मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
20:04 IST

टाटा सन्स वाद पर शरद पवार का बयान, कहा - समूह किसी एक की नहीं, समाज की मिल्कियत

टाटा सन्स के बोर्ड और टाटा ट्रस्ट्स के बीच छिड़े विवाद पर राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार) के अध्यक्ष शरद पवार ने एक्स पर लंबा बयान जारी किया।

टाटा सन्स वाद पर शरद पवार का बयान, कहा - समूह किसी एक की नहीं, समाज की मिल्कियत
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

टाटा सन्स के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति और आईपीओ प्रोसेस को लेकर टाटा सन्स के बोर्ड और टाटा ट्रस्ट्स के बीच खींचतान बढ़ गई है। इसी विवाद पर अब राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार) के अध्यक्ष शरद पवार ने अपनी बात रखी है। उन्होंने अपने एक्स अकाउंट पर एक विस्तृत पत्र शेयर करके इस पूरे मसले पर खुलकर राय दी।

दरअसल 17 सितंबर को टाटा सन्स की बोर्ड मीटिंग में एन चंद्रशेखरन को अगले 5 साल के लिए फिर से चेयरमैन बनाने का प्रस्ताव 4-1 के बहुमत से पास हो गया था। इस प्रस्ताव के खिलाफ टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने वोट डाला था। इसके बाद टाटा ट्रस्ट की ओर से जारी बयान में कहा गया कि कंपनी के नियमों यानी एओए के मुताबिक ट्रस्ट के नॉमिनेटेड डायरेक्टरों की बहुमत से सहमति जरूरी है, और यहां दोनों डायरेक्टरों में से एक की ही सहमति थी, दोनों की नहीं। इसलिए यह शर्त पूरी न होने से ट्रस्ट ने इस पूरे प्रस्ताव को गैरकानूनी बताया और कहा कि बोर्ड का 4-1 वाला वोटिंग नतीजा बेमतलब है क्योंकि नियमों की अहम शर्तें पूरी नहीं हुईं। ट्रस्ट के मुताबिक नोएल टाटा के विरोध से कोई गतिरोध पैदा नहीं हुआ था, ऐसे में चेयरमैन के कास्टिंग वोट का इस्तेमाल किया जा सकता था।

शरद पवार ने अपने पत्र में लिखा कि टाटा समूह की मिल्कियत किसी एक इंसान के फायदे के लिए नहीं, बल्कि समाज के भले के लिए बनाई गई है। उन्होंने बताया कि इस समूह की नींव जमशेदजी टाटा, सर दोराबजी टाटा और बाद में सर रतन टाटा ने बड़ी मेहनत से रखी थी। पवार ने यह भी कहा कि टाटा सन्स की 66 फीसदी हिस्सेदारी जनकल्याणकारी ट्रस्टों के पास है, और इससे जो कमाई होती है वह स्वास्थ्य, शिक्षा और रिसर्च पर खर्च होती है। इसीलिए टाटा ट्रस्ट के ढांचे और उसके अधिकारों को सुरक्षित रखना जरूरी है। उन्होंने सलाह दी कि यह विवाद कोर्ट में जाने के बजाय बातचीत से सुलझाया जाना चाहिए।

अपने ट्वीट में पवार ने लिखा कि जमशेदजी टाटा और टाटा परिवार ने बिजनेस के साथ-साथ समाजसेवा को भी मूल्यों की एक दिशा दी है, इसलिए टाटा ट्रस्ट की सामाजिक जिम्मेदारी और उसकी संस्थागत भूमिका बनी रहनी चाहिए। उनका कहना था कि टाटा समूह के नेतृत्व को लेकर जब भी कोई फैसला हो, संस्थागत प्रक्रिया और ट्रस्ट की भूमिका का सम्मान होना बहुत जरूरी है, क्योंकि महाराष्ट्र के साथ-साथ पूरे देश के विकास और समाज से जुड़ा टाटा समूह का यह वारिस संभालकर रखना जरूरी है।

पवार ने यह भी लिखा कि टाटा समूह ने टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल, टीआईएफआर और टीआईएसएस जैसी राष्ट्रीय संस्थाएं महाराष्ट्र के लिए खड़ी की हैं। इन संस्थाओं की स्वायत्तता और उनकी संस्थागत कीमतों को देखते हुए, इनका सामाजिक भान बनाए रखना सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है, ऐसा उन्होंने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा।

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे