मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:51 IST

ट्रम्प पर भड़के तीन अमेरिकी न्यूज चैनल, व्हाइट हाउस एंट्री बैन के बाद कोर्ट पहुंचे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने CNN, MSNBC और POLITICO पर व्हाइट हाउस में एंट्री बैन कर दी, तीनों चैनलों ने कोर्ट में याचिका दाखिल की

ट्रम्प पर भड़के तीन अमेरिकी न्यूज चैनल, व्हाइट हाउस एंट्री बैन के बाद कोर्ट पहुंचे
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

अमेरिका में एक नया विवाद शुरू हो गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 18 सितंबर 2026 को CNN, MSNBC और POLITICO इन तीन टीवी न्यूज चैनलों की व्हाइट हाउस में एंट्री पर बैन लगा दिया। इसके अगले ही दिन, 19 सितंबर 2026 को, इन तीनों चैनलों के एंट्री पास भी असल में रद्द कर दिए गए।

बैन लगाते वक्त ट्रम्प ने कहा कि जिन चैनलों पर बैन लगाया गया है, वे उनके खिलाफ झूठी और गलत खबरें चलाते हैं और उनकी बदनामी करते हैं, इसी वजह से यह बैन लगाया गया है। दूसरी तरफ, बैन किए गए चैनलों ने अपनी सफाई में कहा है कि अमेरिका के संविधान की पहली और सबसे अहम वैल्यू अभिव्यक्ति की आजादी है, और ट्रम्प ने इसी पर चोट पहुंचाई है।

तीनों चैनलों ने अमेरिका की कोर्ट में ट्रम्प के खिलाफ याचिका दाखिल कर दी है। इससे पहले बराक ओबामा जब राष्ट्रपति थे, तब उन्होंने एक पत्रकार पर सिर्फ एक कार्यक्रम के लिए बैन लगाया था। उस वक्त मीडिया और जनता के दबाव में ओबामा को यह बैन वापस लेना पड़ा था।

इससे साफ है कि अमेरिका में पत्रकारिता पर पूरी तरह लगाम लगाना आसान नहीं है। इसके उलट, भारत में विपक्षी नेता अब यह चर्चा करने लगे हैं कि क्या यहां कोई पत्रकार या मीडिया हाउस राजनीतिक नेताओं पर बैन लगाने या कोर्ट में केस लड़ने की हिम्मत रखता है।

अमेरिकी मीडिया पत्रकारिता की वैल्यूज, उसकी क्वालिटी और अपनी असली आवाज की लड़ाई कम से कम अमेरिकी नागरिकों के लिए तो लड़ती ही रहती है। आजाद पत्रकारिता के लिए अमेरिकी लोग जरूरत पड़ने पर सरकार से भी टकरा जाते हैं, ऐसा कई मौकों पर देखने को मिला है। भारत, चीन और पाकिस्तान में जांच पत्रकारिता भले ही मेनस्ट्रीम में ना हो, लेकिन अमेरिका में यह अभी भी मेनस्ट्रीम में बनी हुई है। हालांकि, राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अमेरिका में बढ़ते इजरायली लॉबी के दबदबे की वजह से कैपिटलिज्म से लेकर मीडिया तक इजरायल समर्थक लॉबी काम कर रही है, और उसी विचारधारा की सरकार के लिए काम करने की कोशिश होती रहती है। फिर भी अभी तक अमेरिकी मीडिया पूरी तरह सरकार के कंट्रोल में नहीं आई है।

ट्रम्प का स्वभाव लगातार सुर्खियों में रहने वाला है, अपनी पसंद के सवाल पूछने वाले पत्रकार और अपनी बात से सहमत होने वाले लोग उन्हें पसंद हैं। लेकिन अमेरिका के सभी टीवी न्यूज चैनलों ने ट्रम्प पर पूरी तरह बैन लगा दिया है, यहां तक कि ट्रम्प के पसंदीदा फॉक्स चैनल ने भी इस बैन में हिस्सा लिया है, जिससे अब टीवी पर ट्रम्प का दिखना पूरी तरह बंद हो गया है। लेकिन जल्दी यह विवाद खत्म कर हालात पहले जैसे कर देने से ट्रम्प का ईगो हर्ट होगा, इसलिए वे बैन रद्द नहीं करेंगे। इसी वजह से ट्रम्प की मुश्किल और उलझन बढ़ गई है।

ट्रम्प पर यह बैन सिर्फ टीवी पर दिखने वाले न्यूज चैनलों ने लगाया है। इस वजह से प्रिंट मीडिया, प्राइवेट यूट्यूब चैनल, फोटो जर्नलिस्ट और रेडियो वाले लोग उन्हें कवर करना जारी रखे हुए हैं। इस पूरे विवाद के बीच व्हाइट हाउस ने अपना खुद का यूट्यूब चैनल भी शुरू कर दिया है, लेकिन उसकी पहुंच और व्यूअरशिप अभी बड़ी ना होने की वजह से फिलहाल अमेरिकी जनता का उस पर ज्यादा ध्यान नहीं है।

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