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17:34 IST

सुपर एल निनो का खतरा: अगले 6 महीने में गर्मी से दुनिया भर में 4.51 लाख मौत की आशंका

शिकागो यूनिवर्सिटी की क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब की रिपोर्ट में सितंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच भारत समेत दुनिया भर में गर्मी से होने वाली अतिरिक्त मौतों का अनुमान बताया गया है।

सुपर एल निनो का खतरा: अगले 6 महीने में गर्मी से दुनिया भर में 4.51 लाख मौत की आशंका
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

दुनिया भर के मौसम में जो उलटफेर देखने को मिल रहा है, उससे वैज्ञानिकों की चिंता लगातार बढ़ रही है। इसमें एल निनो नाम की प्राकृतिक मौसमी घटना ने अब रिसर्चरों को खासा परेशान कर दिया है। हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट में बताया गया है कि आने वाले महीनों में सुपर एल निनो का भयानक असर देखने को मिल सकता है। सितंबर 2026 से फरवरी 2027, यानी अगले छह महीनों के दौरान भारी गर्मी की वजह से दुनिया भर में लाखों लोगों की जान को खतरा हो सकता है।

शिकागो यूनिवर्सिटी की क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब ने इस बारे में एक नया और विस्तृत आकलन जारी किया है। रिपोर्ट के मुताबिक जैसे-जैसे मौजूदा सुपर एल निनो ताकतवर होता जाएगा, वैसे-वैसे धरती का तापमान तेजी से ऊपर चढ़ेगा।

रिपोर्ट में बताया गया है कि सितंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच दुनिया भर में सामान्य साल के मुकाबले करीब 4.51 लाख (4,51,000) अतिरिक्त मौतें सिर्फ गर्मी की वजह से हो सकती हैं। यह आंकड़ा आम सालों में होने वाली मौतों से कहीं ज्यादा है। रिसर्च के मुताबिक एल निनो के असर से दुनिया भर की जमीन का तापमान सामान्य से 1.2 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रह सकता है, जिसकी वजह से सामान्य साल के मुकाबले 44 प्रतिशत ज्यादा भीषण गर्मी वाले दिन देखने को मिल सकते हैं। रिसर्चरों का कहना है कि यह हालात आने वाले दो दशक (20 साल) बाद की दुनिया के तापमान की एक झलक भर हैं।

इस पूरे संकट में भारत और उत्तरी गोलार्ध के दूसरे देश काफी संवेदनशील स्थिति में हैं। मिली जानकारी के मुताबिक सितंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच भारत में गर्मी की वजह से करीब 15,800 अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं, जिसमें करीब 1,600 का आंकड़ा अनिश्चितता के तौर पर जोड़ा गया है। भारत के लिए खासतौर पर दिसंबर से फरवरी के महीने अहम रहने वाले हैं। इस दौरान भारत में अनुमानित मौतों में से करीब आधी, यानी लगभग 7,400 मौतें इन्हीं तीन महहीनों में हो सकती हैं। रिसर्चरों के मुताबिक अगली गर्मियों में भारत जैसे उत्तरी गोलार्ध के देशों में यह हालात और बिगड़ने की आशंका है।

दूसरे एशियाई देशों की बात करें तो इंडोनेशिया में करीब 19,300 और फिलीपींस, वियतनाम, थाईलैंड व कंबोडिया जैसे दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में मिलाकर करीब 19,400 अतिरिक्त मौतों का अनुमान है। अफ्रीका के साहेल क्षेत्र (नाइजीरिया, सूडान, नाइजर, चाड) में यह आंकड़ा 66,800 तक पहुंच सकता है, जिसमें अकेले नाइजीरिया में 31,400 मौतों की आशंका जताई गई है। ब्राजील में भी करीब 13,300 लोगों की जान को इस भीषण गर्मी से खतरा बताया गया है।

वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल ऑर्गनाइजेशन (WMO) और अमेरिका की एजेंसी NOAA पहले ही एल निनो के मजबूत होने को लेकर साफ चेतावनी दे चुके हैं। डब्ल्यूएमओ का कहना है कि फरवरी 2027 तक एल निनो के बने रहने की संभावना करीब 100 प्रतिशत है, यानी यह खतरा लंबे समय तक टिक सकता है। कॉपरनिकस संस्था के आंकड़ों के मुताबिक अगस्त 2026 में दुनिया भर की सतह का औसत तापमान 16.96 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जो अब तक का सबसे गर्म अगस्त महीना रहा और यह औद्योगिक क्रांति से पहले के औसत से 1.65 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था। अगस्त में निनो 3.4 क्षेत्र का समुद्री तापमान सामान्य से 1.8 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था, जबकि पूर्वी विषुवतीय पैसिफिक में यह फर्क 3 डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर चला गया था।

क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के सह-संस्थापक माइकल ग्रीनस्टोन ने कहा कि अब तक जलवायु का असर फसलों पर मापा जाता था, लेकिन अब इंसानी जान पर पड़ने वाले इस गंभीर असर के अनुमान भी सामने आ रहे हैं। उनके मुताबिक यह आंकड़े सिर्फ डराने के लिए नहीं हैं, बल्कि नीति बनाने वालों के लिए सख्त कदम उठाने का एक तुरंत का इशारा हैं। रिपोर्ट में इस खतरे से निपटने के लिए कुछ जरूरी कदमों का जिक्र किया गया है, जिनमें लू आने से पहले लोगों को सतर्क करने के लिए असरदार अर्ली वॉर्निंग सिस्टम, सार्वजनिक जगहों पर कूलिंग सेंटर और पीने के पानी की सुविधा, धूप में काम करने वाले मजदूरों के काम के घंटों में बदलाव, और अस्पतालों में हीटस्ट्रोक के इलाज की खास व्यवस्था शामिल हैं।

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