ट्रम्प के दस्तखत के बाद भारत पर 100% टैरिफ का खतरा, रूसी तेल खरीद बनी वजह
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस-ईरान प्रतिबंध कानून पर दस्तखत किए, जिससे रूसी तेल खरीदने वाले भारत जैसे देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का रास्ता खुल गया है।
दुनिया भर के बाजारों में इस वक्त टेंशन बढ़ी हुई है, और अब भारत पर भी 100% टैरिफ लगने का खतरा मंडरा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस और ईरान पर प्रतिबंध वाले कानून पर दस्तखत कर दिए हैं। इस कानून की वजह से ट्रम्प को यह अधिकार मिल गया है कि वे रूस से और रूस के जरिए बड़े पैमाने पर एनर्जी खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगा सकें। चीन के साथ-साथ भारत भी रूसी तेल का एक बड़ा खरीदार है, इसलिए ट्रम्प के निशाने पर आए मुख्य देशों में भारत का नाम भी शामिल है।
अगर ट्रम्प ने भारत पर सच में 100% टैरिफ लगा दिया, तो इसका बड़ा असर हो सकता है, क्योंकि भारत और अमेरिका एक-दूसरे के बड़े व्यापारिक पार्टनर हैं और अमेरिका को होने वाला भारत का निर्यात काफी बड़ा है।
इस कानून का नाम है 'लिंडसे ओ. ग्रैहम रूस और ईरान प्रतिबंध कानून 2026'। यह उन पांच देशों को टारगेट करता है जो रूस से भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीदते हैं - चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान। यह बिल पिछले अगस्त में अमेरिकी सीनेट में 86-11 वोटों से पास हो गया था। इसके बाद इसे मंजूरी मिली और अब व्हाइट हाउस ने बताया है कि राष्ट्रपति ट्रम्प ने इस पर दस्तखत कर दिए हैं।
यह कानून सिर्फ रूस पर ही नहीं, बल्कि पहले से ईरान पर लगे प्रतिबंधों का भी दायरा बढ़ाता है। खास बात यह है कि जो देश रूस से तेल और गैस खरीदते हैं, उन पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार अब ट्रम्प के पास आ गया है। इस कानून के मुताबिक अमेरिका के ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव हर 180 दिन में इस लिस्ट की समीक्षा करेंगे। हालांकि भारत ने साफ कह दिया है कि इस फैसले से उसके हितों से समझौता नहीं होने दिया जाएगा।
रूस-यूक्रेन जंग शुरू होने के बाद से भारत लगातार रूस से तेल खरीद रहा है और सस्ते दाम पर मिलने वाले इस कच्चे तेल की खरीद बढ़ती ही जा रही है। फिलहाल भारत अपनी कुल तेल जरूरत का 40 फीसदी से ज्यादा हिस्सा रूस से ही खरीद रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त 2026 में भारत ने रूस से रोजाना करीब 2.08 मिलियन बैरल कच्चा तेल खरीदा था। इससे पहले जुलाई में यह आंकड़ा रोजाना 2.82 मिलियन बैरल तक पहुंच गया था।
अब अगर अमेरिका के 100% टैरिफ के डर से भारत ने रूसी तेल की जगह दूसरे देशों से तेल खरीदना शुरू किया, तो सीधे-सीधे उसके इंपोर्ट बिल में बड़ा इजाफा हो जाएगा। महंगा तेल खरीदने से देश में महंगाई का खतरा भी बढ़ेगा। खासकर पेट्रोल और डीजल की महंगाई का असर आम आदमी पर भारी पड़ सकता है।
अभी भारत पर अमेरिका का टैरिफ 18% है, लेकिन अगर भारत नए कानून के बावजूद रूसी तेल की खरीद जारी रखता है, तो उसे 100% टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है। इसका सीधा असर भारत के निर्यात बिल पर पड़ेगा। ज्यादा टैरिफ लगने से अमेरिका में भारतीय सामान महंगा हो जाएगा, और अमेरिकी ग्राहक इन महंगी चीजों की बजाय बांग्लादेश, वियतनाम या दूसरे देशों के सस्ते विकल्पों की तरफ मुड़ जाएंगे, जिससे भारत के निर्यात पर काफी असर पड़ेगा।
100% अमेरिकी टैरिफ का असर समझने के लिए भारत के अमेरिका को होने वाले निर्यात के आंकड़े देखना जरूरी है। टेक्सटाइल, रत्न-आभूषण, इंजीनियरिंग सामान, चमड़े का सामान, समुद्री उत्पाद और केमिकल्स बड़ी मात्रा में अमेरिका को भेजे जाते हैं। टैरिफ लगने से इन चीजों की डिमांड घटने का खतरा है।
मंत्रालय की तरफ से जारी माल और सामान के व्यापार से जुड़े ताजा आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि के मुकाबले अगस्त 2026 में भारत का अमेरिका को निर्यात 21.83 फीसदी बढ़कर 8.4 अरब डॉलर (80,000 करोड़ रुपये से ज्यादा) हो गया, वहीं अमेरिका से भारत का इंपोर्ट 65.78 फीसदी बढ़कर 5.97 अरब डॉलर पर पहुंच गया।
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