ट्रम्प का बड़ा फैसला, CNN, MS NOW और Politico के लिए व्हाइट हाउस में एंट्री बैन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने तीन मीडिया संस्थानों पर व्हाइट हाउस में एंट्री को लेकर बैन लगाने का ऐलान किया है, फेक न्यूज का आरोप लगाया है।
अमेरिका से एक बड़ी खबर आई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने CNN, MS NOW और Politico, इन तीन मीडिया संस्थानों की व्हाइट हाउस में एंट्री बंद करने का फैसला सुनाया है। ट्रम्प का कहना है कि ये तीनों संस्थान उनके प्रशासन के बारे में फेक न्यूज, झूठी और काल्पनिक जानकारी छाप रहे हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने ये भी इशारा दिया है कि आगे कुछ और मीडिया संस्थानों पर भी ऐसी ही कार्रवाई हो सकती है।
इस फैसले के बाद अमेरिका में जोरदार बहस छिड़ गई है। लोगों का कहना है कि मीडिया की आजादी पर इस तरह की पाबंदी लगाना अमेरिका जैसे लोकतांत्रिक देश को शोभा नहीं देता। कई लोगों का ये भी मानना है कि इस वजह से अमेरिका दुनिया के दूसरे देशों के सामने अपनी मीडिया आजादी को लेकर बोलने का हक खो सकता है। हालांकि ट्रम्प पर इसका कितना असर या दबाव पड़ेगा, ये आने वाला वक्त ही तय करेगा।
ट्रम्प का असल एतराज क्या है, इस पर बात करें तो अमेरिका में ज्यादातर मीडिया पर इस्रायल समर्थक लॉबी का असर होने की बात कही जाती है, लेकिन कई मीडिया संस्थान खुलकर खोजी पत्रकारिता करते हुए सरकार पर सवाल भी उठाते रहे हैं। राष्ट्रपति ने भले ही एक-दो मीडिया संस्थानों की व्हाइट हाउस एंट्री रोक दी हो, फिर भी अमेरिका में राष्ट्रपति का प्रेस कॉन्फ्रेंस न लेना, ऐसा हो ही नहीं सकता। वहां की जनता और मीडिया सरकार पर लगातार दबाव बनाते रहते हैं, आलोचना करते रहते हैं। अमेरिका में भले ही पूंजीवाद खुलेआम राजनीति में हावी हो, फिर भी वहां हर नागरिक को अहमियत दी जाती है, यही वहां की राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक बनावट रही है।
इसी बीच ट्रम्प ने कहा है कि जिन मीडिया संस्थानों पर बैन लगाया गया है, वो लगातार उनके प्रशासन के खिलाफ नेगेटिव खबरें दे रहे हैं। पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने न्यूयॉर्क टाइम्स और वॉशिंगटन पोस्ट पर भी निशाना साधा और आगे और मीडिया संस्थानों पर कार्रवाई की संभावना जताई।
दूसरी ओर CNN ने ट्रम्प के इस फैसले का विरोध करते हुए कहा है कि उनकी व्हाइट हाउस टीम की रिपोर्टिंग फेयर और सही है। CNN के मुताबिक अमेरिकी संविधान के फर्स्ट अमेंडमेंट के तहत सरकार के दखल के बिना पत्रकारिता करने का अधिकार सुरक्षित है। Politico ने भी कहा है कि वो अपनी रिपोर्टिंग जारी रखेगा और फर्स्ट अमेंडमेंट के तहत अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी रास्ता अपनाएगा।
यह मामला सिर्फ एक मीडिया संस्थान की एंट्री तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रेस और सरकार के बीच के रिश्तों से जुड़ गया है। कानूनी जानकारों और प्रेस फ्रीडम से जुड़ी संस्थाओं ने सवाल उठाया है कि क्या सरकार किसी मीडिया संस्थान की खबरों की वजह से उसकी एंट्री रोक सकती है। इस बहस में खासतौर पर 1977 के Sherrill v. Knight केस का हवाला दिया जा रहा है।