचना पर जो नियंत्रण है, वह मुद्दा फिर से चर्चा में आ गया है। आपदा के दौरान मरने वालों का आंकड़ा, लापता लोग और राहत कार्य की असली तस्वीर के बारे में साफ-साफ जानकारी मिलनी जरूरी है, यह प्रदर्शनकारियों का कहना है।
प्रदर्शन में शामिल कार्यकर्ताओं ने तिबेट में ज्यादा राजनीतिक और धार्मिक आजादी की मांग रखी। तिबेती संस्कृति, भाषा और पहचान को बचाने के लिए ज्यादा अधिकार मिलने चाहिए, यह रुख प्रदर्शनकारियों ने रखा। दूसरी तरफ चीन सरकार तिबेट को लेकर अपनी नीतियों का बचाव करती आई है और वहां विकास और स्थिरता पर जोर दिया जा रहा है, ऐसा कहती है।
ट्रम्प और शी जिनपिंग की यह मुलाकात आर्थिक और व्यापार से जुड़े मुद्दों के लिहाज से अहम मानी जा रही थी, लेकिन इसी दौरान तिबेट का सवाल भी वॉशिंग्टन की सड़कों पर चर्चा में आ गया। दोनों नेताओं की बैठक की पृष्ठभूमि में हुए इस प्रदर्शन ने चीन की तिबेट नीति की तरफ एक बार फिर दुनिया भर का ध्यान खींचा है।