मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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20:18 IST

टेनेसी में दो घातक इंजेक्शन के बाद भी जिंदा रही क्रिस्टा पाईक, मौत की सजा टली

अमेरिका के टेनेसी में 30 साल से मौत की सजा का इंतजार कर रही महिला दो घातक इंजेक्शन के बाद भी नहीं मरी। सजा फिलहाल रोक दी गई है।

टेनेसी में दो घातक इंजेक्शन के बाद भी जिंदा रही क्रिस्टा पाईक, मौत की सजा टली
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

अमेरिका के टेनेसी राज्य से एक ऐसी खबर आई है जिसने वहां के कानूनी इतिहास को हिला दिया है। एक हत्या के आरोप में पिछले 30 साल से जेल में मौत की सजा का इंतजार कर रही क्रिस्टा पाईक (Christa Pike) को सजा देने की कोशिश नाकाम हो गई। जेल प्रशासन ने उन्हें दो घातक इंजेक्शन दिए, फिर भी उनकी मौत नहीं हुई।

इस घटना के बाद उनकी सजा फिलहाल रोक दी गई है। इस वक्त उनका अस्पताल में आपात इलाज चल रहा है।

आधिकारिक जानकारी के मुताबिक 50 साल की क्रिस्टा पाईक को 1996 में अपने एक क्लासमेट की बेरहमी से हत्या करने के मामले में दोषी ठहराया गया था और मौत की सजा सुनाई गई थी। लंबी कानूनी लड़ाई चली और कई याचिकाएं खारिज हुईं। इसके बाद अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने उनकी मौत की सजा पर आखिरी मुहर लगा दी थी।

इसी के तहत टेनेसी की रिवरबेंड मैक्सिमम सिक्योरिटी इंस्टीट्यूशन में सजा देने की प्रक्रिया शुरू हुई। पहले जहरीले रसायन का इंजेक्शन दिया गया, फिर दूसरा। लेकिन दो डोज के बाद भी उनका दिल धड़कता रहा। डॉक्टर और वहां मौजूद अफसर हैरान रह गए, क्योंकि वह सिर्फ बेहोश होकर खर्राटे लेने लगी थीं।

जैसे ही यह साफ हुआ कि वह मरी नहीं हैं और उनका दिल चल रहा है, उनकी कानूनी टीम फौरन कोर्ट पहुंची और इस प्रक्रिया को चुनौती दी। वकीलों की दलील थी कि यह प्रक्रिया बेहद क्रूर और नाकाम रही है और इससे कैदी को अमानवीय दर्द झेलना पड़ रहा है। हालात की गंभीरता को देखते हुए जेल प्रशासन ने तुरंत प्रक्रिया रोक दी और पाईक को एंबुलेंस से पास के अस्पताल में भर्ती कराया। बताया जा रहा है कि उनकी हालत चिंताजनक है।

मामला सिर्फ एक हत्या की सजा तक सीमित नहीं है, इसके पीछे 1995 का एक भयानक अपराध है। क्रिस्टा पाईक तब सिर्फ 18 साल की थीं। उन्होंने अपने तत्कालीन बॉयफ्रेंड टेड्रिल शिप के साथ मिलकर एक जॉब ट्रेनिंग कैंप में 19 साल की कोलीन स्लेमर की बेरहमी से हत्या कर दी थी। 1996 में सिर्फ 20 साल की उम्र में उन्हें मौत की सजा सुनाई गई, और वह अमेरिका में सबसे कम उम्र में यह सजा पाने वाली महिलाओं में से एक बनीं।

टेनेसी के इतिहास में इस घटना की अहमियत इसलिए भी है कि राज्य में आखिरी बार किसी महिला को 1819 में, यानी 207 साल पहले, फांसी दी गई थी। उसके बाद आज तक किसी महिला कैदी को घातक इंजेक्शन या फांसी से मौत की सजा नहीं दी गई। अगर इस प्रक्रिया में पाईक की मौत हो जाती, तो वह 207 साल में टेनेसी में मौत की सजा पाने वाली पहली महिला होतीं।

अब इस नाकाम प्रक्रिया के बाद अमेरिका में मौत की सजा के तरीकों पर फिर से तीखी बहस छिड़ गई है। टेनेसी के राज्यपाल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य में सभी मौत की सजाओं की प्रक्रिया कुछ समय के लिए रोकने का आदेश दिया है। सोशल मीडिया से लेकर कोर्ट तक इस पर जोरदार चर्चा है कि अमेरिकी कानून के तहत क्या किसी कैदी को दोबारा मौत की सजा दी जा सकती है, या अमानवीय तकलीफ की वजह से उनकी सजा उम्रकैद में बदल जाएगी।

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