ट्रम्प प्रशासन को कोर्ट से झटका, CNN समेत तीन मीडिया संस्थानों पर लगा बैन हटा
अमेरिका की एक फेडरल कोर्ट ने व्हाइट हाउस में एंट्री से रोके गए CNN, MS Now और Politico के पत्रकारों के प्रेस पास बहाल करने का आदेश दिया है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनके प्रशासन को एक बड़ी कानूनी लड़ाई में झटका लगा है। अमेरिका की एक फेडरल कोर्ट ने व्हाइट हाउस में एंट्री को लेकर CNN, MS Now और Politico नाम की तीन बड़ी अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थाओं पर लगाई गई पाबंदी को गैरकानूनी और असंवैधानिक करार दिया है। कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन को यह बैन तुरंत हटाने और इन पत्रकारों के व्हाइट हाउस प्रेस पास बहाल करने का आदेश दिया है।
यह पूरा मामला पिछले हफ्ते तब शुरू हुआ जब ट्रम्प प्रशासन ने इन तीन मीडिया संस्थानों के पत्रकारों को व्हाइट हाउस परिसर में घुसने से रोक दिया और उनके ऑफिशियल हार्ड प्रेस बैज रद्द कर दिए। राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस फैसले का बचाव करते हुए आरोप लगाया कि ये मीडिया संस्थान बार-बार फेक न्यूज छापते हैं और उन्हें व्हाइट हाउस से ऐसी जानकारी फैलाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। इसके बाद तीनों मीडिया संस्थानों ने इस फैसले को कोर्ट में चुनौती दे दी।
इस मामले की सुनवाई अमेरिका के जिला न्यायाधीश टिमोथी केली की बेंच के सामने हुई। खास बात यह है कि जज टिमोथी केली को इस पद पर खुद डोनाल्ड ट्रम्प ने ही अपने पहले कार्यकाल में नियुक्त किया था। सुनवाई के दौरान जज केली ने प्रशासन की इस कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने साफ कहा कि इन संस्थाओं के एंट्री पास रद्द करते समय ट्रम्प प्रशासन ने किसी सही कानूनी प्रक्रिया यानी ड्यू प्रोसेस का पालन नहीं किया। प्रशासन ने जल्दबाजी में और एकतरफा तरीके से मीडिया संस्थानों की मान्यता रद्द करने का फैसला लिया था। इसी आधार पर कोर्ट ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया कि लगाई गई पाबंदी पूरी तरह गैरकानूनी है और उसे तुरंत रद्द किया जाए।
पास रद्द होने और व्हाइट हाउस एंट्री रुकने के बाद CNN, MS Now और Politico ने अमेरिकी संविधान की पहली संशोधन यानी फर्स्ट अमेंडमेंट का हवाला देकर ट्रम्प प्रशासन के खिलाफ केस दाखिल किया था। अमेरिकी संविधान नागरिकों और मीडिया को अभिव्यक्ति की आजादी और पत्रकारिता की स्वतंत्रता देता है। मीडिया संस्थानों की तरफ से कोर्ट में पैरवी कर रहे वकील थियोडोर बाउट्रस ने कहा कि प्रशासन की यह कार्रवाई एक तरह का व्यूपॉइंट डिस्क्रिमिनेशन यानी नजरिए के आधार पर भेदभाव है। उनके मुताबिक ट्रम्प प्रशासन उन मीडिया संस्थानों की आवाज दबाने की कोशिश कर रहा है जो उनके खिलाफ या उनकी आलोचना करने वाली खबरें देते हैं। बाउट्रस ने जज से कहा कि जब दुनिया भर के नेता वॉशिंगटन आ रहे हैं और बड़ी घटनाएं हो रही हैं, ऐसे में पत्रकारों को रिपोर्टिंग से रोकना बहुत खतरनाक है, इसलिए उनकी मान्यता तुरंत बहाल की जाए।
दूसरी तरफ अमेरिका के न्याय विभाग ने ट्रम्प प्रशासन के फैसले का बचाव करने की कोशिश की। न्याय विभाग के वकील माइकल वेल्चिक ने सुनवाई में दलील दी कि व्हाइट हाउस में एंट्री किसी का असीमित अधिकार नहीं बल्कि एक विशेषाधिकार है। वेल्चिक ने यह भी कहा कि कम से कम राष्ट्रपति को अपने ओवल ऑफिस में किसे एंट्री देनी है और किसे बाहर रखना है, इसका पूरा निजी अधिकार है। लेकिन कोर्ट ने यह दलील खारिज कर दी और साफ कहा कि पत्रकारिता की आजादी का संवैधानिक हक इससे ज्यादा अहम है।
यह फैसला ट्रम्प प्रशासन और मीडिया के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद में एक बड़ी हार मानी जा रही है। इस फैसले से अमेरिका में न्यूज एजेंसियों की आजादी को मजबूती मिली है और यह संदेश गया है कि कोई भी प्रशासन मनमाने तरीके से पत्रकारों पर बैन नहीं लगा सकता। कोर्ट के इस आदेश के बाद अब पूरी दुनिया की नजर इस पर है कि ट्रम्प प्रशासन इस फैसले के खिलाफ ऊपर की कोर्ट में अपील करता है या पत्रकारों को पहले जैसी एंट्री दे देता है।