'स्वर्गंधर्व सुधीर फडके' की स्क्रिप्ट पर योगेश देशपांडे को बेस्ट स्क्रीनप्ले का नेशनल अवॉर्ड
डायरेक्टर और स्क्रीनराइटर योगेश देशपांडे को सुधीर फडके की बायोपिक 'स्वर्गंधर्व सुधीर फडके' के लिए बेस्ट एडेप्टेड स्क्रीनप्ले कैटेगरी में 72वां नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला।
डायरेक्टर और स्क्रीनराइटर योगेश देशपांडे को 72वें राष्ट्रीय चित्रपट पुरस्कार में बेस्ट स्क्रीनप्ले (एडेप्टेड) कैटेगरी में सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार उनकी फिल्म 'स्वर्गंधर्व सुधीर फडके' की स्क्रिप्ट के लिए दिया गया, जो मशहूर संगीतकार सुधीर फडके की जिंदगी और उनके काम पर बनी बायोपिक है। अवॉर्ड सेरेमनी गुजरात के एकता नगर में हुई, जहां भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने योगेश देशपांडे को यह पुरस्कार अपने हाथों से दिया।
यह अवॉर्ड योगेश की फिल्ममेकिंग के सफर में एक बड़ा पड़ाव है। इस म्यूजिकल बायोपिक की स्क्रिप्ट लिखने का काम उन्होंने खुद अपने हाथों में लिया था, और अब उसी काम के लिए उन्हें यह सम्मान मिला है।
इस अवॉर्ड पर बोलते हुए योगेश देशपांडे ने कहा, "बेस्ट स्क्रीनप्ले के लिए नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिलना ऐसा सम्मान है जिसे शब्दों में बताना मुश्किल है. 'स्वर्गंधर्व सुधीर फडके' मेरे लिए बहुत मायने रखने वाला सफर था. सुधीर फडके जैसे महान कलाकार की कहानी बताते वक्त बड़ी जिम्मेदारी और उतनी ही बड़ी क्रिएटिव मौका था. यह अवॉर्ड फिल्म के पीछे की सामूहिक मेहनत की और अपनी संस्कृति व कलात्मक विरासत से जुड़ी कहानियों की ताकत की पहचान है. मुझ पर इस कहानी की जिम्मेदारी सौंपने वाले और इसके सफर में मेरे साथ खड़े रहने वाले हर शख्स का मैं दिल से एहसानमंद हूं."
इस नेशनल अवॉर्ड तक पहुंचने से पहले योगेश का सफर एडवरटाइजिंग और फिल्म इंडस्ट्री में दो दशक से भी ज्यादा के काम से बना है। साल 2000 में एडवरटाइजिंग फील्ड से करियर शुरू करने के बाद उन्होंने 100 से ज्यादा एड फिल्में लिखी और डायरेक्ट कीं, जिससे उन्हें विजुअल स्टोरीटेलिंग और ब्रांड कम्युनिकेशन का जबरदस्त अनुभव मिला। वे पुणे बेस्ड प्रोडक्शन कंपनी RedefineZ Productions के फाउंडर भी हैं। फीचर फिल्म मेकिंग में उनकी एंट्री फिल्म '66 सदाशिव' से हुई थी, जिसके बाद उन्होंने महत्वाकांक्षी म्यूजिकल बायोपिक 'स्वर्गंधर्व सुधीर फडके' की जिम्मेदारी उठाई।
इस फिल्म के म्यूजिक की ऑथेंटिसिटी को खासतौर पर नोटिस किया गया। इसमें लता मंगेशकर, आशा भोसले, सुधीर फडके और किशोर कुमार जैसे दिग्गज सिंगर्स की आवाज में रिकॉर्ड किए गए ओरिजिनल गाने शामिल थे। यह फिल्म पांच देशों में रिलीज हुई थी और इसे क्रिटिक्स की तारीफ के साथ इंटरनेशनल लेवल पर भी पहचान मिली।
योगेश को यह नेशनल फिल्म अवॉर्ड उनके करियर के एक अहम मोड़ पर मिला है, क्योंकि वे अभी अपनी आने वाली मराठी डायरेक्टोरियल फिल्म 'Thumbz Up' की तैयारी में लगे हैं। यह फिल्म फिलहाल प्री-प्रोडक्शन स्टेज में है और कोकण के खूबसूरत नेचुरल बैकड्रॉप पर बेस्ड है। इसमें एक मजबूत महिला किरदार के जरिए डिजिटल दरार के इंसानी असर को दिखाया गया है। कल्चरल रूट्स से जुड़ी कहानी, आज के दौर के विषय और इंसानी भावनाओं पर जोर, इन सबका मिलाजुला रूप इस प्रोजेक्ट में दिखता है, जो योगेश के क्रिएटिव सफर का अगला पड़ाव है।
बेस्ट स्क्रीनप्ले के लिए मिले इस नेशनल फिल्म अवॉर्ड से एडवरटाइजिंग से फिल्म इंडस्ट्री तक योगेश का सफर एक बड़े नेशनल मुकाम पर पहुंच गया है। कल्चरल आइडेंटिटी और आज के दौर के दर्शकों को जोड़ने वाली कहानियों को हमेशा तरजीह देने वाले डायरेक्टर के तौर पर उनकी क्रिएटिव आवाज इस अवॉर्ड से और मजबूत हुई है।