मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:02 IST

सुबह उठते ही हाथ-पैर सुन्न होना, ये लक्षण नजरअंदाज मत करो

डॉक्टरों का कहना है कि नींद से उठते ही अगर बार-बार हाथ-पैरों में सुन्नपन और झनझनाहट महसूस हो तो इसे मामूली समझकर टालना ठीक नहीं, ये मणके, नसों या विटामिन बी १२ की कमी जैसी दिक्कतों का इशारा हो सकता है।

सुबह उठते ही हाथ-पैर सुन्न होना, ये लक्षण नजरअंदाज मत करो
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

बहुत सारे लोगों के साथ ऐसा होता है कि सुबह नींद खुलते ही हाथ और पैर सुन्न पड़े महसूस होते हैं, या फिर उंगलियों और तलवों में मुंग्या सी दौड़ती हैं। ज्यादातर मामलों में इसकी वजह गलत पोजीशन में सोना होता है, जिससे नसों पर कुछ देर के लिए दबाव पड़ जाता है और थोड़ी देर में ये सुन्नपन अपने आप उतर जाता है। मसलन गहरी नींद में हाथ के ऊपर सिर रखकर सोना या घंटों एक ही करवट पड़े रहना, इससे हाथ की रेडियल नर्व और कोहनी के पास की अल्नार नर्व पर जोर पड़ता है, और दिमाग तक जाने वाला सिग्नल कुछ देर के लिए थम सा जाता है।

लेकिन अगर ये सुन्नपन रोज-रोज दोहराता रहे, तो इसे हल्के में लेना ठीक नहीं। ऐसा बार-बार होने के पीछे मणके से जुड़ी दिक्कतें, कार्पल टनल सिंड्रोम, डायबिटीज की वजह से होने वाली न्यूरोपैथी या फिर विटामिन बी १२ की कमी जैसी वजहें हो सकती हैं। शरीर की नसें दिमाग और बाकी अंगों को जोड़े रखती हैं, ये नाजुक बिजली की तारों की तरह काम करती हैं जो शरीर के अलग-अलग हिस्सों से संवेदना का सिग्नल दिमाग तक पहुंचाती हैं। जब रक्त संचार में कोई रुकावट आती है तो शरीर में कई तरह के लक्षण नजर आने लगते हैं। रात को या सुबह उठने पर अगर गर्दन के मणके में नस दब जाए तो कंधे, हाथ और उंगलियों तक झनझनाहट फैल जाती है, और अगर कमर के निचले मणके में दर्द हो तो कूल्हों और पैरों में सुन्नपन उतर आता है।

डायबिटीज के मरीजों की तादाद तेजी से बढ़ रही है, और इस बीमारी में हाथ-पैर की नसें खराब होकर पेरिफेरल न्यूरोपैथी हो जाती है। इसी तरह विटामिन बी १२ की कमी का असर भी मणके और शरीर की नसों पर दिखता है। गलत तरीके से बैठने या सोने की आदत, या फिर खून की नलियों से जुड़ी बीमारियों की वजह से भी शरीर को ठीक से खून नहीं पहुंच पाता। लंबे वक्त तक एक ही पोजीशन में सोए रहने से जोड़ों का चिकनाई वाला द्रव भी कम होने लगता है।

कुछ लक्षणों को तो बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। शरीर के एक तरफ का सुन्न पड़ना, कमजोरी महसूस होना, चेहरा एक तरफ को टेढ़ा होना या बोलने में दिक्कत आना, ये स्ट्रोक से जुड़े लक्षण हो सकते हैं, ऐसे में तुरंत डॉक्टर से इलाज कराना जरूरी है। हथेली या उंगलियों में झनझनाहट को भी अक्सर लोग टाल देते हैं, जबकि इसे भी गंभीरता से लेना चाहिए। इसके अलावा अगर पेशाब या मल पर अचानक कंट्रोल छूट जाए, तेज कमरदर्द के साथ पैरों की ताकत लगातार कम होती जाए, हाथ या पैर अचानक ठंडे, पीले या नीले पड़ने लगें, या फिर शरीर हिलना ही बंद हो जाए, तो इन हालात में भी वक्त गंवाए बिना डॉक्टर से इलाज कराना चाहिए। साथ ही अगर चलते-बोलते अचानक दिखना बंद हो जाए, गोंधल जैसा महसूस हो, चक्कर आने लगे या शरीर का संतुलन बिगड़ जाए, तब भी फौरन इलाज की जरूरत है।

यह जानकारी सिर्फ सामान्य समझ के लिए दी गई है, इसे किसी इलाज का दावा न समझें, कोई भी कदम उठाने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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